टीआई का पार्थिव शरीर पहुंचा इंदौर: अंतिम दर्शन कर फूट पड़े परिजन; परिवार में पसरा मातम, अवैध शराब तस्करी का ट्रक रोकने की कोशिश में गई जान
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देवास जिले के खातेगांव में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान जान गंवाने वाले थाना प्रभारी दिलीप पुरी का पार्थिव शरीर इंदौर पहुंचा तो परिवार और परिचितों के बीच शोक की लहर दौड़ गई।
अपने प्रियजन को इस हालत में देखकर परिजन खुद को संभाल नहीं सके। घर में मातम छा गया और अंतिम दर्शन के दौरान मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। जिस दिलीप पुरी को परिवार ने ड्यूटी पर जाते समय हंसते-मुस्कुराते देखा था, उनकी पार्थिव देह लौटने की खबर ने सभी को भीतर तक झकझोर दिया।
दिलीप पुरी की मौत केवल एक पुलिस अधिकारी का असामयिक निधन नहीं, बल्कि उस परिवार के लिए ऐसा सदमा है, जिसने अपने घर के सदस्य को कर्तव्य निभाते हुए खो दिया।
वे मूल रूप से धार जिले के राजोद थाना क्षेत्र के बरमंडल गांव के निवासी थे, जबकि उनका परिवार इंदौर में रहता है। उनके निधन की खबर के बाद से ही रिश्तेदारों, परिचितों और पुलिस विभाग के लोगों का परिवार के पास पहुंचना जारी है।
अवैध शराब का ट्रक रोकने पहुंचे थे दिलीप पुरी
घटना रविवार और सोमवार की दरमियानी रात करीब डेढ़ बजे की है। खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी को सूचना मिली थी कि अवैध शराब से भरा एक आयशर ट्रक हरदा की ओर से इंदौर होते हुए गुजरात जा रहा है। सूचना के बाद देवास पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा के निर्देश पर पांच से अधिक पुलिस टीमें सक्रिय की गई थीं। कन्नौद, सतवास, नेमावर और खातेगांव पुलिस की टीमें ट्रक को रोकने के लिए जुटी थीं।
इंदौर-बैतूल हाईवे पर ट्रक की घेराबंदी की गई। पुलिस टीम को संदिग्ध वाहन डिवाइडर के किनारे खड़ा मिला। टीआई दिलीप पुरी ने चालक को नीचे उतरने के लिए कहा। इसी दौरान चालक ने ट्रक को आगे बढ़ाने और मौके से भागने की कोशिश की। इस घटनाक्रम में ट्रक का पिछला पहिया दिलीप पुरी के ऊपर से गुजर गया। वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
अस्पताल में करीब दो घंटे तक चला उपचार, नहीं बची जान
हादसे के बाद टीआई पुरी को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने के लिए सीपीआर सहित तमाम प्रयास किए, लेकिन गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। चिकित्सकों के मुताबिक शरीर के कई अंग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे और कई फ्रैक्चर भी थे।
इस खबर ने पुलिस महकमे को भी स्तब्ध कर दिया। जिस अधिकारी ने अवैध शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के लिए मोर्चा संभाला था, वही कार्रवाई उनके जीवन की अंतिम ड्यूटी बन गई।
तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह को दी गई अंतिम विदाई
पोस्टमॉर्टम के बाद दिलीप पुरी की पार्थिव देह को तिरंगे में लपेटकर पुलिस लाइन लाया गया था। यहां गार्ड ऑफ ऑनर देकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। नवागत पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने पुष्पचक्र अर्पित किए और पार्थिव देह को कंधा देकर अंतिम विदाई दी। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव बरमंडल के लिए रवाना किया गया।
शिक्षक से पुलिस अधिकारी तक का सफर
दिलीप पुरी वर्ष 2007 बैच के सब इंस्पेक्टर थे। पुलिस सेवा में आने से पहले उन्होंने करीब दो साल तक सरकारी स्कूल में शिक्षक के रूप में काम किया था। इसके बाद पुलिस विभाग में भर्ती होकर अपनी सेवाएं दीं।
इंदौर के हीरानगर और चंदन नगर सहित कई थानों में उनकी पदस्थापना रही। करीब दो महीने पहले ही उनका तबादला सतवास से खातेगांव किया गया था। इससे पहले वे बड़वानी जिले में भी पदस्थ रहे थे।
उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी कविता, बेटी तृषा, बेटा अविक और छोटा भाई हैं। पत्नी और बच्चों के लिए यह क्षति ऐसी है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
मुख्यमंत्री ने की एक करोड़ की सहायता और पत्नी को एसआई पद पर नौकरी की घोषणा
घटना पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा दुख व्यक्त किया था। उन्होंने दिवंगत टीआई की पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति के तहत सब इंस्पेक्टर के पद पर नौकरी देने और परिवार को एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्पेशल डीजी उपेंद्र जैन को घटनास्थल भेजा गया है।
वहीं, आयशर वाहन के मालिक कैरम सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस तस्करी के पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि अवैध शराब की खेप कहां से आई थी, इसे कहां पहुंचाया जाना था और इस कारोबार में किन लोगों की भूमिका थी।
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