महादेव मंदिर की जमीन पर कब्जे के आरोपों से प्रशासन घिरा: लालबाग लाइफ की विकास अनुज्ञा निरस्त
KHULASA FIRST
संवाददाता

केसरबाग रोड के प्रोजेक्ट में न्यायालयीन विवाद छिपाकर अनुमति लेने का मामला
अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
केसरबाग रोड स्थित ‘लालबाग लाइफ’ आवासीय मल्टीफ्लैटेड प्रोजेक्ट की विकास अनुज्ञा नगर तथा ग्राम निवेश (टीएनसीपी) विभाग ने तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी है। विभागीय जांच में अनुमति प्राप्त करने के लिए प्रस्तुत शपथ-पत्र में भूमि से संबंधित न्यायालयीन विवाद की जानकारी छिपाने का मामला सामने आया।
विभागीय सुनवाई, शिकायतों, दस्तावेजों और न्यायालयीन आदेशों के परीक्षण के बाद यह कार्रवाई की गई। इस मामले ने भूमि संबंधी दस्तावेजों की सत्यता और विकास अनुमतियां जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
वहीं इसी क्षेत्र में प्राचीन श्री महादेव मंदिर चंद्रहास्य देवस्थल की कथित इनामी भूमि को निजी नामों पर दर्ज कराने, कॉलोनियां विकसित करने और शासकीय जमीन पर कब्जे के आरोपों को लेकर जिला प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। शिकायतकर्ता मुन्ना उर्फ लीलाधर चौधरी का आरोप है कि वर्षों से दस्तावेजों के साथ शिकायतें देने के बावजूद जमीन की नपती, सीमांकन और कब्जे हटाने जैसी ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
2013 में मिली थी विकास अनुज्ञा, विवाद छिपाने का आरोप- कार्यालय संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश के आदेश अनुसार केसरबाग रोड स्थित सर्वे क्रमांक 1464/2 से 1464/9 तक की कुल 0.321 हेक्टेयर भूमि पर आवासीय मल्टीफ्लैटेड यूनिट के निर्माण के लिए 24 जनवरी 2013 को ‘लालबाग लाइफ’ प्रोजेक्ट की विकास अनुज्ञा जारी की गई थी।
जांच में सामने आया कि अनुमति प्राप्त करने के दौरान प्रस्तुत शपथ-पत्र में भूमि से संबंधित लंबित सिविल प्रकरण की जानकारी नहीं दी गई थी। भूमि को विवादरहित बताकर अनुमति लेने की शिकायत पर संबंधित दस्तावेजों और न्यायालयीन आदेशों के परीक्षण के बाद विभाग ने विकास अनुज्ञा निरस्त करने का निर्णय लिया।
इसी भूमि के स्वामित्व को लेकर भी विवाद बताया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार राजस्व अभिलेखों में संबंधित जमीन ऐतिहासिक रूप से महादेव मंदिर के नाम दर्ज रही है। इस संबंध में मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 115 के तहत एसडीओ राऊ के समक्ष जांच प्रक्रियाधीन बताई गई है।
महू नाका पर जमीन के हिस्से में फर्नीचर दुकान, टीन शेड भी- महू नाका चौराहा पर पुराने आरटीओ रोड से पेट्रोल पंप की ओर जाने वाली मुख्य सड़क से लगी त्रिकोणाकार जमीन के एक हिस्से पर फर्नीचर की दुकान संचालित होने का मामला भी शिकायत में उठाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार जमीन पर टीन शेड डालकर चौकीदार के लिए कमरा भी बनाया गया है।
उनका दावा है कि संबंधित खसरा रिकॉर्ड में जमीन महादेव मंदिर के नाम दर्ज है, जबकि दुकान संचालक ने उक्त जमीन बॉबी छाबड़ा की बताते हुए उनकी अनुमति से दुकान चलाने की बात कही है। शिकायतकर्ता ने प्रशासन से भूमि के स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों की जांच कराने, मौके का पंचनामा बनाने, नपती कराने और कब्जा अवैध पाए जाने पर जमीन को सरकारी अभिरक्षा में लेने की मांग की है।
कई कॉलोनियों और निर्माणों की जांच का भी हवाला
शिकायत में सच्चिदानंद कॉलोनी, रेवेन्यू नगर, इंदिरा गांधी नगर, मॉडर्न टाउन, श्रीराम नगर, 11 बंगले, मून पैलेस, क्रांति कृपलानी नगर और अन्नपूर्णा थाने के पीछे स्थित सोलह मंजिला भवन सहित कई निर्माणों का उल्लेख किया गया है।
उद्योगपति हेमंत नीमा के आठ बीघा भूमि पर बने भवन का भी शिकायत में हवाला दिया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि देवस्थान और शासकीय भूमि से संबंधित रिकॉर्ड में कथित बदलाव के बाद विभिन्न स्थानों पर कॉलोनियां और निर्माण विकसित किए गए। इन सभी संपत्तियों के स्वामित्व, अनुमतियों और कथित अनियमितताओं की स्थिति अलग-अलग दस्तावेजों तथा संबंधित विभागों की जांच से स्पष्ट हो सकती है।
2019 से 2025 तक शिकायतों का दावा, कार्रवाई की स्थिति अस्पष्ट
सुदामा नगर निवासी मुन्ना उर्फ लीलाधर चौधरी के अनुसार उन्होंने वर्ष 2019 से 2025 के बीच एसडीएम, कलेक्टर, सीएम हेल्पलाइन और अन्य संबंधित अधिकारियों को कई शिकायतें दीं। उन्होंने राजस्व अधिकारियों और रणवीर उर्फ बॉबी छाबड़ा सहित अन्य लोगों पर मिलीभगत से भूमि के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर करने के आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ता का दावा है कि कई बार बयान दर्ज होने और दस्तावेज सौंपे जाने के बावजूद मामले में निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने तथा अपनी और परिवार की सुरक्षा की मांग भी की है।
आकाश गृह निर्माण संस्था के नाम हस्तांतरण पर सवाल
मामले में 15 जुलाई 1987 के एक शपथ-पत्र का हवाला दिया गया है। शिकायत के अनुसार इसमें चंद्रहास्य पिता गुरु सच्चिदानंद अवस्थी द्वारा विभिन्न सर्वे नंबरों की भूमि को आकाश गृह निर्माण सहकारी संस्था को बेचने के लिए 3 जून 1980 को अनुबंध किए जाने का उल्लेख है।
दस्तावेज में भूमि का कब्जा संस्था को सौंपने की बात भी बताई गई है। शिकायतकर्ता का सवाल है कि यदि संबंधित जमीन देवस्थान की थी, तो उसे निजी तौर पर बेचने का अधिकार किस आधार पर मिला और भूमि का नामांतरण किस वैधानिक प्रक्रिया के तहत किया गया।
महादेव मंदिर की 35 एकड़ भूमि का दावा, रिकॉर्ड में हेरफेर के आरोप
केसरबाग रोड स्थित पुराने आरटीओ के पास श्री महादेव मंदिर चंद्रहास्य देवस्थल की भूमि को लेकर शिकायतकर्ता ने करीब 35 एकड़ जमीन पर कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि ऐतिहासिक देवस्थान भूमि के कुछ हिस्सों को राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव कर निजी नामों पर दर्ज कराया गया और बाद में कॉलोनियों तथा अन्य निर्माणों के लिए उपयोग किया गया।
शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत बताए गए ऐतिहासिक अभिलेखों में सन् 1356 फसली यानी 1948-49 के नकल खसरे का उल्लेख है। दावा है कि इस रिकॉर्ड में भूमि ‘श्री महादेव मंदिर चंद्रहास्य देवस्थल’ के नाम दर्ज है। शिकायत में खसरा क्रमांक 1458 से 1468 तक की भूमि को देवस्थान की इनामी भूमि से संबंधित बताया गया है।
शिकायतकर्ता का यह भी दावा है कि मिसल बंदोबस्त और पुराने राजस्व रिकॉर्ड में मंदिर के नाम लगभग 35 एकड़ भूमि दर्ज थी, जबकि वर्तमान में मंदिर का मूल परिसर सीमित क्षेत्र में रह गया है। हालांकि भूमि के वास्तविक स्वामित्व, अलग-अलग खसरों की वर्तमान स्थिति और कथित नामांतरण की वैधानिकता का निर्धारण संबंधित मूल अभिलेखों तथा सक्षम प्राधिकारी की जांच से ही हो सकेगा।
विधानसभा में भी मंदिरों और जीर्णोद्धार पर जानकारी मांगी गई
मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय में धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग से संबंधित अतारांकित प्रश्न क्रमांक 873 प्रस्तुत किए जाने का भी उल्लेख है। प्रश्न में प्रदेश मंो शासन-संधारित मंदिरों की जिलेवार और तहसीलवार संख्या तथा वर्ष 2023 से प्रश्न दिनांक तक मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए स्वीकृत राशि की जानकारी मांगी गई थी। हालांकि उपलब्ध विवरण से यह स्पष्ट नहीं है कि इस प्रश्न के उत्तर में देवस्थल की उक्त भूमि का उल्लेख किया गया था या नहीं।
बड़ा सवाल: एक मामले में कार्रवाई, दूसरे में जांच का इंतजार क्यों?
‘लालबाग लाइफ’ की विकास अनुज्ञा निरस्त किए जाने से स्पष्ट है कि भूमि संबंधी विवाद और अनुमति के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच के आधार पर नियामक कार्रवाई की जा सकती है।
ऐसे में महादेव मंदिर की कथित देवस्थान भूमि और महू नाका स्थित जमीन के मामले में भी शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच, रिकॉर्ड का मिलान और मौके का सीमांकन कराए जाने की मांग उठ रही है।
राऊ एसडीएम लोकेंद्रसिंह सरल ने बताया तहसील में कुछ समय पहले जिम्मेदारी दी गई है, उक्त प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं है।
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