करोड़पति हेड कांस्टेबल बेनकाब: लोकायुक्त इंदौर-उज्जैन पुलिस की छापेमारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

75 लाख की आय, संपत्ति मिली 6.26 करोड़ की
आय से 223 प्रतिशत ज्यादा संपत्ति का खुलासा, पत्नी-मां और परिचित महिला के नाम मिली संपत्तियां
इंदौर-देवास में सर्चिंग, जमीनों, दस्तावेज और फर्मों के लेनदेन खंगाल रही 25 लोगों की 8 टीमें
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (पीटीसी), इंदौर में प्रधान आरक्षक (चालक) के पद पर तैनात फिरोज खान की नौकरी पुलिस की गाड़ी चलाने की है, लेकिन वह करोड़ों की संपत्ति का मालिक निकला।
इसका खुलासा तब हुआ, जब लोकायुक्त ने जांच की। शिकायत सही पाए जाने पर आज सुबह फिरोज खान के इंदौर-देवास के एक साथ 15 ठिकानों पर सर्चिंग शुरू की गई। वेतन से अनुमानित 75 लाख रुपए की कमाई और दूसरी आय मिलाकर कुल 1.93 करोड़ की आय का आकलन किया गया, जबकि जांच में करीब 6.26 करोड़ की अनुपातहीन संपत्ति सामने आई है, जो आय से करीब 223 प्रतिशत अधिक है।
मामला सिर्फ एक पुलिसकर्मी की संपत्ति की जांच तक सीमित नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि पीटीसी जैसे संस्थान में तैनात महज एक प्रधान आरक्षक को भ्रष्टाचार के इतने मौके कैसे मिले? ऐसे में शंका लाजिमी है कि कहीं न कहीं उस पर कोई तो ऐसा अफसर होगा, जिसने उससे भी कई गुना भ्रष्टाचार कर करोड़ों कमाए होंगे।
विवादित जमीनों और प्लॉटों के मामलों में करता है हस्तक्षेप...लोकायुक्त एसपी डॉ. राजेश सहाय को एक शिकायत मिली थी। आरोप था कि पीटीसी इंदौर का हेड कांस्टेबल फिरोज खान पुलिस विभाग का प्रभाव बताकर देवास क्षेत्र में विवादित जमीनों और प्लॉटों के मामलों में हस्तक्षेप करता है।
यह भी आरोप था कि वह दूसरे लोगों के माध्यम से जमीनों के लेनदेन में शामिल था और लकड़ी का कारोबार भी करता था। पत्नी, मां और परिचित महिला के नाम संपत्तियां खरीदने के साथ कई वाहन रखने की बात भी शिकायत में कही गई थी।
एसपी डॉ. सहाय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएसपी सुनील तालान से जांच कराई तो कई संपत्तियों का पता चला। योजनानुसार लोकायुक्त की इंदौर-उज्जैन की टीमों ने देवास में 11 और इंदौर में चार स्थानों पर एक साथ दबिश दी।
इनमें देवास का आदर्श नगर स्थित फिरोज खान का निवास, इंदौर के बाणगंगा क्षेत्र में रोशनी वर्मा का मकान, स्कीम 94 स्थित मनोरमा अपार्टमेंट के दो फ्लैट और श्रीनगर कॉलोनी का श्रीदेवी अपार्टमेंट शामिल हैं। इसके साथ देवास की पुष्पकुंज कॉलोनी, विजय नगर व इंदिरा गांधी नगर के प्लॉट-मकान तथा देवास जिले की कृषि भूमि भी जांच के दायरे में है।
छापेमारी में हुई प्राथमिक जांच के अनुसार, फिरोज खान की वेतन से अनुमानित आय 75 लाख आंकी गई, जबकि अन्य आय जोड़कर कुल आय 1,93,84,440 रुपए सामने आई। इसके मुकाबले करीब 6,26,67,879 की अनुपातहीन संपत्ति का आकलन किया गया है।
लोकायुक्त एसपी के मुताबिक यह संपत्ति आय से 223 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, सर्च के बाद दस्तावेजों के सत्यापन व आय-व्यय के अंतिम आकलन से ही स्पष्ट होगा कि कितनी संपत्ति वास्तव में अनुपातहीन है।
मां-पत्नी की फर्म, परिचित महिला के नाम जमीन- जांच में फिरोज खान की मां और पत्नी के नाम साहिल ट्रेडिंग कंपनी सामने आने की बात कही गई है। इसके बैंक खाते में करोड़ों के लेनदेन की जानकारी मिली है।
वहीं, रोशनी वर्मा के नाम से रोशनी सेल्स एंड सर्विस फर्म संचालन की बात भी शुरुआती जांच में सामने आई। लोकायुक्त का आरोप है कि रोशनी वर्मा की भूमिका जमीन खरीदने के सौदों में पाई गई, जिस पर उन्हें भी आरोपी बनाया गया है।
मामले में गुरान, तहसील सांवेर की करीब 21.75 बीघा कृषि भूमि का सौदा खास तौर पर जांच के केंद्र में है। शिकायतकर्ता और उसके पिता मेंजमीन को लेकर विवाद था। इसी विवाद बीच फिरोज खान ने अपनी परिचित रोशनी वर्मा के नाम से शिकायतकर्ता के पिता के साथ कृषि भूमि का पंजीकृत एग्रीमेंट कराया।
लोकायुक्त की शुरुआती जांच में इस जमीन की खरीद के पीछे फिरोज खान की कथित भूमिका सामने आने की बात कही गई है। इसके अलावा, रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट नामक फर्म के माध्यम से निवेश किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। अब सवाल यह है कि इन फर्मों में पूंजी कहां से आई, लेनदेन किन लोगों से हुआ और संपत्तियों की वास्तविक खरीद किसके धन से की गई।
प्रशिक्षण महाविद्यालय में तैनाती, बाहर जमीनों का खेल?
सांवेर तहसील के ग्राम गुरान में कई सर्वे नंबरों की जमीन, देवास बायपास के पास व्यावसायिक भूखंड और जेतपुरा व गद्दूखेड़ी की कृषि भूमि पर भी लोकायुक्त की टीम जानकारी जुटा रही है।
देवास के राधागंज में फिरोज खान के चालक नफीस खान के आवास पर भी सर्च की जा रही है। इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू फिरोज खान की पदस्थापना है। वह पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में प्रधान आरक्षक चालक है।
शिकायत में उसके लगातार अनुपस्थित रहने और पुलिस विभाग में पदस्थ होने का प्रभाव दिखाकर जमीन संबंधी विवादों में हस्तक्षेप करने के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विभागीय रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।
अब दस्तावेज बताएंगे संपत्ति का असली हिसाब
बताते हैं पूरी कार्रवाई लोकायुक्त एसपी डॉ. सहाय के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई की गई। देवास में डीएसपी सुनील तालान और दीपक सेजवार के नेतृत्व में टीमों ने मोर्चा संभाला, जबकि इंदौर में डीएसपी आनंद चौहान और दिनेशचंद्र पटेल सहित अन्य अधिकारी जांच में जुटे थे।
सर्च के दौरान संपत्तियों के दस्तावेज, कारोबारी रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और अन्य वित्तीय साक्ष्यों की पड़ताल निर्णायक होगी। फिलहाल लोकायुक्त की शुरुआती जांच में करोड़ों की कथित अनुपातहीन संपत्ति का मामला सामने आया है।
अब असली परीक्षा इस बात की है कि 15 ठिकानों से मिले दस्तावेज संपत्ति के इस पहाड़ का स्रोत खोलते हैं या जांच में कुछ संपत्तियों के वैध स्रोत भी सामने आते हैं। यही पड़ताल तय करेगी कि खाकी की नौकरी और निजी कारोबार के बीच की सीमा कहीं कथित भ्रष्टाचार के आरोपों में तो नहीं उलझ गई।
ये सवाल भी खड़े हैं सीना ताने
यहां एक बुनियादी सवाल भी उठता है, क्या चालक पद पर तैनात कर्मचारी की संपत्ति और कारोबार पर विभागीय स्तर पर कभी निगरानी हुई? क्या उसकी अनुपस्थिति, आय के मुकाबले संपत्ति में कथित बढ़ोतरी और कारोबार से जुड़े संकेतों की जांच पहले हो सकती थी?
या निजी कारोबार की आड़ में संपत्ति जुटाने का कथित सिलसिला लंबे समय तक नजरों से दूर रहा? इन सवालों का जवाब केवल लोकायुक्त की सर्च से नहीं, बल्कि पुलिस विभाग के सेवा रिकॉर्ड, छुट्टी और उपस्थिति के ब्योरे, संपत्ति संबंधी घोषणाओं, आयकर विवरणियों और संबंधित बैंक खातों की जांच से मिल सकता है। यह भी स्पष्ट करना होगा कि कथित जमीन सौदों में पुलिस पद का कोई अनुचित इस्तेमाल हुआ या नहीं।
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