सीबीएसई मामले में किस बड़े नेता ने किया बड़ा खुलासा: किस प्रक्रिया पर लगाए सवालिया निशान; सोशल मीडिया के माध्यम से दी अपनी प्रतिक्रिया
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर जारी विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और संसदीय उच्च शिक्षा समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि OSM परियोजना के लिए जारी टेंडर दस्तावेज (RFP) में पहले रोबोटिक स्कैनर का प्रावधान था, लेकिन बाद में उसे बदलकर साधारण स्कैनर कर दिया गया। इस बदलाव को लेकर उन्होंने गंभीर सवाल उठाए हैं।
ऐसे समय आया बयान
दिग्विजय सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब छात्र सार्थक सिद्धांत द्वारा संसदीय समिति के समक्ष पेश किए गए दस्तावेजों में भी टेंडर प्रक्रिया में कथित बदलाव और अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया है।
संसदीय समिति की बैठक के बाद उठाए सवाल
दो दिनों तक चली संसदीय समिति की बैठक और प्रस्तुत दस्तावेजों की समीक्षा के बाद दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि CBSE ने OSM प्रणाली के लिए प्रारंभिक RFP में सुरक्षित रोबोटिक स्कैनर के उपयोग का प्रावधान रखा था, लेकिन बाद में इसे बदलकर साधारण स्कैनर कर दिया गया।
उन्होंने सवाल किया कि आखिर यह बदलाव क्यों किया गया और इसके पीछे क्या कारण थे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रश्न का उत्तर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और शिक्षा मंत्रालय को देना चाहिए।
क्या होता है रोबोटिक स्कैनर?
दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में रोबोटिक स्कैनर की तकनीकी विशेषताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि रोबोटिक स्कैनर एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें 3D या ऑप्टिकल स्कैनिंग तकनीक को स्वचालित रोबोटिक आर्म के साथ जोड़ा जाता है।
इस तकनीक के माध्यम से बिना मानवीय हस्तक्षेप के अत्यंत सटीक स्कैनिंग और मापन किया जा सकता है। इसका उपयोग बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, ऑटोमेटेड क्वालिटी कंट्रोल, लाइब्रेरी डिजिटाइजेशन और रिवर्स इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में किया जाता है। उनका कहना है कि ऐसी तकनीक दस्तावेजों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में अधिक प्रभावी मानी जाती है।
टेंडर प्रक्रिया पर फिर उठे सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि यदि रोबोटिक स्कैनर बेहतर और अधिक सुरक्षित विकल्प था, तो उसे हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने संकेत दिया कि कहीं यह बदलाव किसी विशेष वेंडर या कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तो नहीं किया गया। हालांकि उन्होंने किसी कंपनी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन पूरे मामले को लेकर निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई।
छात्र सार्थक सिद्धांत ने रखे दस्तावेज
OSM प्रणाली से जुड़े विवाद को सामने लाने वाले छात्र सार्थक सिद्धांत ने मंगलवार को संसदीय समिति के समक्ष प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने टेंडर प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज समिति को सौंपे और कथित विसंगतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया।
सार्थक का दावा है कि टेंडर जारी होने के बाद उसकी कुछ महत्वपूर्ण शर्तों में बदलाव किया गया। उन्होंने विशेष रूप से यह सवाल उठाया कि RFP में संशोधन क्यों किया गया और इससे किन कंपनियों को लाभ मिला।
COEMPT कंपनी को लेकर भी उठे सवाल
प्रस्तुतीकरण के दौरान सार्थक सिद्धांत ने OSM परियोजना का ठेका प्राप्त करने वाली कंपनी COEMPT को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में कुछ ऐसे बदलाव किए गए, जिनसे संबंधित कंपनी को लाभ मिला। हालांकि इन आरोपों पर अभी तक CBSE या संबंधित एजेंसियों की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जांच और जवाब का इंतजार
OSM प्रणाली को लेकर उठे सवालों के बाद अब सभी की निगाहें संसदीय समिति की आगामी कार्रवाई और CBSE के आधिकारिक जवाब पर टिकी हैं। यदि टेंडर दस्तावेजों में बदलाव के आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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