आटा चक्की चलाते-चलाते प्रॉपर्टी लाइन का बड़ा ब्रोकर बन गया गुड्डा: बंटी नागर ने भी निभाया याराना; दोनों ने जमकर कूटा माल
KHULASA FIRST
संवाददाता

दोस्त की मौत के बाद अब सिर्फ अपना ही सोच रहा डायरी का डॉक्टर
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मदनलाल-छगनलाल ज्वेलस के पारिवारिक सदस्य और शहर के चर्चित रियल एस्टेट कारोबारी बंटी नागर की खुदकुशी के कारणों की जांच पलासिया पुलिस कर रही है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष पर तो नहीं पहुंची, लेकिन इतना जरूर जान पाई है कि उसने व्यावसायिक लेनदेन के दबाव के चलते परेशान होकर जान दी थी। परिजन ने कुछ लोगों के नाम बताते हुए कहा है कि ये लोग घर पर ऑफिस पर पैसों के लिए तकादा करते थे।
इससे चलते बंटी दबाव में रहते थे। उधर, पिछले दिनों जिस डॉयरियों के डॉक्टर गुड्डा उर्फ भूपेश गुप्ता के नाम का खुलासा किया था। वह पहले आटा चक्की चलाता था। करीब सात-आठ साल पहले वह अपने पुराने दोस्त बंटी से जुड़ा और दोनों प्रॉपर्टी लाइन में जमकर माल कुटने लगे। हालांकि, बंटी की मौत के बाद अब गुड्डा सिर्फ अपनी सोचने में लगा है।
उल्लेखनीय है कि 27 सितंबर को रियल एस्टेट कारोबारी बंटी उर्फ संदीप नागर ने खुदकुशी की थी। हालांकि, सुसाइड नोट नहीं छोड़ा था। इसके चलते पुलिस आत्महत्या के कारणों को लेकर उलझी हुई थी। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी बंटी के परिजन पुलिस के सामने आए, लेकिन कानूनी जानकारों के साथ।
उन्होंने 20 से ज्यादा ऐसे बिल्डरों, कॉलोनाइजरों, बुलियन कारोबारियों, ब्याजखोरों और प्रॉपर्टी ब्रोकरों के नाम बताएं जिनका बंटी से व्यावसायिक लेनदेन था। वहीं, बंटी नागर से डायरियों पर लंबा माल लेने वाले गुड्डा उर्फ भूपेश गुप्ता के नाम का खुलासा फर्स्ट ने पिछले दिनों खुलासा किया था। पता चला है कि गुड्डा की बंटी के ऑफिस में लंबी बैठक थी। कभी बियाबानी क्षेत्र में आटा चक्की चलाता था।
हालांकि, उसकी दोस्ती बंटी से उस समय से थी, जब बंटी भी प्रॉपर्टी लाइन में नहीं कूदा था। बंटी के प्रॉपर्टी लाइन में कदम रखने के बाद जैसे-जैसे उसके प्रोजेक्ट सफल होते गए, गुड्डा भी इसी क्षेत्र में कूद गया।
शुरुआत में बंटी खुद भूमाफिया चंपू अजमेरा जैसे कॉलोनाइजरों के ऑफिस पर बैठता और उनसे माल खरीदता था। बाद में गुड्डा इस माल को बाजार में बेचता था। दोनों का काम ऐसा जमा कि उन्होंने जमकर माल कूटा।
हालांकि, गुड्डा हमेशा ही ब्रोकर की भूमिका में रहा और धीरे-धीरे बड़ा ब्रोकर बन गया।
बंटी के लगभग हर दूसरे प्रोजेक्ट में गुड्डा शामिल रहा और डायरियों पर माल बेचा। राजेंद्र नगर क्षेत्र में सोसायटी का माल तो एरोड्रम क्षेत्र में भी उसने बहुत काम किया। ये इकट्ठा पैसा लेकर बंटी के पास कम भाव में ज्यादा माल उठाता था और बाद में अपने हिसाब से बेचता था।
कल पलासिया पुलिस ने बंटी के ऑफिस में कार्यरत स्तुति, भवानी, बालकिशन, अकाउंटेंट मनीष, उमेश, नितेश और गोपाल के पुन: बयान लिए। इनमें से कुछ के बयान दोबारा हुए हैं। हालांकि, किसी ने भी बंटी की मौत के लिए सीधे तौर पर किसी बिल्डर या ब्याजखोर का नाम नहीं लिया है।
हालांकि, कर्मचारियों ने नियमित रूप से ऑफिस आने-जाने वालों के बारे में जानकारी दी। बताया कि रुपयों के लेनदेन में अशोक उर्फ बबलू भाटिया का सबसे ज्यादा आना-जाना था।
वहीं, गुड्डा उर्फ भूपेश गुप्ता की भी ऑफिस में लंबी बैठक थी। उन्होंने यह भी बताया कि बंटी के दबाव के कारण ऑफिस में कम आने लगे थे। इसके चलते कुछ लोग वसूली के लिए उनके घर तक जाने लगे थे।
इसकी पुष्टि सीसीटीवी फुटेज से भी हुई है। उधर, परिजन ने मांगे जाने पर लेनदेन से संबंधित दस्तावेज जल्द ही पेश करने की बात कहते हुए समय मांगा है।
डीएसपी और पटवारी की भूमिका- बताते हैं बंटी नागर पुलिस अफसरों का रुपया भी चलाता था। एक डीएसपी के 50 लाख रुपए से ज्यादा डूबे हैं। इसकी पुष्टि बंटी की काॅल डिटेल और चैटिंग से हुई है।
अफसर ने बंटी से मुरादपुरा में डायरी पर खरीदी की थी। एक पटवारी भी बंटी के संपर्क में था। उसकी चैटिंग और काॅल डिटेल मिली है। बाल्याखेड़ी (बायपास) के प्रोजेक्ट में भी उसकी भूमिका जांची जा रही है।
इसके अलावा भानगढ़ और प्लेटिनम (बायपास) के लेनदेन भी जांच में शामिल किए गए हैं। अब पुलिस फाइनेंसर बबलू उर्फ अशोक भाटिया, सन्नी, श्याम खत्री, विक्की रघुवंशी, अजय, संजय, गोपाल, पंकज, भटेजा, रितेश लुंक्कड़, राजेश लालवानी और कुछ प्रशासनिक अफसरों की भूमिका भी तलाश रही है। इनसे लेनदेन की जानकारी पुलिस को मिली है।
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