बेईमान बिल्डरों ने छिपाया पुराना कर्ज: 18 साल पुराने आशियानों पर नीलामी का खतरा
KHULASA FIRST
संवाददाता

पुलिस के नोटिस पर भी पेश नहीं हुए
अतुल सुराना और अरुण डागरिया
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
दो बिल्डरों पर गंभीर आरोपों से हड़कंप मचा है। इन्हें डीआरटी के नोटिस से पुराना कर्ज सामने आया है। रहवासियों ने कहा हमने घर खरीदने के लिए उक्त कर्ज नहीं लिया। जिस घर को खरीदने के लिए किसी ने जिंदगीभर की कमाई लगा दी, किसी ने बैंक की सालों किस्तें भरीं तो किसी ने बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए आशियाना बनाया, आज अचानक उन्हीं घरों की नीलामी का खतरा पैदा हो गया है। मामला पिपलिया कुमार क्षेत्र स्थित स्पेस पार्क फेज-2 का है, जहां करीब 18 वर्षों से रह रहे परिवार मकानों को लेकर भारी चिंता में हैं।
रहवासियों का आरोप है मकान बेचते समय उन्हें संपत्ति की वास्तविक लेन-देन की स्थिति की पूरी जानकारी नहीं दी गई। अब वर्षों बाद ऋण वसूली अधिकरण (डीआरटी) जबलपुर की कार्रवाई से पुराने कर्ज और बंधक संपत्तियों का मामला सामने आया है। रहवासियों का कहना है बिल्डर की कथित वित्तीय गड़बड़ियों का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ सकता है।
इस मामले में स्पेस रियलकॉन इंडिया प्रालि, सैटेलाइट हाउसिंग लि. और सैटेलाइट इन्फ्रा रियल एस्टेट लि. से जुड़े अतुल सुराना और अरुण डागरिया पर रहवासियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ितों का कहना है संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर मकान बेचे गए और अब पुराने ऋण की कार्रवाई का असर वर्षों से रह रहे मकान मालिकों पर पड़ रहा है।
कल तक अपना घर, आज नीलामी का डर... रहवासियों का सवाल है बिल्डर का किसी वित्तीय संस्था से कर्ज का विवाद था, तो खरीदारों को जानकारी क्यों नहीं दी गई? और यदि खरीदारों ने पूरी रकम अदा कर मकान खरीदे थे तो उन्हें किसी पुराने वित्तीय विवाद से जोड़ने का आधार क्या है?
दस्तावेज खंगाले तो सामने आई पुरानी कहानी... रहवासियों ने मामले को समझने के लिए जबलपुर अधिकरण की कार्रवाई से जुड़े दस्तावेजों की प्रतियां हासिल की। रहवासियों के अनुसार 19 जनवरी 2024, 2 मई 2024 और 6 अगस्त 2026 को जारी नोटिस में संपत्तियों और ऋण से जुड़े कई तथ्य सामने आए।
दस्तावेजों में ग्राम टिगरिया राव के सर्वे नंबर 20/2/5, जिसका क्षेत्रफल करीब 0.210 हेक्टेयर तथा ग्राम निहालपुर मुंडी की कुछ जमीन (सर्वे क्रमांक 27, 21, 32, 35/1, 25, 32, 4, 37, 6, 35, 2, 24, 2, 28, 2, 32, 1, 37, 4 एवं 35/4, कुल रकबा 0.0686 हेक्टेयर) का उल्लेख है।
रहवासियों के अनुसार उक्त जमीन हुडको के पास बंधक रखकर ऋण लिया गया था। ऋण दस्तावेजों में सैटेलाइट इन्फ्रा एवं रियल एस्टेट प्रालि का नाम सामने आने और अधिकृत व्यक्ति के रूप में अतुल सुराना की भूमिका का उल्लेख होने की बात भी सामने आई है, लेकिन मामला और पेचीदा है।
रहवासियों का दावा है स्पेस पार्क फेज-2 का निर्माण ग्राम पिपलिया कुमार के सर्वे क्रमांक 156/1 एवं 156/2 पर हुआ है। स्पेस पार्क फेज-2 की जमीन और हुडको के बंधक दस्तावेजों में बताई गई जमीन के बीच वैधानिक संबंध स्पष्ट नहीं है। यही बात अब विवाद का अहम बिंदु है।
10 अगस्त को दीवार पर चस्पा हुआ नोटिस तो मच गया हड़कंप...
10 अगस्त 2026 को डीआरटी जबलपुर की ओर से जारी सार्वजनिक नोटिस स्पेस पार्क फेज-2 के आवासीय परिसरों में चस्पा किए गए तो हड़कंप मच गया। रहवासियों में दहशत का माहौल बन गया।
बताया गया हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लि. यानी हुडको का करीब 1 करोड़ 56 लाख 63 हजार 641 रुपए का बकाया ऋण वसूला जाना है। नोटिस में ब्याज और अन्य देनदारियों का भी उल्लेख है।
रहवासियों के सामने सबसे बड़ा सवाल है आखिर जिस मकान में करीब दो दशक से रह रहे हैं, वह अचानक किसी पुराने कर्ज की कार्रवाई के दायरे में कैसे आ गया? जिस घर की रजिस्ट्री उनके नाम है, उसी घर को लेकर चिंता क्यों करना पड़ रही है?
कर्ज कहीं और का रहवासियों का तर्क बेहद सीधा है। यदि बिल्डर ने किसी दूसरी जमीन को बंधक रखकर ऋण लिया था तो उस ऋण का असर स्पेस पार्क फेज-2 के मकान मालिकों पर क्यों पड़े?
अगर स्पेस पार्क फेज-2 की जमीन उस ऋण के लिए बंधक नहीं थी, तो वहां बने मकानों को कार्रवाई के दायरे में लाने का आधार क्या है? और अगर किसी दस्तावेज में इन संपत्तियों का संबंध बताया गया है, तो उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती? यही सवाल प्रशासन और जांच एजेंसियों के सामने भी है।
तथ्य छिपाकर कराया गया गया पंजीयन
पीड़ितों ने आरोप लगाया है मकान बेचते समय संपत्ति की वास्तविक स्थिति और पुराने वित्तीय दायित्वों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी उनसे छिपाई गई। पता होता कि परियोजना या उससे जुड़ी जमीन किसी बड़े वित्तीय विवाद में है, तो वे कभी अपना जीवनभर का पैसा नहीं लगाते।
पुलिस नोटिस के बाद भी पेशी नहीं होने का आरोप
पीड़ित बलराज सिंह गहलोत एवं अन्य रहवासियों की ओर से थाना लसूड़िया एवं अपराध शाखा इंदौर में शिकायत दर्ज कराई गई है। जांच के दौरान अपराध शाखा के सहायक पुलिस आयुक्त कार्यालय से जुड़े निरीक्षक तरुण सिंह भाटी की ओर से धारा 94/179 बीएनएसएस के तहत 5 सितंबर 2026 को एक नोटिस (क्रमांक/अप.शाखा/EOW/इ/काशि. 933/26) जारी किया गया।
इसमें अतुल सुराना को स्पेस पार्क फेज-2 से संबंधित दस्तावेजों के साथ 7 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए थे। उपस्थित नहीं होने पर एकपक्षीय वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। रहवासियों का आरोप है अतुल सुराना और अरुण डागरिया उपस्थित नहीं हुए।
दस्तावेजों से सच सामने आना जरूरी
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही होगी, लेकिन आरोप इतने गंभीर हैं कि इनकी निष्पक्ष जांच जरूरी दिखाई देती है। जांच में स्पष्ट किया जाए कि किस संपत्ति पर कितना ऋण था?
कौन-सी जमीन बंधक रखी गई थी? बंधक के दस्तावेजों में किन संपत्तियों का उल्लेख है? स्पेस पार्क फेज-2 की जमीन का उन संपत्तियों से क्या संबंध है? मकान बेचते समय खरीदारों को क्या जानकारी दी गई थी?
रजिस्ट्री के समय संबंधित रिकॉर्ड में क्या दर्ज था? बैंकों ने किन दस्तावेजों के आधार पर गृह ऋण स्वीकृत किए थे? और सबसे अहम यह कि क्या 18 वर्षों से रह रहे मकान मालिकों की संपत्ति पर वास्तव में किसी वित्तीय संस्था का वैधानिक दावा बनता है?
खरीदारों का पक्ष सुना जाए
रहवासियों का कहना है किसी कार्रवाई से पहले उनका पक्ष सुना जाए। बिल्डर और वित्तीय संस्था के बीच विवाद अपनी जगह है, लेकिन खामियाजा उन्हें न भुगतना पड़े। प्रशासन और पुलिस पूरी जांच कर स्थिति स्पष्ट करें। जांच में धोखाधड़ी या जानबूझकर तथ्य छिपाने की पुष्टि होती है तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
रहवासियों ने मुख्यमंत्री, पुलिस कमिश्नर, एसपी इंदौर ग्रामीण और कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि मामला केवल निजी विवाद मानकर छोड़ देने से समस्या खत्म नहीं होगी।
कर्ज बिल्डर का, गाज खरीदार पर क्यों?
स्पेस पार्क फेज-2 विवाद बेहद अहम सवाल छोड़ रहा है। अगर बिल्डर ने कर्ज लिया था तो जिम्मेदारी किसकी है? अगर जमीन बंधक थी तो खरीदारों को जानकारी क्यों नहीं दी गई? अगर जमीन बंधक नहीं थी तो मकानों की नीलामी की नौबत क्यों आ रही है?
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