कलेक्टर दीदी चली परदेस...छूट गए अनसुलझे मसले
KHULASA FIRST
संवाददाता

IAS भव्या मित्तल 2 साल के अध्ययन अवकाश पर अमेरिका रवाना: खरगोन में थम जाएगी विकास की रफ्तार या नए कलेक्टर संभालेंगे मोर्चा?
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
यही कारण है कि इस विदाई के बीच खेती-किसानी करने वाले ग्रामीण वनवासी अपने आप को एक गहरे अंधकार में खड़ा पा रहे हैं। जिस कलेक्टर के भरोसे वे अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढ़ रहे थे, अचानक उनके सात समुंदर पार परदेस जाने से खेती-किसानी से जुड़े किसानों के सामने कई चुनौतियां अनुत्तरित रह गईं।
भूमि अधिग्रहण के साथ ही राजस्व और सरकारी योजनाओं के आधार में रह गए मामले चिंता का विषय हो गए हैं। खरगोन जैसे जिले के तहसील स्तर के प्रशासन पर वैसे भी ‘बाबू राज’ हावी है। इसकी नकेल कलेक्टर के कारण कसी हुई थी।
अब यह बाबू राज बेलगाम होता नजर आ रहा है। किसान वर्ग अब ऐसे नए कलेक्टर के भरोसे आधबीच में रहेगा, जिनके बारे में अभी कुछ मालूमात नहीं है। मुख्य सचिव अपने तरीके से नए भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसरों को ग्रामीण जिलों में पदस्थ कर रहे हैं, जिनका गांव, खेत-खलिहान और किसानों से ज्यादा वास्ता नहीं है। ऐसे अफसर जनता के प्रति संवेदनशील भी कम ही होते हैं।
अब नवागत कलेक्टर से रहेगी उम्मीद... खरगोन जिले में दो बड़े हाईवे प्रस्तावित हैं, जिनके लिए भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई तेजी से चल रही है। भव्या मित्तल ने प्रभावित भूमि स्वामी और किसानों के लिए संवेदनशीलता के साथ मुआवजा निर्धारण की कार्रवाई आगे बढ़ाई थी।
इसमें उन्हें एमपीआरडीसी, जो बड़वाह-धामनोद फोरलेन स्टेट हाईवे का निर्माण करवा रही है, की मदद नहीं मिल पाई। यही कारण है कि प्रभावित लोगों को आज तक इस प्रोजेक्ट के बारे में कुछ भी नहीं बताया गया।
ऐसा नहीं है कि भव्या मित्तल ने इस एजेंसी का नोटिस नहीं लिया हो, बार-बार निर्देश के बाद भी एजेंसी के अधिकारियों ने प्रभावित लोगों के साथ प्रोजेक्ट को साझा नहीं किया।
मुआवजा निर्धारण भी घोषित नहीं हो पाया। ऐसा ही एक अन्य हाईवे प्रोजेक्ट में भी हो रहा है, जो अभी शुरुआती स्टेज पर है।
नहर निर्माण को लेकर आंदोलन का मिला सहयोग... जिले में भूमि अधिग्रहण और नहर निर्माण को लेकर भारतीय किसान संघ आंदोलन कर रहा है।
भव्या मित्तल के कारण आंदोलन शासन-प्रशासन का सहयोग करता रहा, लेकिन अब परिस्थितियां बदलती हुई नजर आ रही हैं। इसका सीधा असर प्रोजेक्ट पर होगा।
जाते-जाते भी किसानों के हित में दिए निर्देश... किसान संघ ने ही कलेक्टर को ‘किसानों की दीदी’ बनाया था। अब दीदी परदेस जा रही हैं, इसकी जानकारी उन्होंने अपने किसान भाइयों से पहले साझा नहीं की। इस कारण समाधान लंबे खिंच गए।
हालांकि उन्होंने जाते-जाते किसानों के साथ लंबी बैठक करके आदेश-निर्देश तो दिए, लेकिन इस सबका अब कोई ज्यादा मतलब नहीं रह गया। जैसा भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष इंजीनियर सदस्य पाटीदार कहते हैं कि कलेक्टर के अचानक विदेश जाने से कई सारी समस्याएं अधबीच में रह गईं।
अब सब कुछ नए सिरे से शुरू होगा। जिले का कलेक्टर किस तरह का होगा और उसकी क्या प्राथमिकताएं होंगी, खेती-किसानी और जनता के प्रति कितना संवेदनशील हो पाएंगे, यह देखना होगा। इस सब का सीधा प्रभाव सरकार की योजनाओं पर पड़ेगा।
खरगोन की जनता की उम्मीदों और नाउम्मीदों के साथ कलेक्टर दीदी का सफर अब एक नए मोड़ पर है। हाल ही में कार्यभार से मुक्त हुईं खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल अमेरिका जा रही हैं। ऐसे कई अधिकारी विदेश जाते रहते हैं, लेकिन उनकी चर्चा नहीं होती। भव्या मित्तल के मामले में उनका रहना इसलिए ज्यादा मायने रखता है, क्योंकि उन्होंने जनता के बीच कई उम्मीदें जगा दी थीं।
अध्ययन अवकाश पर न्यूजर्सी में रहेंगी दो साल
जनसुनवाई और निरीक्षणों से चर्चित रहीं कलेक्टर भव्या मित्तल अध्ययन अवकाश पर अमेरिका रवाना हो रही हैं। दो वर्ष के अध्ययन अवकाश पर रहेंगी। उनकी छुट्टी 11 जुलाई से प्रभावी हो चुकी है और इसी माह वे अमेरिका रवाना होंगी, जहां न्यू जर्सी स्थित प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में पब्लिक अफेयर्स विषय में मास्टर्स की पढ़ाई करेंगी।
उनकी छह वर्षीय बेटी भी साथ जाएगी और वहीं अपनी स्कूली शिक्षा शुरू करेगी। मध्य प्रदेश कैडर की 2014 बैच की आईएएस अधिकारी भव्या मित्तल 30 जनवरी 2025 से खरगोन में कलेक्टर के पद पर कार्यरत थीं। इससे पहले वे बुरहानपुर जिले में कलेक्टर रह चुकी हैं, जहां उनके कुछ प्रशासनिक फैसलों को लेकर चर्चा हुई थी। खरगोन में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने जल संरक्षण और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया।
राजस्व प्रशासन और कानून-व्यवस्था भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहे। वे नियमित रूप से जनसुनवाई करती रहीं और गांवों, स्कूलों तथा अस्पतालों का लगातार निरीक्षण करती रहीं, जिसे प्रशासन को जनकेंद्रित बनाने की दिशा में एक प्रयास के तौर पर देखा गया।
हालांकि उनके प्रस्थान के साथ ही जिले में यह चर्चा भी है कि कुछ लंबित प्रशासनिक मामलों और स्थानीय समस्याओं का समाधान अब नए सिरे से देखना होगा। इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक ब्योरा सामने नहीं आया है। जिले के नए कलेक्टर के दायित्व संभालने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन-से कार्य प्रगति पर होंगे और किन पर आगे कार्रवाई प्राथमिकता से आगे बढ़ती है।
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