ऑरिका ग्रीन्स की बाउंड्रीवॉल और निर्माण रोकने की मांग: ग्राम कवटी के खसरा 111-112 को लेकर एसडीएम-तहसीलदार से शिकायत
KHULASA FIRST
संवाददाता

विनायक इंटरप्राइजेस का नामांतरण निरस्त करने, निर्माण हटाने और बिल्डर के खिलाफ एफआईआर की मांग
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
महू तहसील के ग्राम कवटी में शासकीय चरनोई जमीन को निजी टाउनशिप में शामिल कर निर्माण किए जाने के आरोपों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब ग्राम कवटी के खसरा नंबर 111 और 112 को लेकर एसडीएम और तहसीलदार के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर ऑरिका ग्रीन्स टाउनशिप की बाउंड्रीवॉल और अन्य निर्माण कार्य तत्काल रुकवाने, अतिक्रमण हटाने तथा जमीन के नामांतरण की जांच कर उन्हें निरस्त करने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि संबंधित जमीन पुराने मिसल बंदोबस्त रिकॉर्ड में शासकीय चरनोई के रूप में दर्ज रही है, इसके बावजूद इसे निजी भूमि बताकर टाउनशिप में शामिल किया जा रहा है।
यदि राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय दर्ज भूमि पर निजी निर्माण की पुष्टि होती है, तो यह सरकारी संपत्ति के संरक्षण और आम ग्रामीणों के सार्वजनिक उपयोग के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला होगा।
1925-26 के रिकॉर्ड का हवाला, वर्तमान खसरे की जांच की मांग: शिकायत में कहा गया है कि ये जमीन वर्ष 1925-26 के मिसल बंदोबस्त में शासकीय चरनोई मद में दर्ज थी। शिकायतकर्ताओं ने वर्ष 1960 के राजस्व रिकॉर्ड का उल्लेख करते हुए जमीन की प्रविष्टियों और स्वामित्व की स्थिति की जांच कराने की मांग की है।
आवेदन के अनुसार संबंधित जमीन का उपयोग ग्रामीणों के सार्वजनिक हित और निस्तार से जुड़ा रहा है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि शासकीय दर्ज भूमि को निजी संपत्ति बताकर श्री विनायक इंटरप्राइजेस और उससे जुड़े लोगों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराया गया। अब इसी भूमि को ऑरिका ग्रीन्स टाउनशिप के हिस्से के रूप में विकसित किए जाने पर आपत्ति जताई गई है।
हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और मूल राजस्व अभिलेखों का परीक्षण होना बाकी है। जमीन की वर्तमान स्थिति, स्वामित्व की वैधानिकता तथा नामांतरण के आधार का निर्णय संबंधित दस्तावेजों और सक्षम प्राधिकारी की जांच से ही स्पष्ट होगा।
गुरमीत भाटिया, राजीव श्रीवास्तव और डेवलपर पर हो कार्रवाई
शिकायत में गुरमीत भाटिया, राजीव श्रीवास्तव और वीआर डेवलपर्स से जुड़े ऑरिका ग्रीन्स टाउनशिप प्रबंधन का उल्लेख किया गया है। आवेदक ने आरोप लगाया है कि शासकीय चरनोई भूमि को परियोजना में शामिल कर बाउंड्रीवॉल, गेट और पक्के निर्माण किए जा रहे हैं।
आवेदन में निर्माण कार्य तत्काल बंद कराने के लिए राजस्व और पुलिस बल भेजने की मांग की गई है। साथ ही मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 248 के तहत अतिक्रमण संबंधी कार्रवाई शुरू करने, अवैध निर्माण हटाने और कथित अनियमितताओं में शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की मांग भी की गई है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि जमीन वास्तव में शासकीय चरनोई है, तो उस पर निजी परियोजना का विस्तार रोकना और सरकारी भूमि को सुरक्षित रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
आवेदन में उठाए सवाल
ग्राम कवटी निवासी आरिफ पटेल की ओर से दिए गए आवेदन में भी संबंधित जमीन के पुराने राजस्व रिकॉर्ड और नामांतरण पर सवाल उठाए गए हैं। इसमें बताया गया कि शासकीय चरनोई के रूप में दर्ज भूमि को निजी बताकर श्री विनायक इंटरप्राइजेस के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराया गया।
आवेदक ने पुराने मिसल बंदोबस्त और बाद के राजस्व रिकॉर्ड की तुलना कर जांच कराने, नामांतरण की वैधानिकता की समीक्षा करने तथा यदि प्रक्रिया में अनियमितता पाई जाए तो संबंधित प्रविष्टियों और दस्तावेजों को निरस्त करने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
शिकायतकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के जगपाल सिंह बनाम पंजाब राज्य मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि सार्वजनिक उपयोग और चरागाह की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त रखने के सिद्धांतों के अनुरूप कार्रवाई की जानी चाहिए।
उनकी मांग है कि जब तक जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधानिकता की जांच पूरी नहीं होती, तब तक विवादित हिस्से पर निर्माण रोकने के लिए नियमानुसार अंतरिम कार्रवाई की जाए। इसके बाद जांच में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा या निर्माण प्रमाणित होने पर बेदखली और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाए।
प्रशासन के सामने अब ये सवाल
क्या खसरा नंबर 111 और 112 की वर्तमान प्रविष्टियां शासकीय मद में हैं?
यदि जमीन पहले चरनोई दर्ज थी, तो बाद में निजी स्वामित्व और नामांतरण का आधार क्या रहा?
क्या ऑरिका ग्रीन्स टाउनशिप की सीमा में शामिल भूमि का सर्वे और सीमांकन कराया गया है?
क्या संबंधित निर्माण और टाउनशिप विकास के लिए आवश्यक अनुमतियां प्राप्त हैं?
शिकायत के आधार पर प्रशासन निर्माण रोकने, रिकॉर्ड की जांच करने और दोष प्रमाणित होने पर कार्रवाई करने के लिए क्या कदम उठाता है?
खुलासा फर्स्ट का सवाल
ग्राम कवटी की विवादित जमीन का पूरा राजस्व रिकॉर्ड सार्वजनिक परीक्षण के दायरे में लाकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। यदि जमीन शासकीय चरनोई साबित होती है, तो उसके निजी उपयोग और निर्माण पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं यदि निजी स्वामित्व के वैध दस्तावेज मौजूद हैं, तो प्रशासन को उनका आधार भी स्पष्ट करना चाहिए। फिलहाल शिकायतकर्ताओं की मांग पर प्रशासन की कार्रवाई और जमीन के वास्तविक वैधानिक दर्जे का खुलासा होना बाकी है।
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