फिरोज खान के ठिकानों पर लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद अनेक सवाल: यह है सबसे चर्चित मामला; 'खुलासा फर्स्ट' ने किया था खुलासा, अब संभागायुक्त से तहसीलदार तक के आदेश जांच के घेरे में, लगातार हो रहे हैं चौंकाने वाले खुलासे
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ प्रधान आरक्षक और ड्राइवर फिरोज खान की करोड़ों की संपत्तियों की जांच के बीच मगरखेड़ा की करीब 45 बीघा जमीन का सौदा भी चर्चा में है। करीब 150 करोड़ रुपये बाजार मूल्य वाली 11 हेक्टेयर जमीन का सौदा 9 करोड़ रुपये में हुआ। इस सौदे में फिरोज खान गवाह बना। जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी, नामांतरण और राजस्व अधिकारियों के आदेशों को लेकर भी गंभीर सवाल उठे।
मगरखेड़ा गांव की इस जमीन का दर्ज स्वामित्व कस्तूरीबाई पत्नी बद्रीलाल के नाम था। उनके दामाद मनोज के माध्यम से रविकांत पंवार के पक्ष में पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कराई गई, जिसका पंजीयन 28 जून 2024 को रतलाम में हुआ। इसके बाद 10 अगस्त 2024 को श्याम इंफ्रा के नाम जमीन का सौदा किया गया।
कंपनी की ओर से सुमित जिंदल ने जमीन खरीदी। सौदे की राशि 9 करोड़ रुपये बताई गई, जिसका भुगतान डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपये के छह चेकों के जरिए होना था। 27 अगस्त 2024 को रजिस्ट्री हुई। दस्तावेजों में रविकांत पंवार विक्रेता और सुमित जिंदल खरीदार के रूप में दर्ज हैं। फिरोज खान और युवराज सिंह पवार इस सौदे के गवाह बने।
युवराज सिंह पवार का नाम स्पार्कवेव रियल्टी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से भी जुड़ा है। इस कंपनी में फिरोज खान की पत्नी हीना खान और मोहम्मद शाकिर के निदेशक होने की जानकारी सामने आई है। इससे जमीन के सौदे और संबंधित कारोबारी संबंधों की जांच का पहलू अहम हो गया है।
गुंडे हेमंत यादव की पड़ी जमीन पर नजर
बताया जाता है कि शहर के एक बड़े भूमाफिया से भी सौदा हुआ था, लेकिन जमीन की पूरी खरीद-बिक्री नहीं हो सकी। बाद में इस जमीन पर एक गुंडे हेमंत यादव की नजर पड़ी। कुछ लोगों ने हेमंत को इसकी जिम्मेदारी सौंपी और उसे जमीन का सौदा पूरा कराने के लिए कहा था।
वारिसों को रकम देकर उनके दावे हटाने की जिम्मेदारी भी उसे मिली थी। इसके बाद हेमंत ने कथित तौर पर दबाव बनाना शुरू किया था, लेकिन इसी बीच हत्या के पुराने मामले में उस पर कार्रवाई हुई थी। हेमंत को अक्टूबर 2023 में फिर जेल भेज दिया गया था। इसके बाद जमीन से जुड़ा यह मामला ठंडा पड़ गया।
पावर ऑफ अटॉर्नी को चुनौती, फिर भी हुआ नामांतरण
कस्तूरीबाई के परिवार ने पावर ऑफ अटॉर्नी को फर्जी बताते हुए जमीन की बिक्री और नामांतरण का विरोध किया। परिवार की ओर से दीवानी अदालत में भी मामला उठाया गया। परिजनों का कहना था कि 27 अक्टूबर 2024 को अदालत ने जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।
इसके बावजूद मल्हारगंज के तत्कालीन तहसीलदार नारायण नंदेड़ा की अदालत में नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ी। मामले में सुनवाई की तारीखें 10, 11, 13 और 14 फरवरी 2025 के बाद 17 फरवरी तय हुईं।
इसी दिन संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े की अदालत ने प्रकरण को बिचौली हप्सी तहसीलदार न्यायालय में स्थानांतरित करने का आदेश दिया। इसी दिन तहसीलदार नंदेड़ा ने नामांतरण का आदेश भी जारी कर दिया। आदेशों के इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।
कस्तूरीबाई की बेटी लीलाबाई ने संभागायुक्त न्यायालय में प्रकरण दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की थी। बाद में एसडीएम निधि वर्मा की अदालत में नामांतरण आदेश को चुनौती दी गई। अपील में फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी, वारिसों को सुनवाई का पर्याप्त अवसर नहीं देने और अदालत के यथास्थिति आदेश की अनदेखी जैसे बिंदु उठाए गए।
एसडीएम ने पलटा नामांतरण का आदेश
24 दिसंबर 2025 को एसडीएम अदालत ने तहसीलदार का नामांतरण आदेश निरस्त कर दिया और 17 फरवरी 2025 से पहले की राजस्व रिकॉर्ड की स्थिति बहाल करने का आदेश दिया। इससे नामांतरण की कार्रवाई को झटका लगा। हालांकि, नामांतरण आदेश निरस्त होना अपने आप में जमीन की रजिस्ट्री या स्वामित्व विवाद का अंतिम न्यायिक फैसला नहीं है।
इस मामले में एक और सवाल कस्तूरीबाई के अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उनकी देखभाल और दस्तावेजों को लेकर उठता है। कस्तूरीबाई की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें इंदौर के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सितंबर 2024 में उनकी मृत्यु हो गई। अस्पताल में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
लोकायुक्त की जांच में 65.71 करोड़ की संपत्तियां
14 अक्टूबर 2026 को लोकायुक्त पुलिस ने फिरोज खान से जुड़ी संपत्तियों को लेकर इंदौर और उज्जैन में कार्रवाई की थी। 23 अक्टूबर को सामने आए विवरण के अनुसार, जांच में अब तक 50 अचल संपत्तियों की जानकारी मिली है। इनका गाइडलाइन मूल्य करीब 18.29 करोड़ रुपये, जबकि अनुमानित बाजार मूल्य 65 करोड़ 71 लाख रुपये से अधिक बताया गया है। चल-अचल संपत्तियों का कुल विवरण भी जांच के दायरे में है।
'खुलासा फर्स्ट' की खबर पर लगी मुहर
खुलासा फर्स्ट ने 20 अक्टूबर को शर्मा परिवार की मगरखेड़ा स्थित 45 बीघा जमीन का उल्लेख करते हुए बताया था कि फिरोज खान ने रविकांत पवार के साथ मिलकर श्याम इन्फ्रा नाम से फर्जी फर्म बनाकर उक्त जमीन में खेल किया था। रविकांत ने अपने नाम से पॉवर कराने के बाद 9 करोड़ रुपए में जमीन का सौदा किया था। लोकायुक्त विभाग की जांच में भी सामने आया है कि कस्तूरीबाई और रविकांत ने यह जमीन श्याम इन्फ्रा के साझेदार सुमित जिंदल को 9 करोड़ रुपए में बेची थी।
इस सौदे में फिरोज खान गवाह था। जमीन की वर्तमान कीमत 150 करोड़ रुपए बताई जा रही है। जमीन के नामांतरण पर राजस्व न्यायालय द्वारा रोक लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। अब लोकायुक्त यह जांच करेगा कि इस सौदे में फिरोज खान की वास्तविक भूमिका क्या थी और लेन-देन से उनका किस प्रकार का संबंध रहा।
वहीं खुलासा फर्स्ट ने बताया था कि जमीन की असल मालिक कस्तूरीबाई शर्मा थी। 27 अगस्त 2024 को जमीन का सौदा हुआ, उसी दिन रविकांत और फिरोज खान ने कस्तूरीबाई को संदिग्ध परिस्थितियों में मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया। तब फिरोज खान पुलिसकर्मियों के साथ अस्पताल में ही मौजूद था।
उस दौरान कि खास बात यह थी कि तब फिरोज खान और रवि कांत की तरफ से अस्पताल प्रबंधन को यह लिखित में दिया गया था कि कस्तूरी बाई से सिर्फ रवि कांत ही मुलाकात कर सकता है। 2 सितंबर को कस्तूरीबाई की मौत हो गई थी। खुलासा फर्स्ट के हाथ अस्पताल का वीडियो लगा है, जिसमें फिरोज खान मेदांता अस्पताल में पुलिसकर्मी के साथ दिखाई दे रहा है।
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