एक सरकारी जमीन पर बुलडोजर दूसरी पर संरक्षण: सिरपुर में 40 करोड़ की शासकीय भूमि पर एफआईआर और बेदखली, अलवासा में शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं
KHULASA FIRST
संवाददाता

प्रशासन के दोहरे रवैये पर उठे सवाल
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर भूमाफियाओं के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत प्रशासन के दोहरे रवैये की कहानी बयां कर रही है। एक ओर मल्हारगंज के सिरपुर में 40 करोड़ रुपए की शासकीय भूमि पर अवैध कॉलोनी बसाने के मामले में एफआईआर, बेदखली और अतिक्रमण हटा कर प्रशासन सख्ती दिखा रहा है, दूसरी ओर खुलासा फर्स्ट ने हातोद तहसील के ग्राम अलवासा के जिस शासकीय भूमि घोटाले का खुलासा किया, उसमें कार्रवाई नहीं होने से राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक मिलीभगत के आरोप गंभीर हो गए हैं।
सिरपुर में प्रशासन ने जांच के बाद आरोपी अज्जू खान के खिलाफ बीएनएस की धाराओं में अपराध दर्ज कर करोड़ों की सरकारी जमीन को मुक्त कराने की कार्रवाई शुरू कर दी। प्रशासन का दावा है कि लगभग 100 प्लॉट बेचकर 5 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी की गई।
लेकिन ठीक एक दिन पहले खुलासा फर्स्ट ने ग्राम अलवासा की शासकीय भूमि पर अवैध प्लॉटिंग का खुलासा किया था। शिकायतकर्ता अंकित धूलधोये ने आरोप लगाया था सरकारी जमीन को निजी बताकर प्लॉट बेचे जा रहे हैं, शिकायत करने पर कार्रवाई के बजाय शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया और मामले को दबाने का प्रयास किया गया। प्रशासन ने अब तक एफआईआर या बेदखली जैसी सख्त कार्रवाई नहीं की है।
क्या राजनीतिक प्रभाव देखकर होती है कार्रवाई ?
दोनों मामलों में आरोप एक जैसे हैं- शासकीय भूमि पर अवैध प्लॉटिंग, नोटरी के माध्यम से बिक्री और आम लोगों से करोड़ों रुपए की वसूली। फिर सवाल है एक मामले में बुलडोजर और एफआईआर, जबकि दूसरे मामले में केवल ‘जांच जारी है’ जवाब क्यों? यही वजह है अब चर्चा तेज हो गई है क्या कुछ भूमाफियाओं को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण राजस्व अमला उनके खिलाफ कार्रवाई करने से बच रहा है।
कलेक्टर के आदेश पर भी सवाल
कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए थे शासकीय भूमि पर अतिक्रमण और अवैध कॉलोनाइजेशन के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होगी तथा लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन अलवासा प्रकरण में शिकायतकर्ता के आरोप प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। यदि शिकायत सही है तो प्लॉटिंग क्यों नहीं रोकी गई? गलत है तो जांच पूरी कर सच्चाई सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
पहले ही किया था आगाह
खुलासा फर्स्ट लगातार सरकारी जमीनों पर अवैध कॉलोनियों और भूमाफियाओं के नेटवर्क का खुलासा कर रहा है। अलवासा मामले में भी खबर प्रकाशित कर प्रशासन को चेताया था।
समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भोले-भाले लोग अपनी जीवनभर की कमाई गंवा बैठेंगे। इसके बावजूद ठोस कार्रवाई का अभाव है।
दोहरे रवैये पर सवाल
एक जैसी प्रकृति के दो मामलों में प्रशासन का रवैया अलग-अलग क्यों?
सिरपुर में एफआईआर और बेदखली, जबकि अलवासा में केवल जांच क्यों?
शिकायतकर्ता पर दबाव बनाने के आरोपों की स्वतंत्र जांच कब होगी?
क्या अलवासा मामले में किसी प्रभावशाली व्यक्ति या राजनीतिक संरक्षण के कारण कार्रवाई रुकी हुई है?
कलेक्टर के आदेश के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी?
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