प्रतिवादी के वकील के नाम जमीन बेचने की पॉवर ऑफ अटार्नी कैसे बन गई: मामला 150 करोड़ की मगरखेड़ा जमीन 9 करोड़ में बेचने का; भ्रष्ट आरक्षक फिरोज खान का भी कनेक्शन
KHULASA FIRST
संवाददाता

वकील रविकांत पंवार के नाम मुख्त्यारनामा, 2023 से अदालत में चल रहा था जमीन का विवाद
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
करीब 150 करोड़ रुपए बाजार मूल्य वाली मगरखेड़ा की 45 बीघा जमीन महज 9 करोड़ रुपए में बेचने के मामले में अब सबसे बड़ा सवाल जमीन के सौदे से पहले तैयार किए गए मुख्त्यारनामा को लेकर खड़ा हो गया है।
मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि जमीन की मालकिन कस्तूरीबाई ने अक्टूबर 2023 में ही इंदौर न्यायालय में परिजनों के खिलाफ घोषणा एवं स्थायी निषेधाज्ञा(स्टे) का वाद दायर किया था। आशंका जताई थी परिजन वृद्धावस्था का फायदा उठाकर जमीन हड़पना चाहते हैं।
खुलासा फर्स्ट की पड़ताल में इस मामले में एक और चौंकाने वाले तथ्य का खुलासा हुआ है। न्यायालयीन प्रकरण में प्रतिवादी क्रमांक 3 और 4 की ओर से रविकांत पंवार को अधिवक्ता नियुक्त किए जाने की जानकारी का खुलासा हुआ है, जबकि बाद में उसी रविकांत पंवार के नाम कस्तूरीबाई की जमीन बेचने के लिए आम मुख्त्यारनामा तैयार कराया गया।
सवाल है जिस जमीन को लेकर अदालत में विवाद चल रहा था, उस प्रकरण के प्रतिवादी रविकांत पंवार को उसी (वादी) जमीन को बेचने का अधिकार कैसे मिला? क्या मुख्त्यारनामा बनवाते समय न्यायालयीन विवाद की जानकारी संबंधित पक्षों को नहीं थी? या मामले में हितों के टकराव की स्थिति थी? इन सवालों की जांच जरूरी है।
अदालत में पहले ही दर्ज करा दी थी जमीन हड़पने की आशंका- न्यायालयीन दस्तावेजों के अनुसार, प्रकरण क्रमांक यूएनसीआईयू/2352/2023 में कस्तूरीबाई पति स्व. बद्रीलाल शर्मा ने 3 अक्टूबर 2023 को इंदौर के व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ खंड के न्यायालय में वाद दायर किया था।
इसमें कैलाश शर्मा, पुखराज उर्फ गज्जू सहित परिवार के सदस्यों और मध्यप्रदेश शासन को प्रतिवादी बनाया गया था। कस्तूरीबाई ने स्पष्ट कहा था मगरखेड़ा और लसूड़िया मोरी स्थित कृषि भूमि उनकी स्वयं की मालिकी और आधिपत्य की है।
उनके जीवनकाल में परिवार के अन्य सदस्यों का इन पर कोई अधिकार नहीं है। यह भी आरोप लगाया था उनके वृद्ध और निरक्षर होने का फायदा उठाकर परिजन जमीन अपने नाम कराने और उसे हड़पने की कोशिश कर रहे हैं।
एक ही दिन रतलाम में तीन पॉवरनामे, तीन अलग-अलग संपत्तियां- सामने आई जानकारी के मुताबिक रतलाम में एक ही दिन तीन अलग-अलग आम मुख्त्यारनामे तैयार कराए गए। इनमें एक रतलाम स्थित मकान, दूसरा इंदौर की लसूड़िया मोरी और तीसरा मगरखेड़ा की जमीन से संबंधित बताया गया है।
इन दस्तावेजों में रविकांत पंवार को अधिकार दिए जाने का मामला जांच के दायरे में है। इस पूरी प्रक्रिया में उज्जैन निवासी प्रकाश की भूमिका भी जांच का विषय बताई जा रही है।
150 करोड़ की जमीन का सौदा 9 करोड़ में - लोकायुक्त इंदौर-उज्जैन हाई-वे स्थित मगरखेड़ा की करीब 45 बीघा जमीन का सौदा भी प्रमुखता से जांच रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस जमीन का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 150 करोड़ रुपए बताया जा रहा है, जबकि इसे श्याम इंफ्रा फर्म को 9 करोड़ रुपए में बेचा गया।
इस रजिस्ट्री में प्रधान आरक्षक फिरोज खान गवाह है। रजिस्ट्री 27 अगस्त 2024 को दर्ज और प्रिंट हुई, जबकि ऑनलाइन रिकॉर्ड में फिरोज खान और रविकांत पंवार की तस्वीरें 10 जुलाई 2024 की दर्ज बताई गई हैं। रजिस्ट्री से 48 दिन पहले तस्वीरें दर्ज होने का कारण जांच का विषय है।
इसके अलावा जमीन के आठ सर्वे नंबरों के मुकाबले रजिस्ट्री में केवल चार के फोटो होने और भुगतान करने वाले बैंक की शाखा का उल्लेख नहीं होने जैसी विसंगतियां भी सामने आई हैं।
14 अक्टूबर से लोकायुक्त की जांच, 11 संपत्तियों का पता- 14 अक्टूबर को लोकायुक्त ने पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ प्रधान आरक्षक फिरोज खान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई की थी।
जांच में कस्तूरीबाई की मगरखेड़ा की 45 बीघा और लसूड़िया मोरी की 7.50 बीघा जमीन को आम मुख्तियारनामे के जरिए बेचने का मामले का खुलासा हुआ था। लसूड़िया मोरी की जमीन स्पार्कवेव फर्म को बेचे जाने की जानकारी है।
इस फर्म में फिरोज खान की पत्नी हीना खान, रविकांत पंवार के पुत्र युवराज और शाकिर खान की साझेदारी बताई गई है। लोकायुक्त की करीब दस दिन से जारी जांच में अब तक फिरोज खान और उससे जुड़े लोगों के नाम लगभग 11 अचल संपत्तियों की जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है।
फर्जी बंटवारे और अंगूठा लगवाने का भी लगाया था आरोप
वाद-पत्र में कस्तूरीबाई ने 22 जनवरी 2022 को रतलाम में एक शपथ-पत्र पर अंगूठा लगवाने का उल्लेख किया था। उनके अनुसार इस दस्तावेज में जमीन दोनों पुत्रों के नाम करने और बेटियों को एक-एक करोड़ रुपए देने जैसी बातें लिखवाई गई थीं, जबकि उन्होंने ऐसा कोई बंटवारा या जमीन हस्तांतरण नहीं किया था।
कस्तूरीबाई ने अदालत से घोषणा और स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की थी, ताकि उनके जीवनकाल में उनकी जमीन पर कोई अन्य व्यक्ति जबरन कब्जा या हस्तक्षेप नहीं कर सके। यानी जमीन को लेकर विवाद और संभावित हस्तांतरण की आशंका अक्टूबर 2023 में ही न्यायालय के सामने आ चुकी थी।
जांच के केंद्र में तीन बड़े सवाल
न्यायालयीन विवाद के बावजूद रजिस्ट्री कैसे हुई? जब कस्तूरीबाई ने 2023 में ही जमीन को लेकर मुकदमा दायर कर दिया था, तो 2024 में उसी जमीन की बिक्री की प्रक्रिया किन तथ्यों के आधार पर पूरी हुई?
वकील और मुख्तार की दोहरी भूमिका कैसे बनी? प्रतिवादी पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले रविकांत पंवार के नाम जमीन बेचने का मुख्त्यारनामा कैसे तैयार हुआ? क्या हितों के टकराव की स्थिति बनी?
पॉवरनामे से भुगतान तक किसकी भूमिका रही? एक ही दिन तीन पॉवरनामे, 48 दिन पहले दर्ज तस्वीरें, आठ सर्वे नंबरों के मुकाबले चार के फोटो और बैंक शाखा का उल्लेख नहीं होना—इन सभी पहलुओं की दस्तावेजों के आधार पर जांच जरूरी है।
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