आंसू के साथ अन्ना हजारे का मौन: अरविंद की सियासत और अभिजीत का डिजिटल प्रतिरोध
KHULASA FIRST
संवाददाता

क्या छात्र आंदोलन से जन्मेगा राजनीति का नया ध्रुव, लोकतंत्र में ‘आंदोलन से सत्ता' की कसौटी
गांधीवादी अनशन से सोशल मीडिया तक नागरिक असंतोष का बदलता चेहरा
डेढ़ दशक, तीन किरदार और भारतीय लोकतंत्र का ‘संवाद' संकट
2011 का रामलीला मैदान बनाम आज का डिजिटल मंच : कितना बदल गया देश
जब-जब सड़कें उबलती हैं : क्या फिर किसी नए विकल्प की आहट है?
हेमंत उपाध्याय 99930-99008 खुलासा फर्स्ट।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था- “सत्याग्रह और अहिंसक प्रतिरोध का सबसे बड़ा हथियार यह है कि वह सत्ता की ताकत को नहीं, बल्कि उसके विवेक और नैतिक चेतना को झकझोरता है।’ यह विचार आज भारतीय राजनीति के चौराहे पर फिर जीवंत हो उठा है।
जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपने भविष्य और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे छात्रों की आवाज पर शासन की चौखट से सन्नाटा मिला, तो सैकड़ों किलोमीटर दूर अहिल्या नगर (अहमद नगर) के वाडिया पार्क में एक 89 वर्षीय बुजुर्ग का मौन और उसकी आंखों से छलकते आंसू पूरे देश के विवेक को एक बार फिर झकझोरने लगे हैं।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे छात्रों के समर्थन में देश के वयोवृद्ध समाजसेवी अन्ना हजारे का एक बार फिर मैदान में उतरना केवल एक छात्र आंदोलन का समर्थन नहीं है। यह भारतीय राजनीति के उस ऐतिहासिक चक्र की याद दिलाता है, जो डेढ़ दशक पहले शुरू हुआ था।
वाडिया पार्क में अन्ना द्वारा रखा गया दो घंटे का ‘मौन आंदोलन’ और प्रदर्शनकारी छात्रों का दर्द बयां करते हुए उनकी आंखों से छलकते आंसू यह सब एक तरफ मानवीय संवेदना को दर्शाते हैं, तो दूसरी तरफ एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं कि क्या इतिहास खुद को दोहरा रहा है?
इतिहास का पन्ना : 2011 का ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ और अरविंद केजरीवाल का उदय... आज अन्ना के इस मौन आंदोलन का सही विश्लेषण करने के लिए 2011-12 के घटनाक्रम में जाना अनिवार्य है। 2011 में जब अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की अगुआई की, तो वे देशभर के मध्यम वर्ग और युवाओं के लिए एक नैतिक नायक बन चुके थे।
सफेद टोपी और गांधीवादी अनशन उनका प्रतीक बने। उस आंदोलन के असली रणनीतिकार अरविंद केजरीवाल थे। जब यूपीए-2 सरकार के साथ बातचीत बेनतीजा रही, तो केजरीवाल ने तर्क दिया कि व्यवस्था को बाहर से नहीं, बल्कि राजनीतिक सत्ता में शामिल होकर भीतर से बदलना होगा।
अन्ना हजारे का रुख स्पष्ट था। वे राजनीति के खिलाफ थे, लेकिन नवंबर 2012 में केजरीवाल ने ‘आम आदमी पार्टी’ (आप) का गठन कर लिया। इसके बाद हजारे आंदोलन के केंद्र से हटते चले गए। दिल्ली की सत्ता की चमक-दमक के बीच अन्ना रालेगण सिद्धि (अब अहिल्या नगर) तक सीमित होकर रह गए और राजनीतिक विमर्श में मुख्यधारा से पीछे छूट गए।
आज के दौर में अन्ना कितने प्रामाणिक और स्वीकार्य?... अहिल्या नगर में अन्ना के आंसू और मौन प्रदर्शन के बाद यह यक्ष प्रश्न उठता है कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में अन्ना हजारे का नैतिक प्रभाव कितना बचा है? 2011 में उनके पीछे पूरा देश खड़ा था, क्योंकि तब वह एक ‘अराजनीतिक विकल्प’ की उम्मीद थे।
हालांकि केजरीवाल और आप के गठन के बाद आम जनता के एक वर्ग में यह धारणा बनी कि अन्ना के आंदोलन का इस्तेमाल राजनीतिक सीढ़ी के रूप में हुआ। इससे अन्ना के प्रभाव का दायरा सिकुड़ गया।
भारतीय राजनीति और नागरिक आंदोलनों के तीन चरण
यदि हम 2011 से लेकर आज के दौर का तुलनात्मक अध्ययन करें, तो भारतीय राजनीति और नागरिक आंदोलनों के तीन स्पष्ट चरण दिखाई देते हैं।
पहला चरण (अन्ना हजारे- गांधीवादी नैतिक दबाव)
गैर-राजनीतिक मंच, अनशन, मौन और नैतिक प्रभाव का उपयोग करके सरकार पर दबाव बनाना।
दूसरा चरण (अरविंद केजरीवाल- आंदोलन से सत्ता)
आंदोलन की ऊर्जा को वोट बैंक और राजनीतिक दल में बदलना, चुनाव जीतना और ‘गवर्नेंस’ के जरिये व्यवस्था बदलना।
तीसरा चरण (अभिजीत दीपके व समकालीन
कार्यकर्ता- डिजिटल और नागरिक निगरानी)
आज के दौर में जब पारंपरिक आंदोलनों पर राजनीतिक ठप्पे लग जाते हैं, तब अभिजीत दीपके जैसे सोशल मीडिया व डिजिटल मंचों के सक्रिय चेहरे नए नागरिक असंतोष को आवाज दे रहे हैं और ‘डिजिटल प्रतिरोध’ के जरिये तात्कालिक जन-मुद्दों पर सरकार को घेर रहे हैं।
नैतिक प्रामाणिकता बरकरार
इसके बावजूद अन्ना की निजी ईमानदारी और उनका गांधीवादी तरीका (अहिंसा व अनशन) आज भी निर्विवाद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे उनके पत्र में- ‘किसी मंत्री का इस्तीफा लेने से सरकार कमजोर नहीं होती, बल्कि शासन में सुधार का संदेश जाता है’ यह बात दर्शाती है कि सत्ता किसी की भी हो, अन्ना की नैतिक मांग का चरित्र नहीं बदला है।
क्या फिर वैसा ही होगा?
सवाल यह है कि क्या दिल्ली के इस छात्र आंदोलन और अन्ना के समर्थन से फिर कोई नया ‘केजरीवाल’ या नया राजनीतिक विकल्प निकलेगा? इतिहास गवाह है कि जब-जब छात्रों और युवाओं का असंतोष उबलता है, तब-तब व्यवस्था में बड़ा फेरबदल होता है।
‘संवाद’ ही लोकतंत्र का एकमात्र रास्ता
अन्ना हजारे के आंसुओं और वाडिया पार्क के दो घंटे के मौन ने यह साफ कर दिया है कि युवाओं की मांगों को केवल पुलिस कार्रवाई या प्रशासनिक बल से शांत नहीं किया जा सकता।
अन्ना आज भले ही 2011 जितनी राजनीतिक ताकत न रखते हों, लेकिन एक वरिष्ठ नागरिक और समाजसेवी के रूप में उनका ‘मौन’ आज भी देश के विवेक को झकझोरने का दम रखता है।
विश्लेषकों का कहना है कि अब यह केंद्र सरकार पर निर्भर करता है कि वह अन्ना की सलाह मानकर छात्रों के साथ सीधे और पारदर्शी ‘संवाद’ का रास्ता चुनती है या टकराव का।
संबंधित समाचार

सावन का नया स्कूल शेड्यूल:रविवार को लगेंगी कक्षाएं; सोमवार रहेगा अवकाश, महाकाल की सवारी के चलते प्रशासन का फैसला

वीडियो देखिए, मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान:प्रदेश में चार नए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे; युवाओं से जुड़े मामलों का होगा त्वरित निपटारा

पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट:कई लोगों की मौत; धमाके से दहला इलाका, पुलिस और दमकल की टीमें मौके पर पहुंची

प्रिंस की मौत का खुलासा:होटल में ड्रग्स और शराब के ओवरडोज से गई जान, जांच में सामने आई वजह

पत्नी और सौतेली बेटी की हत्या के दोषी को फांसी:कोर्ट ने 13 माह में सुनाया फैसला; बेटे की गवाही बनी अहम सबूत

महिला शिक्षक से दुष्कर्म:सहकर्मी मंदिर ले जाने के बहाने घर ले गया; धमकाकर 6 महीने तक करता रहा शोषण

न्याय के मंदिर में लगेगी मां अहिल्या की मूर्ति और रीगल बनेगा अधिवक्ता चौराहा:प्रशासनिक न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर को सौंपा ज्ञापन

1400 रुपए किलो के काजू में निकले कीड़े:ग्राहक की शिकायत पर मालवा मिल स्थित दुकान से काजू, बादाम और लड्डू के नमूने लिए

जुआ फड़ पर पुलिस की रेड:भाजपा नेता समेत पांच गिरफ्तार; नकदी-बाइक और मोबाइल जब्त

बजरंग दल के विरोध पर झुका स्टूडियो एक्सो:फेक वेडिंग इवेंट रद्द; आयोजकों ने लिखित माफी मांगी

सेल्फी के कुछ मिनट बाद काल बनकर आया ट्रक:दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं की कार को कुचला; महिला की मौत, बच्चे समेत 4 गंभीर

पीसीसी चीफ का आरोप:बोले- 'पूरी भाजपा 50 करोड़ रुपए लेकर दतिया पहुंची है, एक वोट के लिए 5 हजार रुपए तक दिए जा रहे

गांव में तेंदुए का खौफ:चार महीने से दहशत में ग्रामीण; शाम होते ही घरों में हो जाते हैं कैद, खेतों में जाने से भी डर रहे लोग

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला:ट्रस्ट ने बैंक पर डाली जिम्मेदारी पदाधिकारियों की भूमिका संदिग्ध

पदोन्नति में गड़बड़ी आई सामने:नियम विरुद्ध प्रमोशन होंगे रद्द, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई

अमरनाथ मार्ग की सांस्कृतिक विरासत:पत्थरों पर की गई नक्काशी से अमरनाथ तक कश्मीर का वो ऐतिहासिक मार्ग; जहां पत्थरों में बसती थी आस्था

अमरनाथ यात्रा:श्रद्धा भारी, अटल आस्था; सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, बढ़ाई गई सुरक्षा

नीट छात्रों के लिए बड़ी राहत:यहां घटेगी एमबीबीएस की फीस; मेरिट से ही होंगे सभी एडमिशन

चर्चित पूजा स्थल विवाद:वैकल्पिक इबादत स्थल को लेकर कोर्ट इस दिन करेगा सुनवाई

बड़ा उलटफेर:राष्ट्रपति ने दिया इस्तीफा; अब स्पीकर संभालेंगे कार्यभार
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!