मुख्य चुनाव आयुक्त पर रिश्वत मांगने का आरोप: सरकार ने दी विजिलेंस जांच की मंजूरी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, तिरुवनंतपुरम।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। केरल सरकार ने उनके पुराने कार्यकाल से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए राज्य के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) को मंजूरी दे दी है।
2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप
मामला उस समय का है, जब ज्ञानेश कुमार केरल में लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव के पद पर तैनात थे। उन पर सड़क निर्माण परियोजना से जुड़े भुगतान जारी करने के बदले 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया है।
गृह मंत्री ने जानकारी दी
केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने बुधवार को इस फैसले की जानकारी दी। उनके मुताबिक, मामले की फाइल के साथ कानूनी राय भी सरकार को मिली थी। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत जांच आगे बढ़ाने के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी थी।
जांच की अनुमति दी गई
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन से चर्चा के बाद जांच की अनुमति दी गई। अब विजिलेंस ब्यूरो शिकायत में लगाए गए आरोपों और उनसे जुड़े तथ्यों की प्रारंभिक पड़ताल करेगा। इसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला होगा।
यह है पूरा मामला
यह पूरा मामला केरल में तिरुवनंतपुरम से अंगमाली तक मेन सेंट्रल रोड के विकास से जुड़ा है।
इस परियोजना पर PATI-BEL नाम का भारत-मलेशिया संयुक्त उपक्रम काम कर रहा था। परियोजना के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक से वित्तीय सहायता मिली थी।
शिकायतकर्ता और ठेकेदार सज्जन का आरोप है कि परियोजना से जुड़े काम के बिलों का भुगतान लंबे समय तक रोका गया था।
उस समय PWD सचिव रहे ज्ञानेश कुमार ने भुगतान जारी करने के बदले 2 करोड़ रुपये की मांग की थी।
शिकायतकर्ता का दावा है कि परियोजना से जुड़े मलेशियाई अधिकारी ली सी बीन ने उन्हें इस कथित रिश्वत मांग के बारे में बताया था।
हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
मलेशियाई इंजीनियर की आत्महत्या का भी आया जिक्र
इस मामले में मलेशियाई कंपनी के परियोजना अधिकारी ली सी बीन की आत्महत्या का भी उल्लेख किया गया है।
आरोप है कि परियोजना के बिलों का भुगतान नहीं होने के कारण कंपनी आर्थिक दबाव में थी। इससे स्थानीय ठेकेदारों और सप्लायरों का भुगतान भी प्रभावित हो रहा था।
शिकायतकर्ता सज्जन का दावा है कि ली सी बीन ने कथित रिश्वत मांग के बारे में उन्हें जानकारी दी थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ली की मौत के बाद उनके परिवार के सदस्यों ने कंपनी के कर्मचारियों को बताया था कि सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का जिक्र था।
हालांकि, सुसाइड नोट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
पहले भी हुई थी विजिलेंस जांच
इस मामले में वर्ष 2006 में भी विजिलेंस जांच शुरू हुई थी। उस समय सड़क परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं और भुगतान से जुड़े आरोप सामने आए थे।
हालांकि, आरोपों की पुष्टि नहीं होने के आधार पर आगे की कार्रवाई बंद कर दी गई थी। अब ठेकेदार की नई शिकायत के बाद पुराने मामले की जांच फिर से चर्चा में आ गई है।
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि पिछली जांच में उन लोगों के बयान नहीं लिए गए थे, जिन्हें रिश्वत मांग के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी थी।
उन्होंने जांच एजेंसी को संबंधित लोगों और दस्तावेजों के बारे में जानकारी देने की पेशकश भी की है।
अब विजिलेंस ब्यूरो खंगालेगा पुराने दस्तावेज
केरल सरकार की मंजूरी के बाद अब विजिलेंस ब्यूरो शिकायत में लगाए गए आरोपों, सड़क परियोजना के भुगतान, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और पुरानी जांच के रिकॉर्ड की पड़ताल करेगा।
प्रारंभिक जांच के बाद ही एफआईआर दर्ज करने या अन्य कानूनी कार्रवाई को लेकर फैसला होगा।
फिलहाल ज्ञानेश कुमार पर लगाए गए रिश्वत के आरोप साबित नहीं हुए हैं। इस मामले में जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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