न चर्चा, न मंथन: राजनीति का अखाड़ा बनी देश की संसद
KHULASA FIRST
संवाददाता

संसद सत्र : जनता के 175 करोड़ हंगामे की भेंट चढ़े; बहस अधूरी, प्रश्नकाल धुला
छात्र व युवा आंदोलन की सफलता से उत्साहित विपक्ष सदन में सरकार को परास्त करना भूला
सड़क पर चलता रहा संग्राम, संसद के दोनों सदन रहे सूने, हर दिन चंद मिनटों में कार्यवाही हुई स्थगित
अमित शाह के जवाब व प्रधानमंत्री की माफी की मांग पर ही अड़ा रहा विपक्ष, चर्चा के हर ऑफर को ठुकराया
संसद की कार्यवाही पर हर मिनट ढाई लाख खर्च होने पर भी नहीं पसीजे पक्ष-विपक्ष, करोड़ों रुपए बर्बाद हुए
बिना सार्थक चर्चा के पास हुए दर्जनभर बिल, महिला आरक्षण व डिमिलिटेशन बिल का पूरे समय होता रहा इंतजार
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट।
पक्ष-विपक्ष के अहम के कारण संसद का मानसून सत्र इस बार पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़ गया। सत्तापक्ष को घेरने में विपक्ष ने ये बिसरा दिया कि सड़क के साथ-साथ सत्तापक्ष को सदन में भी मुद्दे पर बात कर परास्त करना है।
सत्तापक्ष इसी जिद में डटा रहा कि मुद्दों पर बात हम अपने हिसाब से करेंगे। नतीजे में हर दिन कई बार लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सदन स्थगित करना पड़ा। संसद के अंदर से लेकर बाहर तक यही हाल रहा।
इस विरोध और हंगामे की एक बहुत बड़ी कीमत देश के करदाताओं की जेब से निकली है। संसद और सांसदों का कीमती समय न तो जरूरी बहसों और न ही जांच व जवाबदेही के लिए इस्तेमाल हो पाया। मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक 19 बैठकों के लिए तय था।
इस दौरान विपक्ष के हंगामे के बीच ही कुछ कानून तो पास हुए, लेकिन सदन में बार-बार पहुंचाई गई बाधा ने संसदीय कामकाज का समय बर्बाद कर दिया। सबसे बड़ा नुकसान प्रश्नकाल का हुआ। प्रश्नकाल में पक्ष और विपक्ष के सांसद सीधे मंत्रियों से सरकार के कामकाज के बारे में सवाल पूछते हैं, जो इस बार एक मर्तबा भी नहीं हो पाया।
सं सद का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। यह सत्र अपने विधायी कामकाज से ज्यादा राजनीतिक हंगामे और गतिरोध के कारण चर्चा में रहा। दोनों सदनों में लगातार नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन के चलते देश के बहुमूल्य समय और करदाताओं के करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ।
सत्र के दौरान 7,000 से अधिक मिनट का समय सिर्फ हंगामे की भेंट चढ़ गया। बार-बार की रुकावटों के कारण वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर भारी क्षति उठानी पड़ी है। आंकड़ों के मुताबिक सत्र के दौरान संसद की कार्यवाही बाधित होने से लगभग 175 करोड़ रुपए पानी की तरह बह गए। इस भारी-भरकम बर्बादी ने एक बार फिर संसद में सुचारु चर्चा और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विपक्ष के तीखे तेवर और सरकार के साथ चल रहे टकराव के कारण सदन की ‘उत्पादकता’ में भारी गिरावट दर्ज की गई। कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर न तो ढंग से चर्चा हो सकी और न ही प्रश्नकाल सुचारु रूप से चल पाया।
उच्च सदन राज्यसभा और लोकसभा दोनों में ही विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर हंगामे के कारण कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। भारी विरोध के बीच ही कई विधेयकों को बिना चर्चा के पारित कराना पड़ा, जिससे संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना को आघात पहुंचा है।
सत्र के समापन के दौरान भी सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग जारी रही। सरकार की ओर से लगातार यह कहा गया कि विपक्ष बिना किसी ठोस वजह के सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहा है और बाहर आकर सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी कर रहा है।
वहीं विपक्षी दलों ने सरकार पर उनकी मांगों और जरूरी सवालों से बचने का आरोप लगाया। बहरहाल, हंगामे के इस माहौल के बीच लोकतंत्र के मंदिर का इतना बड़ा बजट और समय व्यर्थ होना देश के लिए एक चिंता का विषय बन गया है।
पानी की तरह बह गए 175 करोड़ से ज्यादा
संसद के मानसून सत्र के दौरान हंगामे और लगातार स्थगन के कारण लगभग 7,023 मिनट बर्बाद हुए। संसद के संचालन पर आने वाले पारंपरिक और स्वीकृत अनुमानित खर्च ढाई लाख रुपए प्रति मिनट के हिसाब होता है।
इस नष्ट हुए समय से जनता के 175 करोड़ रुपए से अधिक पानी की तरह बह गए। कुल 7,023 मिनट हंगामे और बार-बार सदन स्थगित होने के कारण बर्बाद हो गए। प्रति मिनट ढाई लाख खर्च के हिसाब से जनता की गाढ़ी कमाई के टैक्स के बर्बाद हो गए।
2.5 लाख प्रति मिनट में संसद भवन, सुरक्षा, वेतन और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं के आधार पर है। सदन में सरकार से सीधे सवाल पूछने और जवाबदेही तय करने वाला ‘प्रश्नकाल’ हंगामे की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। भारी विरोध और गतिरोध के बीच कई विधेयक बिना किसी ठोस और सार्थक चर्चा के जल्दबाजी में पास किए गए।
हंगामे के बावजूद पास हुए 12 अहम बिल
मानसून सत्र में लोकसभा और राज्यसभा से कुल 12 विधेयक पास हुए। भारी हंगामे और विरोध के कारण अधिकांश विधेयक बिना चर्चा के ही पारित कर दिए गए। पास किए गए प्रमुख विधेयकों में प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मींस) अमेंडमेंट बिल, 2026 (पेपर लीक से संबंधित) रजिस्ट्रेशन ऑफ बर्थ्स एंड डेथ्स (अमेंडमेंट) बिल, 2026 सुप्रीम कोर्ट (नंबर ऑफ जजेस) अमेंडमेंट बिल, 2026 एप्रोप्रिएशन (नंबर 3) बिल, 2026 माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज डेवलपमेंट (अमेंडमेंट) बिल, 2026 बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 केरल (अल्टरेशन ऑफ नेम) बिल, 2026 (केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करना) नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2026 ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026 माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल।
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