त्योहार पर हाहाकार शकर सत्तर पार: शकर के बेतहाशा बढ़े भाव ने मोदी सरकार की उड़ाई नींद; सख्त एक्शन शुरू
KHULASA FIRST
संवाददाता

10साल में पहली बार बाहर से मंगवाना पड़ रही देश में शकर
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने दी 10 लाख टन शकर बाहर से बुलवाने की इजाजत
खेरची बाजार में चल रहे मनमर्जी के दाम, सरकारी तंत्र नहीं कस पा रहा लगाम
देश में सब तरफ एक ही सवाल शकर आयात की नौबत क्यों आई?
देश जानना चाहता है आखिर ऐसा क्या हुआ कि शकर बाहर से डॉलर देकर खरीदी जा रही?
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदाैर।
मोदी सरकार के दिन फिलहाल अच्छे नहीं चल रहे। छात्र आंदोलन, विपक्ष के वार, मानसून सत्र की तकरार से जैसे-तैसे सरकार ने पीछा छुड़ाया ही था कि एक नए व अलग ही मोर्चे पर सरकार जनसामान्य के निशाने पर आ गई है।
मामला शकर के दाम से जुड़ा है। पहली बार देश में शकर के दाम खेरची बाजार में 70 रुपए प्रति किलो से भी बाहर निकल गए। थोक बाजार भी 65 रुपए प्रति किलो के पार चल रहा है। हालात इस कदर बिगड़ गए कि 10 साल में पहली बार सरकार शकर बाहर के मुल्कों से मंगवाने पर मजबूर हो गई है। सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दे दी। इससे साफ हो गया है कि ऐन त्योहारों के दौर में शकर को लेकर बाजार का हाहाकार जल्द थमने वाला नहीं है।
सरकार शकर को लेकर सट्टा बाजार व जमाखोरी पर सख्ती की बात तो कर रही है, लेकिन इस सख्ती का बाजार में कहीं भी मुजाहिरा नहीं हो पा रहा। इंदौर में ही शकर के अलग-अलग दाम वसूले जा रहे हैं। वहीं भंडारण भी हो रहा है। थोक बाजार में भी अलग-अलग भाव हैं। घर-घर की रसोई पर इस सीधे हमले ने
आम आदमी की दिनचर्या व जेब पर जबरदस्त असर किया है। त्योहार कैसे होंगे? इस पर अब सब तरफ चर्चा है।
शकर के बढ़ते दामों ने मोदी सरकार की नींद उड़ा दी और वह एक्शन मोड में आ गई है। बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दे दी है। साथ ही 1 सितंबर से बड़े खरीदारों व डीलरों पर स्टॉक की सीमा घटाकर 15 दिन कर दी गई है। इसके अलावा चीनी के निर्यात पर रोक लगाई गई है और मिलों में स्टॉक की जांच हो रही है। स्टॉक सीमा और सख्ती में 15 दिन का नियम लागू किया गया है। 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक खपत वाले बड़े खरीदार व डीलर केवल 15 दिन का स्टॉक रख सकेंगे। डीलरों के लिए पहले ही 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की गई है।
बाजार बेलगाम
इंदौर के थोक किराना बाजार में भी शकर के वसूले जा रहे अलग-अलग दाम
सरकार का अमला भौतिक सत्यापन के लिए भी मैदान में उतर गया है। जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र और राज्य के अधिकारी मिलों के स्टॉक की जांच कर रहे हैं। आयात और निर्यात नीति के तहत ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी गई है।
बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख टन कच्ची चीनी बिना किसी आयात शुल्क के लाने की अनुमति दी गई है। कीमतों को देश में बढ़ने से रोकने के वास्ते सभी प्रकार की चीनी के निर्यात को 30 सितंबर 2026 तक रोक दिया गया है। त्योहारी सीजन में राहत के लिए चीनी मिलों और राज्यों को 15 अक्टूबर से ही नए सिरे से पेराई शुरू करने की सलाह दी गई है।
इंदौर व मध्य प्रदेश में चीनी के मनमाने दाम
इंदौर में खुदरा भाव यानी रिटेल बाजार के तहत दुकानों और सुपर मार्केट में शकर 55 से 65 प्रति किलोग्राम के बीच बिक रही है। ब्रांडेड या प्रीमियम (सल्फरलेस) चीनी की कीमत 60 से 75 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है।
इंदौर में थोक भाव की बात करें तो सियागंज थोक किराना बाजार में चीनी के दाम 60 से 64 प्रति किलो (6,000 से 6,400 प्रति क्विंटल) तक दर्ज किए गए हैं, जबकि कुछ प्रीमियम ग्रेड (M30/M50) के दाम थोक में ही 68 प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।
मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल है, जहां एक महीने में चीनी के दामों में सबसे तेज बढ़ोतरी देखी गई है। राज्य में हाल के हफ्तों में शकर 15 से 20 रुपए प्रति किलो तक महंगी हुई है। रक्षाबंधन, गणेश उत्सव और आगामी त्योहारों के कारण अचानक मांग बढ़ने और मिलों से आपूर्ति सीमित होने से स्थानीय बाजारों में यह तेजी आई।
सरकार द्वारा उठाए गए कदमों जैसे स्टॉक सीमा तय करना और ड्यूटी-फ्री आयात के कारण आने वाले दिनों में थोक बाजारों में कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है।
कंट्रोल की दुकान पर अब भी 20 रुपए किलो हैं शकर के दाम
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार सरकारी उचित मूल्य की राशन दुकानों पर अंत्योदय अन्न योजना और प्राथमिक परिवार श्रेणी के कार्डधारकों को शकर 20 रुपए प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर आज भी उपलब्ध कराई जा रही है।
इस भाव से शकर लेने के लिए अंत्योदय परिवार की पात्रता होना अनिवार्य है। पात्र परिवारों को प्रति माह 1 किलोग्राम शकर इस सब्सिडी रेट पर दी जाती है। सामान्य वर्ग को सब्सिडी नहीं। केंद्र सरकार द्वारा शकर पर सामान्य वित्तीय अनुदान की पुरानी व्यवस्था को बदलने के बाद, केवल गरीब और लक्षित पात्र परिवारों (पीडीएस लाभार्थियों) को ही यह लाभ मिलता है।
आम उपभोक्ताओं के लिए बाजार भाव और सामान्य राशन दर में अधिक अंतर नहीं है। सहकारी भंडारों और सहकारी संस्थाएं बाजार में कीमतों को संतुलित करने के लिए जुट गई हैं। ओपन मार्केट के लिए सरकार मुख्य रूप से मिलों पर स्टॉक सीमा और त्योहारों पर अग्रिम पेराई जैसे नीतिगत फैसले ले रही है, ताकि खुदरा दाम नियंत्रित रहें।
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