नई बस क्रांति या पुरानी गलतियों की पुनरावृत्ति: परिवहन निगम के पुराने विवाद और घोटाले भी चर्चा में
KHULASA FIRST
संवाददाता

अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और पीएम ई-बस सेवा के तहत व्यापक बस संचालन योजना को मंजूरी दी है।
प्रदेश के सात क्षेत्रों में 1164 मार्गों पर 5206 बसें संचालित करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मप्र यात्री परिवहन एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के संचालक मंडल की बैठक में बस संचालन की शुरुआत इंदौर संभाग से करने का निर्णय लिया गया।
वहीं दूसरी ओर पूर्व मध्य प्रदेश सड़क परिवहन निगम के परिसमापन विवाद, संपत्तियों के प्रबंधन और हाल ही सामने आए 49 लाख रुपए के कथित घोटाले ने इस नई व्यवस्था को लेकर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
बढ़ेगा हरित परिवहन
पीएम ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत जुलाई से इंदौर में 150 नई इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। वर्तमान में शहर में लगभग 179 सीएनजी और 70 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें संचालित हैं।
नई बसों के शामिल होने के बाद डीजल बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। इसके लिए चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार भी किया जा रहा है। वर्तमान में इंदौर में 27 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन और 211 चार्जिंग पॉइंट उपलब्ध हैं, जिनमें 18 सौर ऊर्जा आधारित स्टेशन शामिल हैं।
अगस्त 2023 में शुरू हुई पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत देश के 169 शहरों में 10 हजार इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्रस्तावित है।
अनुभव भी बना बहस का विषय
परिवहन क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि वर्ष 2018 में शुरू हुई सूत्र सेवा के तहत भी सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी आधारित मॉडल अपनाया गया था।
आलोचकों का दावा है कि उस योजना की प्रभावशीलता, संचालन व्यवस्था और निगरानी तंत्र को लेकर स्पष्ट जानकारी कभी सार्वजनिक नहीं हुई। ऐसे में नई परिवहन व्यवस्था की सफलता के लिए मजबूत नियंत्रण, पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक होगी।
इसी बीच मप्र सड़क परिवहन निगम से जुड़े 49 लाख रुपए के कथित घोटाले में एमजी रोड थाना इंदौर में 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि कर्मचारियों के एरियर भुगतान के नाम पर फर्जी बैंक खातों में राशि ट्रांसफर की गई। कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया कि जांच में नाम आने के बावजूद कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को आरोपी नहीं बनाया गया है।
नई परिवहन व्यवस्था संचालन के लिए राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी और सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियों में कुल 1190 पद सृजित किए गए हैं। इनमें आईटी, योजना, अनुबंध, मानव संसाधन, अधोसंरचना, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रवर्तन और व्यवसाय विकास जैसे विभाग शामिल होंगे। भर्ती प्रतिनियुक्ति संविदा और अन्य माध्यमों से चरणबद्ध रूप से की जाएगी।
निजी और कंपनीकरण पर आपत्ति
परिवहन विधिक सलाहकार सूरज प्रकाश अग्रवाल ने नई परिवहन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पूर्व में भी परिवहन क्षेत्र से जुड़ी कई योजनाओं की घोषणाएं कर चुकी है, लेकिन अधिकांश योजनाएं धरातल पर अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी।
उन्होंने कहा सूत्र सेवा, अमृत योजना, जल अमृत योजना, चालक-परिचालक सहायता योजना, महिला चालक एवं महिला परिवहन योजना, द्रुतगामी डीलक्स परिवहन योजना तथा पुरातत्व एवं ऐतिहासिक पर्यटन परिवहन जैसी कई योजनाएं केवल घोषणाओं तक सीमित रह गईं।
20 साल बाद सरकारी परिवहन व्यवस्था
नई योजना को कई लोग वर्ष 2005 में बंद किए गए मप्र सड़क परिवहन निगम की वापसी के रूप में भी देख रहे हैं। मप्र सड़क परिवहन निगम का गठन 1962 में हुआ था, जिसका उद्देश्य सस्ती, सुलभ और व्यापक परिवहन सेवा उपलब्ध कराना था।
निगम के परिसमापन का निर्णय जनवरी 2005 में लिया गया था। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि परिसमापन प्रक्रिया वैधानिक रूप से पूरी नहीं हुई तथा आज भी निगम से जुड़े अनेक मामले विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं।
पूर्व कर्मचारियों और संगठनों का कहना है कि यदि सार्वजनिक परिवहन को पुनर्जीवित करना है, तो उसे निजी कंपनियों पर अत्यधिक निर्भर बनाने के बजाय केंद्र और राज्य सरकार की साझा भागीदारी से संचालित किया जाना चाहिए।
इंदौर क्षेत्र में 3 श्रेणियों की बसें संचालित की जाएंगी
इंटरसिटी बसें, जो इंदौर को प्रदेश के अन्य जिलों से जोड़ेंगी।
सिटी एवं उपनगरीय बसें, जो शहर और आसपास के क्षेत्रों तक सेवाएं देंगी।
अंतरराज्यीय बसें, जो महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक संचालित होंगी।
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