बालाघाट की आंखें नम: यादों में रहेंगे आईपीएस आदित्य मिश्रा
KHULASA FIRST
संवाददाता

तबादले पर भावुक हुए लोग, नक्सल विरोधी अभियानों से ‘मैं खाकी हूं’ तक चर्चा में रहा कार्यकाल, ‘ऐसे एसपी नहीं मिलेंगे’
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नक्सल विरोधी अभियानों से लेकर हेलमेट की अनिवार्यता तक, सख्त फैसलों और सहज व्यवहार ने बनाई अलग पहचान; विदाई के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे डांस के वीडियो, लोगों की जुबां पर एक ही बात- ऐसे एसपी फिर नहीं मिलेंगे!
किसी अधिकारी का तबादला सरकारी व्यवस्था का सामान्य हिस्सा होता है। आदेश जारी होता है, नई जिम्मेदारी मिलती है और अधिकारी अगले पड़ाव की ओर बढ़ जाता है, लेकिन कुछ विदाइयां केवल एक कुर्सी खाली होने की खबर नहीं होतीं।
वे उन यादों को पीछे छोड़ जाती हैं, जो लोगों के मन में धीरे-धीरे जगह बनाती हैं। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी आदित्य मिश्रा के तबादले के बाद कुछ ऐसा ही माहौल हो गया है।
हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल में 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी आदित्य मिश्रा को बालाघाट पुलिस अधीक्षक के पद से स्थानांतरित कर देवास का पुलिस अधीक्षक बनाया गया है।
उनके स्थानांतरण के बाद सोशल मीडिया पर उनके कार्यकाल से जुड़े वीडियो, तस्वीरें और संदेश साझा किए जा रहे हैं। कोई उनके सख्त पुलिसिंग अंदाज को याद कर रहा है, तो कोई उनके सहज व्यवहार और पुलिसकर्मियों के साथ बिताए पलों को। उनके डांस के पुराने वीडियो भी एक बार फिर चर्चा में हैं।
इन प्रतिक्रियाओं के बीच एक बात साफ दिखाई देती है- आदित्य मिश्रा की पहचान केवल एक पुलिस अधिकारी की नहीं, बल्कि ऐसे अधिकारी की बनी, जिनके काम करने के तरीके और व्यक्तित्व ने लोगों का ध्यान खींचा। बालाघाट में आदित्य मिश्रा के तबादले के बाद उनके पुराने वीडियो फिर से सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगे हैं।
बताया गया है कि पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के एक विदाई समारोह से जुड़ा ‘फंस गई जल मछली…’ गीत पर उनका डांस भी वायरल हो रहा है। इससे पहले होली के दौरान ‘कजरा रे…’ गीत पर उनके डांस की झलकियां भी लोगों ने पसंद की थीं। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने उनके कार्यकाल की सराहना की है, जबकि कुछ ने उनके देवास आने को लेकर उत्साह जताया है।
खाकी की सख्ती के साथ दिखाई दी इंसानियत
पुलिस की वर्दी अपने साथ अनुशासन, जिम्मेदारी और कानून के पालन का दायित्व लेकर आती है। आमतौर पर लोगों के मन में पुलिस अधिकारी की छवि सख्त फैसले लेने वाले व्यक्ति की होती है, लेकिन जब यही अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ सहजता से घुलता-मिलता दिखाई दे, किसी आयोजन में उनके साथ मुस्कुराता नजर आए या अपने मानवीय पक्ष को सामने लाए, तो उसकी एक अलग छवि बनती है।
आदित्य मिश्रा के मामले में भी उनके पुलिसिंग संबंधी कार्यों के साथ-साथ उनका सहज और मिलनसार अंदाज चर्चा में रहा। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ उनके डांस के वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों को पसंद आए। विशेष रूप से ‘फंस गई जल मछली…’ गीत पर उनके डांस का वीडियो इन दिनों साझा किया जा रहा है।
वहीं, होली के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ ‘कजरा रे…’ गीत पर उनके डांस की झलकियां भी लोगों का ध्यान खींच रही हैं। इन वीडियो पर कई यूजर्स ने सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ लोगों ने उन्हें शानदार पुलिस अधिकारी बताया, तो कुछ ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि देवास के लोगों के भाग्य खुल गए।
इन प्रतिक्रियाओं के पीछे केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक वरिष्ठ अधिकारी को अपने अधीनस्थों के साथ सहजता से समय बिताते देखने का आकर्षण भी है। वर्दी की मर्यादा बनाए रखते हुए मानवीय संबंधों को महत्व देने वाला यह अंदाज उनकी सार्वजनिक छवि का उल्लेखनीय हिस्सा बन गया है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र में चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी
बालाघाट मध्य प्रदेश का ऐसा जिला है, जहां माओवादी गतिविधियों और उनसे जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों का इतिहास रहा है। यहां पुलिस की जिम्मेदारी केवल सामान्य अपराधों पर नियंत्रण तक सीमित नहीं रहती, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में अभियान चलाना, सुरक्षा बलों के साथ समन्वय बनाए रखना और स्थानीय लोगों में विश्वास कायम करना भी महत्वपूर्ण होता है।
आदित्य मिश्रा ने 11 जून 2025 को बालाघाट पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके कार्यकाल में नक्सल विरोधी अभियानों और माओवादी हिंसा पर नियंत्रण के प्रयासों को विशेष महत्व मिला। इस दौरान सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के विरुद्ध अभियान चलाए।
देश में 31 मार्च 2026 तक माओवादी हिंसा समाप्त करने के घोषित लक्ष्य की पृष्ठभूमि में भी बालाघाट जैसे क्षेत्रों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। ऐसे अभियानों में पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के साथ खुफिया सूचनाओं का संकलन, स्थानीय स्तर पर समन्वय और निरंतर सतर्कता की अहम भूमिका होती है। बालाघाट में आदित्य मिश्रा के कार्यकाल को याद करते हुए उनके समर्थक और प्रशंसक नक्सल विरोधी अभियानों में निभाई गई भूमिका का उल्लेख कर रहे हैं।
डबल मनी मामले में कार्रवाई से मिली चर्चा
बालाघाट में चर्चित डबल मनी मामले ने भी पुलिस और प्रशासन के सामने गंभीर चुनौती पेश की थी। इस तरह के मामलों में निवेश पर असामान्य रूप से अधिक रकम लौटाने का लालच देकर लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप सामने आते हैं।
आदित्य मिश्रा के कार्यकाल में इस मामले में पुलिस कार्रवाई हुई और मामले के कथित मास्टरमाइंड सोमेंद्र कंकरायने की गिरफ्तारी का उल्लेख किया गया। डबल मनी मामले में कार्रवाई का जिक्र उनके बालाघाट कार्यकाल से जुड़ी प्रमुख घटनाओं में किया जा रहा है।
इसके अलावा जिले में अन्य अपराधों पर नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास भी उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा रहे। आदित्य मिश्रा के कार्यकाल का एक और चर्चित पहलू नवंबर 2025 में शुरू किया गया ‘नो हेलमेट-नो ड्राइव’ अभियान रहा।
इस अभियान का उद्देश्य दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने के प्रति जागरूक करना और यातायात नियमों के पालन को सुनिश्चित करना था। अभियान के दौरान एक पूर्व विधायक के कथित तौर पर बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाते पाए जाने का मामला भी चर्चा में आया था।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन पर 2,300 रुपये का चालान किया गया। चालान की राशि जमा नहीं होने पर उनकी बाइक जब्त कर थाने में रखे जाने की बात सामने आई थी।
‘मैं खाकी हूं’ कविता से जुड़ी पहचान
आदित्य मिश्रा की चर्चा केवल प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस अभियानों तक सीमित नहीं रही। वर्ष 2020 में उनके द्वारा लिखी गई कविता ‘मैं खाकी हूं’ भी चर्चा में आई थी। इस कविता के माध्यम से पुलिस की वर्दी, उससे जुड़ी जिम्मेदारियों, चुनौतियों और कर्तव्यबोध को अभिव्यक्त किया गया था।
इंदौर से बालाघाट और अब देवास तक का सफर: 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी आदित्य मिश्रा ने मध्य प्रदेश में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाई हैं। उनके सेवाकाल में इंदौर में प्रशिक्षु अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, बालाघाट में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (बैहर), बालाघाट में नक्सल ऑपरेशन से संबंधित जिम्मेदारी और राजगढ़ में पुलिस अधीक्षक के रूप में काम करने का उल्लेख मिलता है।
इसके बाद उन्होंने 11 जून 2025 को बालाघाट एसपी का पद संभाला। अब 27 अक्टूबर 2026 के प्रशासनिक फेरबदल के बाद उन्हें देवास पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
यह तबादला उनके सेवाकाल का अगला पड़ाव है। देवास में उन्हें कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराधों पर नियंत्रण, पुलिस व्यवस्था को प्रभावी बनाने और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां निभानी होंगी।
बालाघाट के लिए एक अध्याय समाप्त, देवास के लिए नई शुरुआत: तबादला सरकारी सेवा की प्रक्रिया का हिस्सा है। अधिकारियों को अलग-अलग जिलों में जिम्मेदारी इसलिए दी जाती है, ताकि प्रशासनिक अनुभव का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जा सके, लेकिन हर स्थानांतरण का अनुभव एक जैसा नहीं होता।
कुछ अधिकारी अपने कार्यकाल के कारण लंबे समय तक याद किए जाते हैं, जबकि कुछ की चर्चा उनके फैसलों और काम करने के तरीके के लिए होती है। अब में आदित्य मिश्रा नई भूमिका में नजर आएंगे।
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