शहर में 50 से ज्यादा निजी बोरिंग के पानी में मिला ऐसा बैक्टीरिया: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने स्वतः संज्ञान लिया; नगर निगम को जांच और ट्रीटमेंट के निर्देश
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में पेयजल की शुद्धता को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता सामने आई है। भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण 36 लोगों की मौत के मामले के बाद अब इंदौर के अलग-अलग इलाकों में निजी बोरिंग के पानी में भी खतरनाक बैक्टीरिया मिलने का मामला सामने आया है।
शहर के 50 से अधिक निजी बोरिंग के पानी की जांच में ई-कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने स्वतः संज्ञान लिया है।
एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए नगर निगम, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित विभागों को पानी की गुणवत्ता की जांच करने तथा दूषित पानी के उपचार के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। संबंधित विभागों को इस मामले में जांच कर रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी।
जांच में सरकारी अस्पतालों, निजी छात्रावासों, आवासीय कॉलोनियों और अन्य संस्थानों में मौजूद बोरवेल के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद नगर निगम ने संबंधित स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाकर पानी को पीने के लिए असुरक्षित घोषित किया था। कुछ स्थानों पर बोरिंग को सील करने की कार्रवाई भी की गई है।
NGT ने मामले में स्वतः संज्ञान लेकर दिए निर्देश
निजी बोरिंग के पानी में बैक्टीरिया मिलने के मामले में एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने सुनवाई की। न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह (न्यायिक सदस्य) और सुधीर कुमार चतुर्वेदी (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
पीठ ने बोरिंग के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी से जुड़े तथ्यों की जांच करने, पानी की गुणवत्ता का परीक्षण कराने और दूषित पानी के उपचार के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। इसके साथ ही संबंधित विभागों को अपनी कार्रवाई और जांच से जुड़ी रिपोर्ट एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
एनजीटी के हस्तक्षेप के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिन स्थानों पर बोरिंग के पानी में बैक्टीरिया मिला है, वहां पानी को सुरक्षित बनाने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है और भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए निगरानी की क्या व्यवस्था लागू होती है।
अस्पतालों और छात्रावासों के बोरवेल तक पहुंचा दूषित पानी
जांच में जिन स्थानों के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला है, उनमें सरकारी अस्पताल, निजी छात्रावास, आवासीय क्षेत्र और अन्य संस्थान शामिल बताए गए हैं। यह स्थिति इसलिए भी चिंता बढ़ाने वाली है, क्योंकि इन स्थानों पर बड़ी संख्या में लोग रोजाना पानी का उपयोग करते हैं।
नगर निगम ने जांच में प्रभावित पाए गए स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाकर लोगों को बोरिंग का पानी पीने से रोकने की कार्रवाई की। कुछ बोरिंग को सील भी किया गया है। हालांकि, अब जरूरत इस बात की है कि प्रभावित स्थानों पर नियमित रूप से पानी के नमूनों की जांच हो और उपचार के बाद पानी की गुणवत्ता दोबारा प्रमाणित की जाए।
क्या है ई-कोलाई बैक्टीरिया और क्यों है खतरनाक?
ई-कोलाई (Escherichia coli) एक प्रकार का बैक्टीरिया है, जो सामान्य तौर पर मनुष्यों और गर्म रक्त वाले जानवरों की आंतों में पाया जाता है। इसकी कुछ प्रजातियां सामान्य होती हैं, जबकि कुछ प्रकार गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
पानी में ई-कोलाई की मौजूदगी आमतौर पर मलजनित संदूषण का संकेत मानी जाती है। इसका अर्थ है कि पानी में सीवेज, गंदगी या मल से जुड़े प्रदूषण के पहुंचने की आशंका है।
ऐसे दूषित पानी का सेवन करने से दस्त, पेट में दर्द, उल्टी और अन्य संक्रमण संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ खतरनाक प्रकार के ई-कोलाई बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकते हैं।
इसलिए पानी में ई-कोलाई मिलने की स्थिति को सामान्य प्रदूषण मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे पानी को बिना उचित उपचार और गुणवत्ता जांच के पीने के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
भागीरथपुरा में 36 मौतों के बाद पहले से सवालों के घेरे में पेयजल व्यवस्था
इंदौर में दूषित पानी का मुद्दा भागीरथपुरा की घटना के बाद पहले ही गंभीर रूप ले चुका है। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल के कारण 36 लोगों की मौत का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद शहर की जलापूर्ति व्यवस्था, पाइपलाइन की स्थिति, सीवेज और पेयजल के बीच संभावित मिलावट तथा पानी की नियमित जांच को लेकर कई सवाल उठे थे।
इस मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में पांच जनहित याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। हाईकोर्ट द्वारा गठित एक सदस्यीय जांच आयोग भी अपनी 600 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट प्रस्तुत कर चुका है।
भागीरथपुरा की घटना के बाद अब निजी बोरिंग के पानी में भी बैक्टीरिया मिलने से पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता और बढ़ गई है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि शहर में केवल नगर निगम की पाइपलाइन से मिलने वाले पानी की ही नहीं, बल्कि निजी बोरिंग के पानी की भी नियमित निगरानी कितनी जरूरी है।
अब पानी की जांच और शुद्धिकरण व्यवस्था पर रहेगी नजर
एनजीटी के निर्देशों के बाद नगर निगम और संबंधित विभागों के सामने प्रभावित बोरिंग की पहचान, पानी के नमूनों की जांच, प्रदूषण के संभावित स्रोतों का पता लगाने और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ई-कोलाई मिलने पर केवल बोरिंग को बंद करना ही पर्याप्त नहीं है। संदूषण के संभावित स्रोत की पहचान करना, आसपास की सीवेज व्यवस्था की जांच करना और उपचार के बाद पानी की दोबारा प्रयोगशाला जांच करना भी जरूरी है।
इंदौर जैसे शहर में, जहां बड़ी आबादी निजी बोरिंग और अन्य जलस्रोतों पर निर्भर है, वहां पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।
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