कॉकरोच पार्टी ने दी आंदोलन की चेतावनी: मुख्य चुनाव आयुक्त से 48 घंटे में इस्तीफा मांगा; लगाए ये गंभीर आरोप
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने उन्हें 48 घंटे के भीतर इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया है।
देशभर में आंदोलन की चेतावनी
CJP ने कहा है कि मांग पूरी नहीं होने पर देशभर में आंदोलन किया जाएगा और इसके बाद दिल्ली में प्रदर्शन किया जाएगा। दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाए और SIR के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया।
SIR को लेकर CJP ने उठाए सवाल
अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया के जरिए देश में 13 करोड़ से अधिक मतदाता नाम हटाए गए हैं और इससे लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ रहा है।
यह आंकड़ा The Indian Express की 23 सितंबर की एक जांच रिपोर्ट में भी SIR के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने के संदर्भ में सामने आया है।
हालांकि, नाम हटने का मतलब अपने आप में सभी संबंधित लोगों का मतदान का स्थायी अधिकार खत्म होना नहीं है। अलग-अलग राज्यों में अपील और पुनर्स्थापन की प्रक्रियाएं भी चल रही हैं। उदाहरण के तौर पर पश्चिम बंगाल में हटाए गए मतदाताओं को लेकर लाखों अपीलें दाखिल हुई हैं।
14 बार आपत्ति दर्ज करने की रिपोर्ट
CJP का यह बयान ऐसे समय आया है जब The Indian Express ने 23 सितंबर को चुनाव आयोग के अंदर SIR को लेकर मतभेदों पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी।
रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच आयोग के फैसलों और आदेशों को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की।
रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और चुनावी डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे। इन आपत्तियों की प्रतियां CEC ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं।
रिपोर्ट में दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा कुछ प्रक्रियाओं को लेकर ‘अनधिकृत’ और ‘अवैध’ बताए जाने तथा मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण पर चिंता जताने का भी उल्लेख है।
चुनाव आयोग की ओर से क्या कहा गया?
दूसरी ओर, चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन मतभेदों की अलग व्याख्या की है। सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक आयोग ने कहा कि SIR समेत आयोग के सभी महत्वपूर्ण फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और लिखित टिप्पणियां, सुझाव या अलग-अलग विचार आयोग की आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
इसलिए चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट और आयोग का पक्ष फिलहाल सार्वजनिक बहस का हिस्सा हैं।
CJP ने लगाए कई राजनीतिक आरोप
CJP संस्थापक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा ने क्षेत्रीय दलों की मजबूती को लेकर रणनीति बदली।
उन्होंने महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के विभिन्न नेताओं का उल्लेख करते हुए विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई और चुनावी घटनाक्रमों को एक-दूसरे से जोड़कर सवाल उठाए।
इन दावों के समर्थन में CJP की ओर से कोई ऐसा स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है, जिससे इन घटनाओं के बीच कारणात्मक संबंध स्थापित हो।
अब आगे क्या?
CJP ने 48 घंटे में CEC के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी ने मांग पूरी नहीं होने पर पहले देशभर में आंदोलन और उसके बाद दिल्ली में प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
वहीं, SIR और चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई रिपोर्टों पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं लगातार जारी हैं।
चुनाव आयोग के फैसलों और SIR प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दे अलग-अलग स्तरों पर न्यायिक और प्रशासनिक जांच के दायरे में भी हैं।
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