लोन स्कीम का झांसा देकर जवान से ठगी: फर्जीवाड़ा कर हड़पे 12.07 लाख रुपए; जालसाज पर केस दर्ज
KHULASA FIRST
संवाददाता

फर्जी सेंक्शन लेटर दिखाकर जीता भरोसा, दो अन्य जवानों को भी लोन का झांसा, तीन राज्यों में आरोपी के पुराने केस भी सामने आए
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सेना में नायक जवान को फोन पर एक ऐसी लोन स्कीम का झांसा दिया गया, जो थी ही नहीं। आरोपी ने पहले जवान को आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड (एजीएम) स्कीम के नाम पर लाखों रुपए का लोन दिलाने का भरोसा दिलाया और दस्तावेज ले लिए।
बाद में जवान की अनुमति के बिना उसके फर्जी हस्ताक्षर व दस्तावेजों का इस्तेमाल कर पंजाब नेशनल बैंक की जम्मू-कश्मीर स्थित शाखा से पर्सनल लोन करा लिया। इतना ही नहीं फिर सब्सिडी के नाम पर रकम अपने और साथियों के खातों में ट्रांसफर करवा ली। बाद में जब जवान के खाते से किस्तें कटने लगीं तो पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जांच में करीब 12 लाख 7 हजार 497 रुपए की धोखाधड़ी सामने आई है।
बड़गोंदा पुलिस के मुताबिक मामले की शिकायत सेना में नायक उमेश कुमार कौल की पत्नी पूनम देवी ने की थी। उमेश वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में पदस्थ हैं। अक्टूबर 2024 में छुट्टी पर इंदौर आने के दौरान आरोपी सागर गुलेरिया निवासी जालंधर, पंजाब ने उनसे फोन पर संपर्क किया।
आरोपी ने खुद को लोन और सब्सिडी की प्रक्रिया से जुड़ा बताते हुए आर्मी के लिए विशेष स्कीम के तहत लोन दिलाने का झांसा दिया। भरोसा दिलाया कि लोन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड योजना के तहत स्वीकृत हो रहा है और इसकी किस्तों की जानकारी बैंक सीधे ई-मेल के माध्यम से देगा।
फर्जी लोन सेंक्शन लेटर दिखाकर बढ़ाया भरोसा... पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने केवल बातों से ही भरोसा नहीं जीता, बल्कि फर्जी दस्तावेज भी दिखाए। सागर ने आर्मी के ही सोमदयाल सिंह और वनमाली प्रधान को भी इसी तरह लाखों रुपए का लोन कराने का भरोसा दिया था।
आरोपी ने सोमदयाल सिंह के वॉट्सऐप पर 10 जनवरी 2026 का 15 लाख रुपए का कथित लोन सेंक्शन लेटर भेजा था। इसमें 12 लाख रुपए सब्सिडी और मात्र 3 लाख रुपए ही बैंक में जमा करने का उल्लेख था।
यह दस्तावेज देखकर उमेश कुमार को आरोपी सागर गुलेरिया की बात पर विश्वास हो गया। सागर के कहे पर उमेश कुमार ने जरूरी दस्तावेज उसे वॉट्सऐप पर भेज दिए। कुछ महीने बाद सागर ने उमेश कुमार को बताया कि उनका लोन स्वीकृत हो गया है।
इसके बाद आरोपी ने उमेश को बताया कि उनके खाते में पहले 7 लाख रुपए और बाद में 5 लाख 7 हजार 497 रुपए की लोन राशि क्रेडिट हुई है। कुल 12 लाख 7 हजार 497 रुपए की राशि को लोन सब्सिडी के लिए प्रोसेस करने का भरोसा दिया गया। आरोपी ने दावा किया कि यह रकम दो-तीन महीने में सब्सिडी के रूप में वापस खाते में आ जाएगी और जवान को केवल करीब 3 लाख रुपए की राशि चुकानी होगी।
दूसरे जवानों को भी बनाया निशाना... पुलिस के अनुसार आरोपी ने इसी तरह सोमदयाल सिंह के नाम पर करीब 14 लाख रुपए और वनमाली प्रधान के नाम पर करीब 16.50 लाख रुपए का लोन एजीएम स्कीम के तहत एसबीआई से स्वीकृत होने की बात कही। इसके बाद सब्सिडी प्रोसेस कराने के नाम पर उनसे भी अलग-अलग खातों में क्रमश: 12 लाख और 15.30 लाख रुपए ले लिए।
खाते से किस्त कटी तो खुला फर्जीवाड़ा
मामले का खुलासा तब हुआ, जब उमेश कुमार कौल के बैंक खाते से लोन की किस्तें कटने लगीं। परिवार ने बैंक से जानकारी ली तो पता चला कि उनके नाम से जम्मू-कश्मीर की पंजाब नेशनल बैंक, जवाहर नगर शाखा से पर्सनल लोन चल रहा है, उमेश कुमार ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने उक्त लोन के लिए न तो कोई आवेदन किया था, न किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए और न ही उन्हें कोई ओटीपी या लोन कंफर्मेशन मिला।
उनके ई-मेल, मोबाइल या वाॅट्सएेप पर भी लोन से संबंधित कोई सूचना नहीं आई थी। आरोपी ने बैंक के संबंधित कर्मचारियों-अधिकारियों से मिलीभगत कर उनके फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।
इसके बाद आर्मी की कथित एजीएम स्कीम का लोन स्वीकृत कराने का झांसा देकर पर्सनल लोन कराया और उसमें से 12,07,497 रुपए सब्सिडी प्रोसेस कराने के नाम पर अपने तथा साथियों के खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
फर्जी एजीएम स्कीम की दी जानकारी
एसआई मिथुन ओसारी और हेड कांस्टेबल पंकज ओझा ने की जांच की तो खुलासा हुआ कि आर्मी की जिस एजीएम स्कीम के नाम पर उमेश कुमार से लोन कराने के नाम दस्तावेज लिए गए ऐसी कोई लोन स्कीम आर्मी ने जारी ही नहीं की थी और न ही एसबीआई इस कथित स्कीम के तहत कोई लोन देता है।
जांच के दौरान पुलिस को आरोपी सागर गुलेरिया के खिलाफ अन्य राज्यों में भी केस दर्ज होने की जानकारी मिली है। पुलिस अब बैंक अधिकारियों से मिलीभगत के पहलू की भी जांच कर रही है।
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