सिर्फ चेतावनी बोर्ड लगाने से नहीं बुझ पाएगी आग: नगर निगम की लापरवाही… कागजी आदेशों में उलझा महकमा
KHULASA FIRST
संवाददाता

नाकामी छिपाने के लिए जनता और एनजीओ के भरोसे छोड़ी सुरक्षा
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर को अग्नि सुरक्षा के लिहाज से सुरक्षित बनाने के बड़े-बड़े दावे करने वाला नगर निगम प्रशासन अब अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ता हुआ नजर आ रहा है। नगर निगम के आयुक्त क्षितिज सिंघल ने समस्त अपर आयुक्त, विभागीय अधिकारियों, जोनल अधिकारियों, सहायक यंत्रियों, उपयंत्रियों और फायर ऑफिसर के साथ एक ऑनलाइन बैठक की।
इस बैठक में शहर के मॉल, अस्पताल, होटल और कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा की समीक्षा तो की गई, लेकिन जो फैसले लिए गए वे जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं। निगम प्रशासन ने तय किया है कि जिन भवनों में फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं हैं, उनके बाहर चेतावनी बोर्ड लगा दिए जाएंगे। नगर निगम का यह फैसला साफ तौर पर उसकी प्रशासनिक लाचारी का खुलासा करता है। जब अधिकारियों के पास असुरक्षित भवनों को बंद करने के पूरे अधिकार हैं, तो वे सिर्फ बोर्ड लगाकर अपनी जिम्मेदारी क्यों खत्म कर रहे हैं?
नीति पूरी तरह से हास्यास्पद... यह नीति पूरी तरह से हास्यास्पद है। अगर किसी भवन में आग लगती है, तो क्या वहां लगा चेतावनी बोर्ड नागरिकों की जान बचा पाएगा? यह कदम केवल अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाही को छिपाने का जरिया है। कानूनन जिन भवनों में सुरक्षा मानक पूरे नहीं हैं, उन्हें तुरंत सील किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ सख्त कानूनी केस दर्ज होना चाहिए, लेकिन निगम सिर्फ कागजी चेतावनियों के सहारे जनता को खतरे में छोड़ रहा है।
इसके अलावा नगर निगम अब शहर की सुरक्षा जांच का काम खुद करने के बजाय गैर-सरकारी संगठनों एनजीओ और आम जनता के माथे मढ़ रहा है। बैठक में यह योजना बनाई गई है कि एनजीओ के लोग कोचिंग संस्थानों, मॉल और अस्पतालों में जाकर छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को समझाएंगे कि वे खुद प्रबंधन से फायर सेफ्टी की जानकारी मांगें। यह सीधे-सीधे प्रशासनिक तंत्र के निकम्मेपन का खुलासा करता है। जनता टैक्स देती है ताकि सरकारी विभाग और उनके अधिकारी अपनी ड्यूटी पूरी करें। नगर निगम के पास फायर ऑफिसर, इंजीनियरों और जोनल अधिकारियों की भारी-भरकम टीम है, जिनका काम इन भवनों की जांच करना है, लेकिन अपनी ड्यूटी करने के बजाय यह अधिकारी अब आम नागरिकों को भवन मालिकों से उलझने के लिए आगे कर रहे हैं।
पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम जिन भवनों पर पहले सीलिंग की कार्रवाई करने की बात कह रहा है, वहां आज भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं हुए? आयुक्त क्षितिज सिंघल ने निर्देश दिए हैं कि जिन संचालकों ने कार्रवाई के बाद भी फायर सेफ्टी के उपकरण नहीं लगाए हैं, उनके भवनों के बाहर यह लिखकर बोर्ड टांग दिया जाए कि यहां अग्नि सुरक्षा की व्यवस्था नहीं है, कृपया सावधानी बरतें।
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