बिल्डर ने खरीदी 100 करोड़ से ज्यादा की जमीन: वक्फ बोर्ड ने एफआईआर के लिए भेजी शिकायत; इतने हेक्टेयर भूमि मामला, नामांतरण पर कलेक्टर ने लगाई रोक
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, देवास/इंदौर।
देवास जिले के बिलावली गांव में वक्फ संपत्ति बताई जा रही करोड़ों रुपए की जमीन की खरीद-फरोख्त का मामले का खुलासा हुआ है। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड ने जमीन की बिक्री को लेकर उज्जैन संभागायुक्त, देवास कलेक्टर और एसपी को दस्तावेजों के साथ शिकायत भेजकर FIR दर्ज कराने की मांग की है। शिकायत के बाद देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने फिलहाल जमीन के नामांतरण पर रोक लगा दी है।
मामला देवास तहसील के बिलावली गांव स्थित सर्वे नंबर 203 की करीब पांच हेक्टेयर जमीन से जुड़ा है। जमीन की बाजार कीमत 100 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है।
वक्फ बोर्ड के सदस्य मनोज मालपानी ने संबंधित अधिकारियों को शिकायत भेजकर पूरे मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
इंदौर की एवी इन्फ्रा ने खरीदी जमीन
रिकॉर्ड के मुताबिक, जमीन की रजिस्ट्री 29 अगस्त 2025 को देवास में हुई थी। इसमें इंदौर की एवी इन्फ्रा कंपनी के आशीष खंडेलवाल और अनुत्तम भट्ट के नाम खरीदार के तौर पर दर्ज हैं।
जमीन बेचने वाले इनाम खिदमत इरफान अहमद पिता काजी हकीम निसार अहमद ने इसे अपनी निजी पैतृक संपत्ति बताया था। दूसरी ओर, वक्फ बोर्ड का दावा है कि यह जमीन वक्फ संपत्ति है और इसकी बिक्री को लेकर गंभीर सवाल हैं।
5.65 करोड़ रुपए में सौदा, 12 साल में भुगतान का दावा
रजिस्ट्री दस्तावेजों के अनुसार, जमीन का सौदा 5 करोड़ 65 लाख रुपए में हुआ। दस्तावेजों में भुगतान करीब 12 साल की अवधि में अलग-अलग चेक के जरिए किए जाने का उल्लेख है।
रिकॉर्ड के मुताबिक, पहला चेक दिसंबर 2014 में 15 लाख रुपए का जारी किया गया था। इसके बाद 2015 से जनवरी 2025 तक अलग-अलग तारीखों में कुल 21 चेक के जरिए भुगतान किए जाने की बात सामने आई है।
यानी भुगतान का सिलसिला रजिस्ट्री से काफी पहले शुरू हो गया था और करीब 12 साल बाद अगस्त 2025 में जमीन की रजिस्ट्री कराई गई।
नामांतरण पर कलेक्टर ने लगाई रोक
मामला सामने आने के बाद जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है। देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह के मुताबिक, यह जमीन पहले देवास विकास प्राधिकरण की एक योजना में शामिल थी। बाद में योजना समाप्त हो गई और इसके बाद संबंधित व्यक्ति द्वारा जमीन बेचने की जानकारी सामने आई।
कलेक्टर के अनुसार, जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद अदालत में भी चल रहा है। ऐसे में कोर्ट की स्थिति स्पष्ट होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नामांतरण को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे थे खरीदार
जमीन का नामांतरण नहीं होने के बाद एवी इन्फ्रा और अनुत्तम भट्ट ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें देवास कलेक्टर, तहसीलदार समेत अन्य अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया था।
मामले में शासन की ओर से अधिवक्ता प्रद्युम्न मालपानी और शरद यादव ने पक्ष रखा। हालांकि, बाद में याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस लेने का अनुरोध किया। इसके बाद जस्टिस संदीप एन. भट्ट ने याचिका खारिज कर दी।
वक्फ बोर्ड ने क्यों उठाया सवाल?
मध्यप्रदेश में नए वक्फ बोर्ड के गठन के बाद बोर्ड ने वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामलों की जांच और कार्रवाई तेज करने की बात कही है। जुलाई 2026 में गठित नए बोर्ड में इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के अनिमेष भार्गव समेत 10 सदस्य शामिल किए गए हैं।
इसी अभियान के तहत देवास की इस जमीन को लेकर बोर्ड ने अधिकारियों को शिकायत भेजी है। अब जांच का अहम बिंदु यह है कि सर्वे नंबर 203 की जमीन की वास्तविक कानूनी स्थिति क्या है और क्या इसे वक्फ संपत्ति होने के बावजूद बेचा गया।
अब FIR और जमीन के स्वामित्व पर फैसला अहम
फिलहाल जमीन के नामांतरण पर रोक है और स्वामित्व को लेकर विवाद अदालत में बताया गया है। वक्फ बोर्ड ने FIR की मांग की है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच और दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
अब जांच में जमीन के पुराने राजस्व रिकॉर्ड, वक्फ रिकॉर्ड, रजिस्ट्री दस्तावेज और भुगतान से जुड़े कागजात अहम होंगे। इनके आधार पर यह तय होगा कि जमीन की बिक्री वैध थी या नहीं व मामले में आगे किन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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