देखिये वीडियो, ओंकारेश्वर की धार्मिक-प्राकृतिक विरासत बचाने की मांग: अधिवक्ताओं ने संभागायुक्त को सौंपा ज्ञापन; इसको लेकर जताई चिंता
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, खंडवा।
ओंकारेश्वर की धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर इंदौर जिले के अधिवक्ताओं ने पहल की है।
अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने संभागायुक्त कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और ओंकार पर्वत, प्राचीन चट्टानों, घाटों, मां नर्मदा तट और क्षेत्र की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की मांग की।
इसको लेकर चिंता जताई
ज्ञापन में ओंकारेश्वर क्षेत्र में चल रहे निर्माण और शैल-कटाई से जुड़े कार्यों को लेकर चिंता जताई गई है। अधिवक्ताओं का कहना है कि ओंकारेश्वर सिर्फ मंदिर या पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि ज्योतिर्लिंग परंपरा, नर्मदा तट, ओंकार पर्वत और सदियों पुरानी धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण तीर्थ क्षेत्र है।
ब्रह्मपुरी में RCC घाट निर्माण पर जताई चिंता
अधिवक्ताओं ने विशेष रूप से ब्रह्मपुरी क्षेत्र में चल रहे RCC घाट निर्माण का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान प्राचीन घाटों और प्राकृतिक चट्टानी संरचनाओं में बदलाव होने से क्षेत्र के मूल धार्मिक और प्राकृतिक स्वरूप पर असर पड़ सकता है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा और तीर्थ क्षेत्र का विकास जरूरी है, लेकिन विकास कार्यों की योजना बनाते समय ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सामान्य इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, विरासत संरक्षण के नजरिए से हो विकास
ज्ञापन में कहा गया कि ओंकारेश्वर-मांधाता क्षेत्र में कई प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक संरचनाएं मौजूद हैं। क्षेत्र के ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व को देखते हुए यहां होने वाले निर्माण को केवल सामान्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
अधिवक्ताओं ने संवेदनशील क्षेत्रों में चल रहे निर्माण कार्यों की स्वीकृतियों, निर्माण योजनाओं और वैधानिक प्रक्रियाओं की जांच कराने की मांग की है।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को लेकर भी सुझाव
ज्ञापन में ओंकारेश्वर में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए ट्रैफिक मैनेजमेंट, पार्किंग, स्वच्छता, सीवेज प्रबंधन, प्लास्टिक नियंत्रण और क्राउड मैनेजमेंट को मजबूत करने का सुझाव दिया गया।
अधिवक्ताओं का कहना है कि मुख्य तीर्थ क्षेत्र पर लगातार बढ़ते दबाव को कम करने के लिए बाहरी और अपेक्षाकृत कम संवेदनशील क्षेत्रों में वेटिंग एवं होल्डिंग सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और मुख्य धार्मिक क्षेत्र पर दबाव भी कम होगा।
हेरिटेज-सेंसिटिव पिलग्रिमेज मैनेजमेंट प्लान की मांग
अधिवक्ताओं ने हेरिटेज-सेंसिटिव पिलग्रिमेज मैनेजमेंट योजना तैयार करने की मांग रखी है। इसके तहत ब्रह्मपुरी और ओंकार पर्वत क्षेत्र में प्राचीन घाटों तथा प्राकृतिक चट्टानों को नुकसान पहुंचाने वाले कार्यों की समीक्षा और रोकथाम की मांग की गई है।
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी पहल विकास कार्यों के विरोध में नहीं है। उनका कहना है कि ओंकारेश्वर में सुविधाओं का विस्तार जरूरी है, लेकिन विकास ऐसा हो जिससे श्रद्धालुओं की सुविधाएं बढ़ें और आने वाली पीढ़ियों के लिए तीर्थ की धार्मिक, प्राकृतिक और ऐतिहासिक पहचान भी सुरक्षित रहे।
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