सरकारी बोरिंग से घरों में पहुंच रहा था सीवर का जहरीला पानी: भागीरथपुरा कांड के बाद भी नहीं जागे जिम्मेदार; महावीर नगर में लोगों की जान से खिलवाड़
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
छोटा बांगड़दा स्थित महावीर नगर में जल संकट ने एक भयावह रूप ले लिया है। शहर में हाल ही में हुए भागीरथपुरा दूषित जल कांड की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि अब देपालपुर विधानसभा के वार्ड-16 अंतर्गत महावीर नगर में वैसा ही मामला सामने आ गया है।
यहां कई दिनों से 150 परिवारों की प्यास बुझाने वाले एकमात्र सरकारी बोरिंग से ड्रेनेज का गंदा और जहरीला पानी सप्लाई हो रहा था। इस दूषित जल को पीने के बाद 11 माह की मासूम माविका श्रीवास और 2 साल के तेजस मालवीय सहित 20 से अधिक लोग उल्टी-दस्त और पेट दर्द जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ गए हैं।
रहवासियों का आरोप है कि पानी का रंग और स्वाद बिगड़ने की शिकायतें करने के बावजूद समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिसका खामियाजा आज क्षेत्र के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
यह समस्या इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि वार्ड-16 के इस इलाके में आज भी नर्मदा की पाइपलाइन नहीं पहुंच पाई है, जिसके चलते 150 परिवार 15 साल पुराने इसी सरकारी बोरिंग पर निर्भर हैं।
स्थानीय निवासी नागेश्वर खालोटिया ने बताया कि उनकी ढाई साल की बेटी अविका गंदा पानी पीने से गंभीर रूप से बीमार हो गई, जिसे इलाज के लिए अहमदाबाद तक ले जाना पड़ा। इसी तरह पार्वती चौहान, दुर्गाबाई और कमला बाई का कहना है कि जब गलियों के अन्य बोरवेल सूख गए तो वे पूरी तरह से सरकारी बोरिंग के भरोसे थे।
पानी में बदबू आने की शिकायतों को नजरअंदाज किया गया और जब लोग बीमार होने लगे तो उन्होंने खुद चैंबर खोलकर देखा तो वहां सीधे सीवर का गंदा पानी रिसकर बोरवेल में मिलते हुए पाया गया।
रहवासियों का आरोप है कि वार्ड पार्षद सोनाली धारकर से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन शुरुआत में उनकी ओर से कोई त्वरित कार्रवाई नहीं हुई। जब मरीजों की संख्या बढ़ने लगी और आक्रोशित रहवासी सड़कों पर उतर आए, तब जाकर प्रशासन की नींद टूटी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम के अपर आयुक्त आशीष पाठक, जोनल अधिकारी विनोद अग्रवाल और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके का दौरा किया। निगम ने तत्काल प्रभाव से बोरिंग की सप्लाई बंद करवाई और क्षेत्र में टैंकरों के माध्यम से पानी भिजवाने का कार्य शुरू किया।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा घर-घर जाकर ओआरएस के पैकेट और दवाइयां बांटी गईं तथा प्रभावितों का सर्वे किया गया। अपर आयुक्त आशीष पाठक ने स्वीकार किया कि ड्रेनेज का पानी बोरिंग तक पहुंचने की जांच की जा रही है और फिलहाल नया बोरवेल लगवाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि, यह तात्कालिक राहत है, लेकिन स्थानीय निवासियों के मन में अभी भी गहरा डर व्याप्त है।
53 में से 35 कॉलोनियां आज भी नर्मदा जल से वंचित... वार्ड-16 की 53 में से 35 कॉलोनियां आज भी नर्मदा जल से वंचित हैं, जो प्रशासन की विकास योजनाओं पर बड़े सवाल खड़े करती हैं।
क्षेत्र के लोग अब यह मांग कर रहे हैं कि केवल जांच और टैंकर की व्यवस्था से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाए जिनकी लापरवाही के कारण मासूमों की जान जोखिम में पड़ी।
भागीरथपुरा जैसी घटना के बाद भी जलापूर्ति प्रणाली की निगरानी में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई, यह सवाल आज शहर के हर जागरूक नागरिक की जुबान पर है।
निगम की टीम ने पानी के नमूने लिए हैं और अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह कैसे इन परिवारों को सुरक्षित और शुद्ध पानी की स्थायी व्यवस्था उपलब्ध कराता है ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को इस तरह के जानलेवा संकट का सामना न करना पड़े।
निगम के अधिकारी अब पुरानी पाइपलाइनों को बदलने और सीवर लाइन की गाद निकालने का कार्य कर रहे हैं, लेकिन जब तक ठोस तकनीकी सुधार नहीं होता तब तक लोगों का भरोसा बहाल करना मुश्किल है।
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