करोड़ों की लागत से बना सिविल अस्पताल: फिर भी सुविधाओं को मोहताज मरीज; सोनोग्राफी मशीन खराब, आईसीयू भी नहीं
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के नंदानगर में करीब 8.66 करोड़ रुपए की लागत से तैयार सिविल अस्पताल की चार मंजिला इमारत फरवरी 2026 में शुरू कर दी गई, लेकिन अस्पताल शुरू होने के बाद भी मरीजों को पूरी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कई स्तरों पर कमियां सामने आ रही
पहले यहां प्रसूति गृह संचालित होता था। नई बिल्डिंग में सुविधाओं का विस्तार किया गया है, लेकिन स्टाफ से लेकर जांच और गंभीर मरीजों के उपचार तक कई स्तरों पर कमियां सामने आ रही हैं।
स्वीकृत पदों के मुकाबले 19 पद खाली
स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी स्थिति को परखने के लिए किए गए निरीक्षण में सामने आया कि 50 बेड के इस अस्पताल में स्वीकृत पदों के मुकाबले अभी 19 पद खाली हैं। वहीं, कई जरूरी जांच सुविधाएं या तो बंद हैं या पूरी तरह शुरू नहीं हो पाई हैं। इसका सीधा असर मरीजों और खासकर गर्भवती महिलाओं के उपचार पर पड़ रहा है।
स्वीकृत 61 पद, नियुक्ति सिर्फ 42 पर
सिविल अस्पताल की गाइडलाइन के अनुसार यहां 61 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 42 पदों पर नियुक्तियां हैं। अस्पताल की ओपीडी का समय सुबह 9 से दोपहर 2 बजे और शाम 5 से 6 बजे तक निर्धारित है।
समय पर शुरू नहीं हुई ओपीडी
निरीक्षण के दौरान सुबह 10 बजे तक ओपीडी शुरू नहीं हुई थी। हाल ही में अस्पताल में एक नेत्र रोग विशेषज्ञ और एक स्त्रीरोग विशेषज्ञ की नियुक्ति हुई है। इसके बावजूद एमडी मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक और ईएनटी विशेषज्ञ की जरूरत बनी हुई है।
रोज 100 गर्भवतियां, खराब सोनोग्राफी मशीन से परेशानी
अस्पताल में प्रतिदिन करीब 100 गर्भवती महिलाएं जांच और इलाज के लिए पहुंचती हैं। इनमें लगभग 15 महिलाओं को सोनोग्राफी की जरूरत पड़ती है। लेकिन अस्पताल में उपलब्ध सोनोग्राफी मशीन खराब होने के कारण इन मरीजों को अन्य सरकारी अस्पतालों में भेजना पड़ रहा है।
आईसीयू की सुविधा उपलब्ध नहीं
अस्पताल में प्रसव की सुविधा उपलब्ध है और जरूरत पड़ने पर सीजर भी किया जाता है। लेकिन गंभीर स्थिति में मरीजों के लिए आईसीयू की सुविधा उपलब्ध नहीं है। कुछ मरीजों ने भी शिकायत की कि गंभीर स्थिति आने पर उन्हें इलाज के बजाय दूसरे अस्पताल रेफर करने की सलाह दी जाती है।
एक्स-रे मशीन पहुंची, लेकिन मरीजों को अभी फायदा नहीं
अस्पताल में एक्स-रे के लिए सीआर मशीन पहुंच चुकी है। करीब एक महीने पहले रेडियोग्राफर की नियुक्ति भी कर दी गई है, लेकिन मशीन का इंस्टॉलेशन अभी बाकी है।
इसके कारण मरीजों को फिलहाल इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। लैब भी शुरू की जा चुकी है, लेकिन यहां प्लेटफॉर्म तैयार होने का काम बाकी है।
यानी अस्पताल में मशीन और कर्मचारी होने के बावजूद कुछ व्यवस्थाएं पूरी तरह ऑपरेशनल नहीं हो पाई हैं।
चार मंजिला अस्पताल में सिर्फ एक लिफ्ट, रैंप भी नहीं
करीब साढ़े आठ करोड़ रुपए की लागत से बनी चार मंजिला बिल्डिंग में मरीजों की आवाजाही के लिए सिर्फ एक लिफ्ट है।
इमरजेंसी की स्थिति में मरीजों को आसानी से बाहर निकालने के लिए रैंप की सुविधा भी नहीं है। निर्माण की गुणवत्ता से जुड़े सवाल भी शुरुआती दौर में सामने आने लगे हैं।
अस्पताल के बेसमेंट में जमीन से पानी ऊपर आने की समस्या बताई गई है। ऐसे में नई बिल्डिंग के निर्माण और ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
अस्पताल प्रबंधन बोला- जल्द दूर करेंगे कमियां
नंदानगर सिविल अस्पताल की प्रभारी डॉ. रूपाली जोशी का कहना है कि अस्पताल में सभी जरूरी सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
उनका कहना है कि जो कमियां अभी दिखाई दे रही हैं, उन्हें दूर किया जा रहा है और आने वाले समय में यह मिल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण अस्पताल साबित होगा।
अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार किए गए अस्पताल में मरीजों को पूरी सुविधाओं का लाभ कब तक मिल पाएगा?
खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए सोनोग्राफी, गंभीर मरीजों के लिए आपातकालीन व्यवस्था और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करना अस्पताल प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौती है।
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