ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन प्रदेश का गौरव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव: 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक में संबोधन
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को कहा ब्रिक्स के संस्कृति मंत्रियों एवं वैश्विक प्रतिनिधियों का सम्मेलन राज्य के लिए गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों और संस्कृति कार्य समूह की बैठकों के समापन अवसर पर मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे।
ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों के गहन मंथन और बहुपक्षीय चर्चाओं के उपरांत सर्वसम्मति से ‹भोपाल घोषणा पत्र› को अपनाया गया, जो ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों, विरासत संरक्षण और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री ने भारतीय चिंतन के मूल मंत्रों—वसुधैव कुटुंबकम›, ‹जीओ और जीने दो› तथा ‹सर्वे भवंतु सुखिनः›—का उल्लेख कर कहा भारत की यह प्राचीन अवधारणा विश्व शांति, सद्भाव और वैश्विक कल्याण की पक्षधर रही है। देश का ‹हृदय स्थल› मध्यप्रदेश इस ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी और मेजबान बनकर गौरवान्वित हुआ है।
मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक चेतना, ऐतिहासिक स्थापत्य कला और जनजातीय विरासत का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी विदेशी मेहमानों को राज्य की समृद्ध कला-संस्कृति, विशिष्ट व्यंजनों और आत्मीय आतिथ्य का एक अलौकिक अनुभव प्राप्त हुआ है। इस बैठक न केवल ब्रिक्स राष्ट्रों के बीच सांस्कृतिक साझेदारी प्रगाढ़ हुई है, बल्कि प्रदेश के पर्यटन, हस्तशिल्प और लोक कलाओं को भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली है।
'भोपाल घोषणा पत्र' से दीर्घकालिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त: शेखावत
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत ने कहा भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के अंतर्गत संस्कृति कार्य समूह की बैठकों का एक सुव्यवस्थित क्रम रहा। इसके अंतर्गत पहली ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की बैठक 29–30 अप्रैल को वर्चुअली की गई, दूसरी 4–5 जून को वाराणसी और तीसरी 5–6 अगस्त भोपाल में।
इनके गहन विचार-विमर्श का समापन 8 अगस्त को भोपाल में आयोजित 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक के साथ हुआ, जिसमें सर्वसम्मति से ‹भोपाल घोषणा पत्र› को पारित किया गया शेखावत ने कहा इस वर्ष भारत की अध्यक्षता में सम्मेलन की मूल थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ थी।
सामान्यतः अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के घोषणा पत्र केवल सैद्धांतिक बातों तक सीमित रहते हैं, लेकिन ‹भोपाल घोषणा पत्र› एक परिणामोन्मुख (व्यावहारिक और भविष्य-उन्मुख दस्तावेज है, जिसमें स्पष्ट लक्ष्य, क्रियान्वयन का मार्ग और समय-सीमा तय की गई है।
भारत सहित 14 देशों के 55 प्रतिनिधियों ने सहभागिता की, जिनमें 10 ब्रिक्स सदस्य देश (ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात) तथा 4 साझेदार देश (बेलारूस, क्यूबा, कजाकिस्तान और थाईलैंड) शामिल थे।
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