पटाखा बाजार में आवंटन से पहले निर्माण: नियम अनुमति और प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

आईडीए की स्वीकृति के बिना विवादित जमीन पर स्थायी दुकानों का किया जा रहा काम
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
रीजनल पार्क स्थित इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) की स्कीम नंबर 97 की जमीन पर थोक एवं खेरची पटाखा बाजार को लेकर करीब 1.07 करोड़ रुपए प्लस जीएसटी की बकाया राशि का विवाद अभी खत्म भी नहीं हुआ है कि अब इसी जमीन पर आवंटन प्रक्रिया पूरी होने से पहले दुकानों के निर्माण का मामले का खुलासा हुआ है।
आरोप है कि आईडीए की स्वीकृति के बिना विवादित जमीन पर स्थायी दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बकाया राशि और जमीन का क्षेत्रफल तय हुए बिना आखिर किस अनुमति के आधार पर निर्माण शुरू हुआ?
जानकारी के अनुसार बकाया राशि के विवाद को सुलझाने के लिए शहर के एक मंत्री की ओर से मध्यस्थता की पहल किए जाने की बात खुलासा हुआ है। दूसरी ओर उसी दौरान आईडीए की जमीन पर निर्माण शुरू होने से प्रशासनिक प्रक्रिया और निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पहले आवंटन, फिर निर्माण, नियम क्या कहते हैं?
नियमों के अनुसार संबंधित भूमि का आवंटन आईडीए द्वारा किया जाता है। इसमें आवंटित क्षेत्रफल और निर्धारित किराया राशि तय होती है। इसके बाद अस्थायी पटाखा बाजार के लिए निर्धारित अवधि में दुकानों का निर्माण किया जाता है। निर्माण कार्य के लिए जिला प्रशासन स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया, निविदा और अन्य शासकीय नियमों का पालन किया जाना अपेक्षित है।
ऐसे में यदि जमीन का आवंटन, क्षेत्रफल और किराया अभी अंतिम रूप से निर्धारित नहीं हुआ है, तो उससे पहले दुकानों का निर्माण किस अनुमति के आधार पर किया जा रहा है, यह जांच का विषय बन गया है। आईडीए की जमीन पर कथित निर्माण के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
कार्यक्रम के लिए 14 लाख रुपए जमा कराए, पटाखा बाजार को लेकर है करोड़ों का विवाद
मामले को और गंभीर बनाने वाला पहलू यह है कि इसी जमीन पर करीब एक माह पहले एक आयोजन के लिए आईडीए ने सख्त वित्तीय शर्तें लागू की थीं। आयोजन के लिए करीब 14 लाख रुपए पहले जमा कराए गए थे। इसमें आयोजन की तैयारी, सामग्री रखने, कार्यक्रम करने और स्थल खाली करने तक की अवधि का शुल्क निर्धारित किया गया था।
वहीं दूसरी ओर इसी भूमि पर करीब 40 दिनों से अधिक अवधि तक थोक एवं खेरची पटाखा बाजार संचालित होना प्रस्तावित है। आईडीए के रिकॉर्ड में इस उपयोग को लेकर एक करोड़ रुपए से अधिक की राशि का विवाद सामने आ चुका है।
इसके बावजूद वर्ष 2026 के पटाखा बाजार के लिए जमीन का अंतिम आवंटन, क्षेत्रफल और किराया निर्धारण स्पष्ट होने से पहले ही दुकानों के निर्माण की स्थिति सामने आने से पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
41 अस्थायी लाइसेंस, 11 को लेकर शिकायत
इसी मामले में 30 अगस्त को कलेक्टर को दिए गए आवेदन में रीजनल पार्क की अस्थायी पटाखा दुकानों के लाइसेंस आवंटन की प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है। शिकायत के अनुसार हर वर्ष करीब 41 अस्थायी लाइसेंस जारी किए जाते हैं। इनमें करीब 11 लाइसेंसधारकों द्वारा दुकान या लाइसेंस कथित रूप से अन्य लोगों को 3 से 5 लाख रुपए सालाना किराये पर दिए जाने की शिकायत की गई है।
आवेदन में पिछले सात वर्षों के लाइसेंस रिकॉर्ड की जांच, लगातार लाइसेंस पाने वालों की सूची और वास्तविक लाइसेंसधारकों के पटाखा कारोबार का सत्यापन कराने की मांग की गई है। इसके लिए गुमास्ता, जीएसटी, पुराने वैट रिकॉर्ड, टैक्स रिटर्न और आयकर रिटर्न जैसे दस्तावेजों से कारोबार का मिलान कराने का सुझाव दिया गया है।
आईडीए के दस्तावेजों में 1.07 करोड़ से अधिक की राशि
खुलासा फर्स्ट द्वारा पूर्व में सामने लाए गए दस्तावेजों के अनुसार, स्कीम नंबर 97 की जमीन के संबंध में पटाखा व्यापारी एसोसिएशन से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में करीब 1.07 करोड़ रुपए प्लस जीएसटी की राशि निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
दस्तावेजों के मुताबिक आईडीए के संपदा अधिकारी ने 9 अक्टूबर 2025 को इस संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सूचना भेजी थी। इसके बाद कार्यपालन यंत्री कमलसिंह को आवश्यक कार्रवाई के लिए मामला भेजा गया।
अतिरिक्त क्षेत्रफल के उपयोग की राशि जमा कराने की जिम्मेदारी सहायक यंत्री कपिलदेव भल्ला को दिए जाने का उल्लेख भी दस्तावेजों में सामने आता है। अब सवाल यह है कि जब अतिरिक्त भूमि उपयोग की राशि को लेकर आईडीए के स्तर पर पत्राचार और कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही थी, तो उसी जमीन पर नए बाजार के लिए निर्माण की अनुमति अथवा प्रक्रिया किस स्तर से आगे बढ़ी?
बिलिंग और भंडारण क्षमता की जांच की मांग
शिकायत में थोक एवं खेरची पटाखा दुकानों पर ग्राहकों को कथित रूप से कच्चे बिल दिए जाने का आरोप लगाते हुए जीएसटी अनुपालन की जांच की मांग भी की गई है। यदि जांच में कर संबंधी अनियमितता या बिना बिल बिक्री की पुष्टि होती है तो संबंधित विभाग द्वारा नियमानुसार कार्रवाई का मुद्दा उठाया गया है।
इसके अलावा विस्फोटक अधिनियम के तहत निर्धारित सीमा से अधिक पटाखों के भंडारण की जांच की मांग भी की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि हर वर्ष निरीक्षण होते हैं, लेकिन कार्रवाई सीमित मामलों तक ही रहती है।
अब जांच के दायरे में ये सवाल
पूरे मामले में अब जमीन आवंटन और निर्माण प्रक्रिया के साथ-साथ बकाया राशि, वास्तविक लाइसेंसधारी, जीएसटी अनुपालन और निर्धारित भंडारण क्षमता की जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
पूरे मामले में आईडीए सीईओ परीक्षित झाड़े से संपर्क किया गया तो उन्होंने माफ कीजिए, मैं अभी बात नहीं कर सकता का एसएमएस किया।
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