राष्ट्रीय दलों से ज्यादा चंदा जुटा रहीं क्षेत्रीय पार्टियां: डीएमके, टीएमसी समेत 8 दल आगे; एक साल में 198% बढ़ा फंड
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
देश की राजनीति में क्षेत्रीय दल अब सिर्फ चुनावी प्रभाव के लिहाज से ही मजबूत नहीं हैं, बल्कि आर्थिक तौर पर भी बड़ी ताकत बनकर उभर रहे हैं।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की 6 अगस्त को जारी वित्तीय वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों को मिलने वाले चंदे में एक साल के भीतर करीब 198 फीसदी का उछाल आया है।
20 हजार रुपए से अधिक के घोषित चंदे के आधार पर क्षेत्रीय दलों को 2023-24 में कुल 347.69 करोड़ रुपए मिले थे। 2024-25 में यह रकम बढ़कर 1,051.56 करोड़ रुपए हो गई। यानी एक साल में चंदे में करीब 703.87 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई।
खास बात यह है कि BJP और कांग्रेस को अलग रखने पर डीएमके, तृणमूल कांग्रेस, वायएसआरसीपी, टीडीपी और एआईएडीएमके समेत 8 क्षेत्रीय दलों ने चंदा जुटाने के मामले में आप, बसपा, सीपीआई(एम) और एनपीपी जैसे अन्य राष्ट्रीय दलों को पीछे छोड़ दिया।
चंदे में करीब तीन गुना उछाल
एडीआर के आंकड़ों के मुताबिक, क्षेत्रीय दलों को मिलने वाले चंदे की रकम में ही नहीं, बल्कि दान की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ है।
2023-24: 347.69 करोड़ रुपए
2024-25: 1,051.56 करोड़ रुपए
कुल बढ़ोतरी: करीब 198%
दान की संख्या भी 2,861 से बढ़कर 5,297 हो गई। यानी एक साल में इसमें करीब 85 फीसदी की वृद्धि हुई।
इन 5 क्षेत्रीय दलों को मिला सबसे ज्यादा चंदा
एडीआर के मुताबिक, सिर्फ पांच प्रमुख क्षेत्रीय दलों डीएमके, एआईटीसी, वायएसआरसीपी, टीडीपी और एआईएडीएमके को 2024-25 में कुल 840.12 करोड़ रुपए मिले।
यह क्षेत्रीय दलों को मिले कुल चंदे का करीब 79.9 फीसदी है। इनमें डीएमके सबसे आगे रही। पार्टी ने 2024-25 में 365.78 करोड़ रुपए का चंदा घोषित किया।
कॉर्पोरेट और इलेक्टोरल ट्रस्ट बने बड़ा जरिया
क्षेत्रीय दलों को मिले चंदे में कॉर्पोरेट और कारोबारी घरानों की बड़ी हिस्सेदारी रही। एडीआर के मुताबिक, 2024-25 में क्षेत्रीय दलों को मिले कुल चंदे का करीब 61.33 फीसदी यानी 644.93 करोड़ रुपए कॉर्पोरेट और कारोबारी स्रोतों से आया।
प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट सबसे बड़ा दानदाता
रिपोर्ट में प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट क्षेत्रीय दलों के लिए सबसे बड़े दानदाताओं में रहा। दोनों वित्तीय वर्षों को मिलाकर इस ट्रस्ट ने क्षेत्रीय पार्टियों को करीब 434 करोड़ रुपये दिए। इसमें अकेले 2024-25 में 253.50 करोड़ रुपये शामिल हैं। वहीं टाइगर एसोसिएट्स ने 2024-25 में पांच किस्तों में क्षेत्रीय दलों को कुल 160 करोड़ रुपए दिए।
क्षेत्रीय दलों को सबसे ज्यादा चंदा दिल्ली से 433.77 करोड़ रुपए, पश्चिम बंगाल से 172.93 करोड़ रुपए और महाराष्ट्र से 158.80 करोड़ रुपए मिला।
अज्ञात दानदाताओं से मिले चंदे में 4,470% उछाल
एडीआर रिपोर्ट का सबसे अहम और सवाल खड़ा करने वाला पहलू अज्ञात दानदाताओं से मिले चंदे को लेकर है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2023-24 में अज्ञात दानदाताओं से क्षेत्रीय दलों को 6.62 करोड़ रुपए मिले थे। 2024-25 में यह रकम बढ़कर 302.67 करोड़ रुपए हो गई। यानी एक साल में इसमें करीब 4,470 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
इसी तरह नकद चंदे में भी बड़ा उछाल देखने को मिला। 2023-24 में क्षेत्रीय दलों को 6.54 करोड़ रुपए नकद मिले थे, जो 2024-25 में बढ़कर 301.44 करोड़ रुपए हो गए।
डीएमके के चंदे पर सबसे ज्यादा सवाल
तमिलनाडु की डीएमके ने 2024-25 में क्षेत्रीय दलों में सबसे ज्यादा 365.78 करोड़ रुपए का चंदा घोषित किया। हालांकि एडीआर के मुताबिक, इसमें से 300.64 करोड़ रुपए यानी करीब 82 फीसदी रकम ऐसे दान के रूप में दर्ज की गई, जिनमें दानदाताओं की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई। रिपोर्ट के अनुसार, यह रकम 20 हजार रुपए से कम के नकद चंदे के तौर पर दर्ज की गई है।
बिना PAN के चंदे में भी भारी बढ़ोतरी
एडीआर ने चंदे में PAN विवरण की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बिना PAN विवरण वाले चंदे की रकम 2023-24 में 7.68 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 329.58 करोड़ रुपए हो गई। यह क्षेत्रीय दलों को मिले कुल चंदे का करीब 31.3 फीसदी है।
तृणमूल कांग्रेस के मामले में भी बड़ी रकम ऐसे दान के रूप में सामने आई, जिसमें दानदाताओं की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं थी। एआईटीसी ने 2024-25 में 184.96 करोड़ का चंदा घोषित किया, जिसमें 184.08 करोड़ रुपए चेक या डिमांड ड्राफ्ट के जरिए मिले।
इलेक्टोरल बॉन्ड से पहले भी मिला था बड़ा फंड
सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी 2024 को इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित करते हुए इसे रद्द कर दिया था। एडीआर के मुताबिक, इसके पहले टीएमसी ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 612.42 करोड़ रुपए, जबकि बीआरएस ने 495.52 करोड़ रुपये जुटाए थे।
67 में से 33 क्षेत्रीय दलों ने नहीं दी चंदे की रिपोर्ट
एडीआर ने राजनीतिक दलों की वित्तीय पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट तैयार होने तक देश की 67 मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टियों में से 33 दलों ने चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपनी चंदे की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई थी।
इनमें जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस, असम गण परिषद , बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट, टिपरा मोथा और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक जैसे दल शामिल हैं।
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