कैश केस में इन जस्टिस पर लगे तीनों आरोप साबित: जांच समिति ने कहा-सबूतों से छेड़छाड़ हुई; सरकारी आवास के स्टोररूम में मिले थे नोटों के बंडल और अधजली नकदी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के मामले में संसद की जांच समिति ने उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को सही पाया है। समिति की रिपोर्ट बुधवार, 12 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा में पेश की गई।
यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था, जब जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम में आग लगने के बाद वहां 500 रुपए के नोटों के बंडल और अधजली नकदी मिलने की बात सामने आई थी।
जांच समिति के मुताबिक, जस्टिस वर्मा यह संतोषजनक ढंग से नहीं बता सके कि नकदी वहां कहां से आई, उसका मालिक कौन था और वह स्टोररूम में कैसे पहुंची। जस्टिस वर्मा ने अप्रैल 2025 में हाई कोर्ट के न्यायाधीश पद से इस्तीफा दे दिया था।
आरोप-1: सरकारी आवास में बड़ी मात्रा में बेहिसाब नकदी मिली...
जांच समिति ने पाया कि जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम में 500 रुपए के नोटों के बंडल और जले हुए नोट मिले थे।
समिति के सामने गवाही देने वाले फायर सर्विस और पुलिसकर्मियों ने बताया कि नकदी सिर्फ एक स्थान पर नहीं थी, बल्कि स्टोररूम के बड़े हिस्से में दिखाई दे रही थी।
दिल्ली फायर सर्विस के कर्मचारी अंकित सहगल ने बताया कि उसने 500 रुपए के नोटों के बंडल देखे थे, जो स्टोररूम में करीब 7-8 फीट तक फैले हुए थे।
पुलिस अधिकारी रूपचंद से जब नकदी की संभावित मात्रा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 5 लाख रुपए का आंकड़ा भी बहुत कम लगता है।
हालांकि, जांच के दौरान नकदी को जब्त नहीं किया गया। न उसकी गिनती हुई और न ही नोटों के नमूने सुरक्षित किए गए। इसलिए समिति यह निश्चित नहीं कर सकी कि स्टोररूम में वास्तव में कितनी नकदी मौजूद थी।
समिति का निष्कर्ष: आरोप साबित।
आरोप-2: आग के बाद सबूतों से छेड़छाड़ हुई...
समिति ने पाया कि आग लगने और बुझने के बाद स्टोररूम को तत्काल सील नहीं किया गया था।रिपोर्ट के अनुसार, एक सुरक्षा अधिकारी ने जस्टिस वर्मा के स्टाफ को रात करीब 3 बजे स्टोररूम की सफाई करते हुए देखा। सुबह तक जला हुआ सामान बाहर निकाल दिया गया और कमरे को साफ कर दिया गया।
समिति के मुताबिक, वहां मिले नोटों को भी सुरक्षित नहीं किया गया और बाद में वे बरामद नहीं हुए। इससे जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट होने या उनसे छेड़छाड़ की आशंका बनी।
समिति का निष्कर्ष: आरोप साबित।
आरोप-3: जस्टिस वर्मा की सफाई को बताया भ्रामक
समिति ने जस्टिस वर्मा के जवाबों को भी जांच के दायरे में रखा। शुरुआत में उन्होंने कहा कि उन्हें स्टोररूम में मौजूद नकदी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
बाद में उन्होंने नकदी के नकली होने या साजिश के तहत वहां रखे जाने की संभावना जताई। हालांकि, समिति के मुताबिक इन दावों के समर्थन में कोई FIR, शिकायत या अन्य ठोस सबूत पेश नहीं किया गया।
जस्टिस वर्मा ने खुद समिति के सामने गवाही नहीं दी। उनके परिवार या स्टाफ की ओर से भी ऐसे गवाह पेश नहीं किए गए, जो नकदी से जुड़े उनके दावों की पुष्टि कर सकें।
समिति ने उनकी सफाई को अपूर्ण, टालमटोल वाली और प्रभाव में भ्रामक माना।
समिति का निष्कर्ष: आरोप साबित।
अब आगे क्या?
संसदीय जांच समिति की रिपोर्ट में तीनों आरोपों को सही पाए जाने के बाद मामला अब आगे की संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।
रिपोर्ट में नकदी की वास्तविक मात्रा निर्धारित नहीं हो पाने की वजह भी जांच के दौरान साक्ष्यों को सुरक्षित नहीं किए जाने को बताया गया है।
यानी जांच समिति के मुताबिक मामला सिर्फ सरकारी आवास में नकदी मिलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आग के बाद सबूतों को सुरक्षित न रखने और जस्टिस वर्मा की सफाई को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए।
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