रईसजादे नशेड़ी फूंक रहे 20 लाख रुपए किलो का गांजा: शहर में अब ‘OG’ का नशा चरम पर
Khulasa First
संवाददाता

कैमिकल मिलावट की आशंका के चलते एमडी ड्रग्स को पीछे छोड़ा
रविश राजेंद्र सिंह 79870-55743 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में नशे का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। कभी अफीम, डोडाचूरा और देसी गांजा तक सीमित रहने वाला नशा अब हाई-प्रोफाइल, महंगे और विदेशी वैरिएंट्स तक पहुंच चुका है। इन दिनों शहर में जिस नशे ने सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाई है, वह है विदेशी गांजा ‘OG’ जिसे ओरिजिनल ग्रेड या ऑर्गेनिक गांजा भी कहते हैं।
इसकी कीमत बाजार में 20 लाख रुपए किलो तक बताई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि यह नशा अब झुग्गी-बस्तियों या अपराधियों तक सीमित नहीं, बल्कि संभ्रांत परिवारों के युवक-युवतियों और स्टूडेंट्स में भी तेजी से फैल रहा है। इसे लेकर प्रस्तुत है खास खबर-
जानकारी के मुताबिक पुराने दौर में नशेड़ी अफीम, गांजा, चरस या डोडाचूरा तक सीमित रहते थे।
समय बदला तो नशे की वैरायटी भी बदल गई। शहर में पहले कोकीन और हेरोइन ने दस्तक दी, फिर ब्राउन शुगर, एलएसडी, स्मैक, एमडी ड्रग्स और अल्प्राजोलम जैसे खतरनाक नशों ने युवाओं को अपनी गिरफ्त में लिया। लेकिन अब इन सबके बीच OG गांजा तेजी से उभरकर सामने आया है।
जानकार बताते हैं कि आज कल एमडी ड्रग्स में कैमिकल मिलावट की जा रही है, यही वजह है कि महंगे क्लब्स, फार्म हाउस पार्टियों और प्राइवेट गैदरिंग्स में OG का चलन बढ़ा है। सूत्रों के मुताबिक OG गांजा की कीमत क्वालिटी और फ्लेवर के हिसाब से 2,000 से 5000 रुपए प्रति ग्राम, जबकि कुछ मामलों में 10,000 रुपए ग्राम तक पहुंच जाती है।
इस हिसाब से एक किलो की कीमत 20 लाख रुपए के आसपास बैठती है। खास बात यह कि OG गांजा हाथ लगाते ही बहुत बारीक और क्रशेबल हो जाता है, जिसके चलते इसे नॉर्मल गांजे को क्रश करने जितनी मेहनत नहीं लगती। हालांकि पहचान के अभाव में इसे सामान्य गांजा समझ लिया जाता है।
युवा तेजी से आ रहे OG की गिरफ्त में
सूत्रों के मुताबिक OG गांजा सिर्फ एक नशा नहीं, बल्कि शहर के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। खासकर युवा इसके नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। इनमें संभ्रांत परिवारों के बच्चे, स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स शामिल हैं। पहचान की कमी, हाई-प्रोफाइल नेटवर्क और महंगे दाम ये तीनों मिलकर इसे सबसे खतरनाक नशों की कतार में खड़ा कर रहे हैं।
विदेश से नेपाल, फिर महानगरों के रास्ते इंदौर
सूत्र बताते हैं कि OG गांजा की पैदावार मुख्य रूप से थाईलैंड, शिलांग, कैलिफोर्निया और फ्रांस में होती है। वहां से इसकी सप्लाई नेपाल पहुंचती है और फिर नॉर्थ-ईस्ट के रास्ते दिल्ली, नोएडा, मुंबई, पुणे और जयपुर जैसे बड़े शहरों में भेजी जाती है। इन महानगरों से चिह्नित तस्करों के जरिये यह माल देश के अन्य शहरों में पहुंचता है।
मौजूदा समय में इंदौर व भोपाल तस्करों की पसंदीदा मंडी बन चुका है, क्योंकि यहां इसके ग्राहक ज्यादा हैं और भुगतान क्षमता भी ऊंची। पिछले दिनों ही भोपाल क्राइम ब्रांच ने कटारा हिल्स इलाके से रतनपुर के पर्वतसिंह परमार नामक तस्कर से लाखों रुपए कीमत का OG गांजा बरामद किया था। इसके पहले रायपुर पुलिस ने रायपुर के ही तुषार मूलचंदानी और दिल्ली नोएडा पुलिस ने दिल्ली के 5 तस्करों को लाखों, करोड़ों कीमत के OG गांजे के साथ पकड़ा था।
ब्लूबैरी से लेकर कैली फ्लेवर तक OG के रंगीन नाम
शहर में OG गांजा कई आकर्षक नामों और फ्लेवर में मिल रहा है, जिनमें ब्लूबैरी, इंडिका, सतीवा, पर्पल, ब्राउनी, कैली फ्लेवर, चोकोलोपी आदि शामिल हैं।
संभ्रांत इलाकों में खुलेआम सप्लाई
सूत्रों का दावा है कि शहर के माणिकबाग, स्कीम-78, लसूड़िया, भंवरकुआं, विजय नगर और कनाड़िया जैसे पॉश इलाकों में OG गांजा की सप्लाई ज्यादा हो रही है। पैडलर बकायदा कारों से 1 ग्राम की डिलीवरी देने पहुंचते हैं। चौंकाने वाली बात यह कि सप्लाई युवतियों से ज्यादा कराई जा रही है, ताकि किसी को शक न हो। हाई-प्रोफाइल सोसायटी और स्टूडेंट्स के बीच यह नेटवर्क बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा है।
पकड़ती है पुलिस, लेकिन पहचान नहीं पाती
सबसे बड़ा सवाल पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की पहचान प्रणाली पर खड़ा हो रहा है। सूत्र बताते हैं कि शहर पुलिस आए दिन गांजा पीते युवाओं को पकड़ती है। उनके पास से चिलम, गोगो पेपर, लाल कपड़ा और थोड़ी मात्रा में गांजा बरामद होता है, लेकिन OG गांजा की सही पहचान न होने के कारण इसे सामान्य गांजा मानकर नशेड़ियों पर मामूली धाराओं में केस बनाकर छोड़ दिया जाता है। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर तस्कर और पैडलर बेखौफ कारोबार चला रहे हैं।
जानकारों का मानना है कि अगर पुलिस और नारकोटिक्स विभाग को OG गांजा की सटीक पहचान, टेस्टिंग और प्रोफाइलिंग की ट्रेनिंग मिल जाए, तो छोटे पैडलरों से होते हुए बड़े तस्करों तक पहुंचना मुश्किल नहीं होगा। अभी स्थिति यह है कि पहचान के अभाव में बड़ी खेप हाथ से निकल रही है और इसका खामियाजा शहर के युवा तथा उनके परिवार भुगत रहे हैं।
OG गांजा इसलिए देता है तेज व लंबा नशा
OG गांजा, जिसे ओरिजिनल ग्रेड या ऑर्गेनिक गांजा भी कहा जाता है, रेगुलर गांजे से ज्यादा शुद्ध और असरदार माना जाता है। इसमें THC (डेल्टा-9-टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल) की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे इसका नशा तेज और लंबे समय तक रहता है। बताया जाता है कि इसकी खेती खास तकनीकों से की जाती है, जिनमें हाइड्रोपोनिक (पानी के अंदर खेती) जैसी आधुनिक विधियां भी शामिल हैं।
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