जलाराम आरा मशीन सील लीपापोती में जुटे रहे जिम्मेदार: वन विभाग के भ्रष्टाचार और मिलीभगत से शहर बना अवैध लकड़ी तस्करी का गढ़
KHULASA FIRST
संवाददाता

चंचल भारतीय 98936-44317 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
वन मंडल में भ्रष्टाचार, लापरवाही और लकड़ी माफियाओं के साथ साठगांठ के काले खेल का पूरी तरह से खुलासा हो चुका है। वन संसाधनों की रक्षा करने का दावा करने वाला स्थानीय वन अमला खुद माफिया की ढाल बना बैठा है।
हाल ही में जीएनटी मार्केट स्थित जलाराम एंटरप्राइजेस लकड़ी व्यापारी के ठिकाने पर हुई कार्रवाई ने वन मंडल की साख की धज्जियां उड़ा दी हैं। राज्य स्तरीय वन विभाग के उड़नदस्ते ने जब दल-बल के साथ दबिश दी तो मौके पर आरा मशीन का कोई वैध अभिलेख नहीं मिला।
विभाग की नाक के नीचे चल रहे इस गैरकानूनी कारोबार पर आखिरकार उड़नदस्ते को ही ताला लगाना पड़ा और आरा मशीन सील कर दी गई। स्थानीय वन अधिकारियों की सरपरस्ती में जारी इस काले धंधे पर मुख्यालय की कार्रवाई ने जिला प्रशासन और वन महकमे के कारनामे का खुलासा कर दिया है।
इसी दौरान जीएनटी मार्केट में अवैध रूप से बिकने के लिए परिवहन करके लाई गई अवैध लकड़ियां वन विभाग के राज्य स्तरीय उड़नदस्ते ने पकड़ी। सफेद रंग की आईशर गाड़ी (एमपी09जीएफ 4768) को तीन-तीन तिरपालों से ढंककर अवैध लकड़ी लाई गई थी।
बिना किसी वैध दस्तावेज के चल रहे इस वाहन को जब्त कर नवरतन बाग स्थित वन विभाग मुख्यालय भेजा गया। इसी छापेमारी के दौरान अन्य आयशर वाहन (एमपी04 जीए 4280) भी पकड़ा गया, जिसमें ऑनलाइन ट्रांजिट पास में दर्ज लकड़ी की प्रजाति और लोड लकड़ी में बड़ा अंतर था। कागजों में कुछ और गाड़ियों में भरकर बाजार में बेचा जा रहा था।
अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी धांधली नामुमकिन है। पूर्व में भी खुलासा फर्स्ट ने प्रमाणों के साथ इंदौर वन परिक्षेत्र अधिकारी संगीता ठाकुर की गंभीर अनियमितताओं व काले कारनामों का खुलासा किया था, पर महकमा आंखें मूंदकर बैठा रहा।
इस पूरे मामले में आला अधिकारियों का रवैया बेहद शर्मनाक और गैर-जिम्मेदाराना रहा है। मुख्य वन संरक्षक प्रेम नारायण मिश्रा और जिला वन मंडल अधिकारी लाल सुधाकर सिंह पूरे मामले पर मूकदर्शक बने रहे। शिकायतों के बाद भी किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण दिया जाता रहा। हद तो तब हो गई जब राज्य स्तरीय टीम ने छापा मारा, तब भी स्थानीय स्तर पर साठगांठ का खेल जारी रहा और वन परिक्षेत्र अधिकारी संगीता ठाकुर अचानक अवकाश पर चली गईं।
मीडिया के सवालों से बच रहे अधिकारी
कार्रवाई के बाद अपनी गर्दन फंसती देख अब विभाग के बड़े अधिकारी जवाबदेही से भागते नजर आ रहे हैं। मीडिया के सवालों पर उड़नदस्ते के प्रभारी अमित कुमार साहू ने सीधे तौर पर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि वह मीडिया को कोई जानकारी नहीं दे सकते।
वहीं, मामले की लीपापोती करते हुए उपवन मंडल अधिकारी नरेंद्रसिंह परिहार ने कहा कि इस कार्रवाई के संबंध में उन्हें फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। उधर, अपनी नाकामी छुपाते हुए जिला वन मंडल अधिकारी लाल सुधाकर सिंह ने भी अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि राज्य स्तरीय उड़नदस्ते ने औचक निरीक्षण कर यह कार्रवाई की है, जिसकी उन्हें पहले से कोई जानकारी नहीं थी।
घेराबंदी कर पकड़ी थी अवैध लकड़ी
दो महीने पूर्व सीसीएफ प्रेम नारायण मिश्रा के निर्देशन में जिला वन मंडल अधिकारी लाल सुधाकर सिंह ने एक विशेष प्रयोग करते हुए रालामंडल वन डिपो प्रभारी प्रीति शाक्य को एक दिन के लिए उड़नदस्ता प्रभारी बनाकर भेजा था।
जिम्मेदारी संभालते ही उसी रात प्रीति शाक्य के नेतृत्व में विशेष रात्रिकालीन गश्ती टीम ने जीएनटी मार्केट क्षेत्र में घेराबंदी कर दो ट्रकों को रंगेहाथ पकड़ लिया। इस पूरी कार्रवाई का खुलासा खुलासा फर्स्ट ने अपनी खोजी रिपोर्ट के जरिए किया था।
हालांकि, इस बड़ी सफलता के बाद विभाग के आला अधिकारियों की नीयत पर सवाल खड़े हो गए। मामले की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय, जिस रेंजर संगीता ठाकुर पर निलंबन की कार्रवाई होना थी, उल्टे उन्हें ही जांच सौंप दी गई। नतीजा यह हुआ कि जांच सौंपे जाने के महज कुछ ही घंटों के भीतर सौदेबाजी कर अवैध लकड़ी से भरा ट्रक छोड़ दिया गया।
आश्वासन का खेल खेलते रहे
जब इस पूरे घटनाक्रम और सौदेबाजी की जानकारी से जिला वन मंडल अधिकारी लाल सुधाकर सिंह को अवगत कराया तो उन्होंने भी कठोर कार्रवाई करने के बजाय केवल आश्वासन का खेल खेला और महू एसडीओ प्रियंका बामनिया से जांच कराने का झूठा भरोसा देकर मामले को टालते रहे।
इसके बाद कल राज्य स्तरीय वन विभाग के उड़नदस्ते ने जीएनटी टिंबर मार्केट में दबिश दी, जहां अवैध रूप से आरा मशीनें संचालित हो रही थी और हर दिन फर्जी टीपी और बिना टीपी के अवैध लकड़ी से भरे ट्रक बिकने आते हैं।
इसके बावजूद वन परिक्षेत्र अधिकारी संगीता ठाकुर की संदिग्ध कार्यप्रणाली और लकड़ी माफिया से मिलीभगत के कारण इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती, बल्कि उन्हें संरक्षण दिया जाता है। राज्य स्तरीय वन विभाग की उड़न दस्ता टीम के जांच में सामने आ गया। जांच दल के पहुंचने पर टिंबर मार्केट के संदिग्ध लकड़ी व्यापारी अपनी दुकान बंद कर भूमिगत हो गए।
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