अभिभाषक संघ चुनाव में दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर: काले कोट के सबसे बड़े रण का फैसला आज
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर जिला अभिभाषक संघ के चुनाव इस बार केवल पदाधिकारियों के चयन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह काले कोट की सियासत, नेतृत्व, प्रभाव और वर्षों से बनी प्रतिष्ठा की सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है।
आज होने वाले मतदान को लेकर न्यायालय परिसर में सुबह से ही उत्साह और हलचल का माहौल है।
अदालतों में कानूनी बहसों के साथ-साथ चुनावी चर्चाओं का दौर भी चरम पर है और हर अधिवक्ता की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर अभिभाषक संघ की कमान किसके हाथों में जाएगी।
कई दिनों से चल रहा चुनाव प्रचार कल थम गया, लेकिन प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की सक्रियता अंतिम समय तक बनी रही। मोबाइल फोन पर समर्थन मांगते संदेश, वीडियो अपीलें, व्यक्तिगत संपर्क और छोटे-बड़े समूहों में बैठकों का दौर देर रात तक चलता रहा। कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भी अपने समर्थित प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने में पूरी ताकत झोंक दी।
नए चेहरे बदलाव और नई कार्यशैली का कर रहे दावा
इस बार का चुनाव कई मायनों में खास माना जा रहा है। अध्यक्ष पद पर पूर्व अध्यक्षों का अनुभव और प्रभाव मैदान में है तो दूसरी ओर नए चेहरे बदलाव और नई कार्यशैली का दावा कर रहे हैं। यही कारण है कि चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प और रोमांचक बन गया है।
आज सुबह 11 बजे से मतदान शुरू हुआ, जो शाम 5 बजे तक चलेगा। मतदान समाप्त होने के बाद शाम 6 बजे से मतगणना प्रारंभ होगी। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे प्रमुख पदों के परिणाम देर रात तक आने की संभावना है, जबकि कार्यकारिणी सदस्य पद के नतीजों में अधिक समय लग सकता है।
अध्यक्ष पद पर सबकी नजर, आठ उम्मीदवारों ने मुकाबला बनाया ऐतिहासिक
इस चुनाव का सबसे बड़ा आकर्षण अध्यक्ष पद बना हुआ है। पूरा चुनाव इसी के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है। अध्यक्ष पद के लिए वर्तमान अध्यक्ष एलएल यादव, पूर्व अध्यक्ष गोपाल कचोलिया, पूर्व अध्यक्ष रवींद्र सिंह गौड़, श्रीराम सिंह भदौरिया, राकेश पाल, राजेश खंडेलवाल, राजेंद्र यादव और मनोज वर्मा चुनावी मैदान में हैं।
इस मुकाबले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पुराने और स्थापित चेहरों के साथ नए दावेदार भी मैदान में डटे हुए हैं। पूर्व अध्यक्षों का अनुभव, संगठन में वर्षों की सक्रियता और मजबूत संपर्क उनके पक्ष में माने जा रहे हैं, वहीं नए चेहरे बदलाव, पारदर्शिता और नई कार्यशैली को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ रहे हैं।
बार के वरिष्ठ अधिवक्ताओं का मानना है कि आठ उम्मीदवारों की मौजूदगी के कारण वोटों का विभाजन परिणाम को पूरी तरह अप्रत्याशित बना सकता है। कई प्रत्याशी अपने-अपने समर्थन आधार को लेकर आश्वस्त दिखाई दे रहे हैं, जिससे मुकाबला और रोचक हो गया है।
उपाध्यक्ष पद पर सात दावेदारों के बीच सीधा संघर्ष... उपाध्यक्ष पद के लिए भी मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। इस पद के लिए सुरेंद्र सिंह शेरा, संतोष पांडे, सुनील पटेल, पुरुषोत्तम सोमानी, संतोष ठाकुर, जितेंद्र निम और हरीश कंदावड़े मैदान में हैं।
सात उम्मीदवारों की मौजूदगी ने इस चुनाव को पूरी तरह खुला बना दिया है। अंतिम समय तक सभी उम्मीदवार मतदाताओं के बीच सक्रिय दिखाई दिए और समर्थन जुटाने का हर संभव प्रयास करते रहे।
कार्यकारिणी की छह सीटों के लिए सबसे बड़ा घमासान
कार्यकारिणी सदस्य पद का चुनाव इस बार सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है। यहां मात्र छह सीटों के लिए 21 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें आयुष, सुधीर व्यास, अजय बैंडवाल, पुष्पांजलि सोनी, शैलेंद्र बैरागी, दिनेश नरेंद्र अमोदे, ममता बिल्लौर, नितिन परमार, श्याम वर्मा, दीपा सोनकर, शकुंतला, प्रकाश यादव, राकेश अहिरवार, प्रखर चौहान, पारस जैन, ऋषिवन चौहान, कन्हैया चौहान, पी. शिवराज, गगनदीप सिंह सहित अन्य उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। यहां व्यक्तिगत संपर्क, वर्षों की सक्रियता, अधिवक्ताओं के बीच स्वीकार्यता और संगठनात्मक योगदान निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
सात बूथों पर मतदान, फर्जी वोटिंग पर सख्ती
चुनाव समिति ने मतदान को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए सात मतदान केंद्र बनाए हैं। बूथ क्रमांक 1 और 2 पर वरिष्ठ अधिवक्ता मतदान करेंगे, जबकि बूथ क्रमांक 7 महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित रहेगा। इस बार कुल 5461 मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे।
चुनाव समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति फर्जी मतदान करते हुए या किसी अन्य के नाम पर वोट डालने का प्रयास करता पाया गया तो उसे तत्काल पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा।
कोषाध्यक्ष पद पर महिला शक्ति का मुकाबला
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार इस बार कोषाध्यक्ष पद महिलाओं के लिए आरक्षित है। इस पद पर पिंकी सुनहरे, पिंकी हरिवंशी, पल्लवी अध्यरू, पुष्पांजलि द्विवेदी और सविता तिवारी के बीच मुकाबला है।
महिला अधिवक्ताओं में इस चुनाव को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। महिला मतदाताओं की भूमिका इस पद पर निर्णायक मानी जा रही है और सभी उम्मीदवारों ने उनके बीच व्यापक संपर्क अभियान चलाया है।
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