अमरनाथ यात्रा: श्रद्धा भारी, अटल आस्था; सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, बढ़ाई गई सुरक्षा
KHULASA FIRST
संवाददाता

जम्मू-कश्मीर में मूसलाधार वर्षा का असर, राष्ट्रीय राजमार्ग-44 बंद
अनंतनाग आतंकी हमले के बाद अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा पर मंथन, एजेंसियां अलर्ट मोड में
खुलासा फर्स्ट, श्रीनगर।
जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन के साथ-साथ देश की सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ यात्राओं में शामिल श्रीअमरनाथ यात्रा को भी प्रभावित कर दिया है। रातभर हुई तेज बारिश के बाद जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) को एहतियातन बंद कर दिया गया है।
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, रामबन और उधमपुर के बीच कई स्थानों पर भूस्खलन, मलबा आने और पहाड़ियों से पत्थर गिरने की घटनाओं के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित है। प्रशासन ने यात्रियों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि मौसम सामान्य होने और सड़क को सुरक्षित घोषित किए जाने तक यात्रा से बचें।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अमरनाथ यात्रा से जुड़े किसी भी वाहन को फिलहाल जम्मू, उधमपुर या रामबन से श्रीनगर की ओर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। यात्रा स्थगित होने के बाद श्रद्धालुओं को जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप तथा कश्मीर के बालटाल, नुनवान और पंथाचौक सहित विभिन्न सुरक्षित स्थलों पर ठहराया गया है, जहां उनके भोजन, आवास और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
इधर, मौसम विभाग ने भी अगले कुछ दिनों तक राहत की संभावना कम जताई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 24 से 29 जुलाई के बीच जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में रुक-रुक कर मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना बनी हुई है।
इससे पहले 22 जुलाई को रियासी में 109 मिमी, रामबन में 58.5 मिमी, जम्मू में 47 मिमी और बनिहाल में 37.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा काजीगुंड, कोकरनाग, बारामूला और पहलगाम समेत कई क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय वर्षा हुई है।
लगातार बारिश के चलते जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में अचानक बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं। कई स्थानों पर सार्वजनिक संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। हालात को देखते हुए कई जिलों में शिक्षण संस्थानों को भी अस्थायी रूप से बंद रखा गया है।
हालांकि, बाढ़ नियंत्रण विभाग ने फिलहाल कश्मीर घाटी में बड़े बाढ़ संकट से इनकार किया है। विभाग के अनुसार, झेलम नदी का जलस्तर बढ़ा जरूर है, लेकिन अभी भी यह खतरे के निशान से नीचे है। साथ ही, इसकी सहायक नदियों के जलस्तर में स्थिरता देखी जा रही है।
इस बीच, प्रशासन ने लोगों को नदियों, झरनों और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है। ट्रैफिक पुलिस ने कहा है कि यात्रा पर निकलने से पहले लोग ट्रैफिक कंट्रोल यूनिट से सड़क की ताजा स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
गौरतलब है कि इस वर्ष श्रीअमरनाथ यात्रा 3 जुलाई को शुरू हुई थी और इसका समापन 28 अगस्त को होना है। हालांकि, मौसम की मार के चलते यात्रा पिछले कई दिनों से प्रभावित है। अब श्रद्धालुओं और प्रशासन की निगाहें मौसम में सुधार और NH-44 के जल्द खुलने पर टिकी हैं, ताकि बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रुकी आस्था की यह यात्रा एक बार फिर आगे बढ़ सके।
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में दिनदहाड़े हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। श्रीअमरनाथ यात्रा के बीच हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सिरे से समीक्षा की आवश्यकता पैदा कर दी है।
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इस हमले को सीधे तौर पर अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में चूक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, लेकिन इसे गंभीर चेतावनी मानते हुए सभी सुरक्षा प्रबंधों का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है।
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, घाटी में सक्रिय आतंकी संगठन अब सीधे सुरक्षा बलों से मुठभेड़ करने के बजाय भीड़भाड़ वाले इलाकों में टारगेट किलिंग की रणनीति अपना रहे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकियों का उद्देश्य कश्मीर में सामान्य होते हालात को प्रभावित करना और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भय का माहौल बनाना है।
सूत्रों के मुताबिक, सीमा पार बैठे आतंकी हैंडलर स्थानीय मॉड्यूल और ओवरग्राउंड वर्करों के माध्यम से लगातार गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं। इसी को देखते हुए सुरक्षा बलों ने घाटी में तलाशी अभियान तेज कर दिया है और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
कश्मीर मामलों के जानकारों का कहना है कि अनंतनाग में हमला ऐसे समय हुआ, जब खराब मौसम के कारण अमरनाथ यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित थी। ऐसे में हमले की टाइमिंग कई सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आतंकियों का उद्देश्य बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाना होता, तो वे किसी अन्य परिस्थिति का इंतजार कर सकते थे।
इससे संकेत मिलता है कि उनका मकसद भय और असुरक्षा की भावना पैदा करना था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिस स्थान पर हमला हुआ वह एक व्यस्त बाजार क्षेत्र है, जहां नियमित रूप से सुरक्षा बल तैनात रहते हैं। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि हमलावरों ने पहले से इलाके की रेकी की थी और घटना को अंजाम देने के बाद फरार हो गए।
अधिकारियों का अनुमान है कि इस हमले में दो से तीन आतंकियों का छोटा मॉड्यूल शामिल हो सकता है। सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि इस घटना को आतंकवाद की नई रणनीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कश्मीर में अतीत में भी इस प्रकार के अचानक हमले होते रहे हैं।
हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में यह घटना सुरक्षा तंत्र के लिए सतर्कता बढ़ाने का संकेत जरूर है। इस बीच, अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी गई है। यात्रा मार्ग, बेस कैंप, काफिलों की आवाजाही और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी को लेकर नई रणनीति तैयार की जा रही है। सुरक्षा बलों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा में किसी प्रकार की कमी न रहे।
गौरतलब है कि इस वर्ष अमरनाथ यात्रा के दौरान पहले से ही सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, ड्रोन निगरानी, फेस रिकग्निशन सिस्टम और बहुस्तरीय जांच व्यवस्था लागू की गई है।
ऐसे में अनंतनाग की घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती केवल आतंकियों के मंसूबों को विफल करना ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के बीच विश्वास और सुरक्षा की भावना को बनाए रखना भी है। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां इस हमले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच में जुटी हैं और घाटी में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
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