सीएम की घोषणा के बाद भी नहीं टूटी चुप्पी: 33 साल से इंतजार कर रहे हजारों प्लॉटधारकों का फूटा गुस्सा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) की स्कीम-171 से मुक्ति की मांग को लेकर 33 वर्षों से इंतजार कर रहे हजारों प्लॉटधारकों का धैर्य अब जवाब देने लगा है।
सांकेतिक विरोध रैली निकाली
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में इंदौर प्रवास के दौरान मंच से स्कीम की बाधाएं दूर करने का आश्वासन दिया था, लेकिन एक माह बीतने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस पहल नजर नहीं आई। इससे नाराज पीड़ितों ने रविवार को सांकेतिक विरोध रैली निकालकर प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शासन के सामने अपनी मांगें रखीं।
19 महीने पहले जमा कराए 5.84 करोड़ रुपए, फिर भी नहीं मिली राहत
पीड़ित प्लॉटधारकों का कहना है कि स्कीम-171 को समाप्त कराने की प्रक्रिया के तहत करीब 19 माह पहले ही 5 करोड़ 84 लाख रुपए की राशि जमा कराई जा चुकी है। यह राशि दिसंबर 2024 तक पूरी जमा हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद स्कीम को समाप्त (लैप्स) नहीं किया गया।
इस योजना से 13 सहकारी संस्थाओं के छह हजार से अधिक प्लॉटधारक और करीब 200 निजी भू-स्वामी प्रभावित हैं, जो वर्षों से अपने भूखंडों पर निर्माण और कब्जे का इंतजार कर रहे हैं।
1993 से शुरू हुआ विवाद, 2009 में नई स्कीम भी नहीं बनी समाधान
रहवासी संघ ने बताया कि वर्ष 1993 में आईडीए ने स्कीम-132 लागू की थी, जिससे हजारों प्लॉट और निजी जमीन प्रभावित हुई। बाद में हाईकोर्ट ने इस योजना को निरस्त कर दिया, लेकिन वर्ष 2009 में उसी क्षेत्र में स्कीम-171 लागू कर दी गई। इसके बाद भी क्षेत्र का विकास नहीं हुआ और हजारों लोगों की जमीन वर्षों तक अधर में लटकी रही।
भूमाफियाओं ने उठाया फायदा, कई लोगों का सपना अधूरा रह गया
रहवासी संघ के अनुसार, वर्षों तक योजना लंबित रहने का फायदा उठाकर भूमाफियाओं और असामाजिक तत्वों ने कई प्लॉटों पर अवैध कब्जे कर मकान बनाकर बेच दिए। कई वास्तविक प्लॉटधारक अपने सपनों का घर बनाए बिना ही इस दुनिया से चले गए।
हालांकि, तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह के कार्यकाल में भूमाफिया विरोधी अभियान के तहत कई अवैध कब्जे हटाए गए और प्लॉटधारकों के दस्तावेजों की भी जांच की गई।
विधानसभा में संशोधन के बाद भी नहीं हुआ अमल
रहवासियों ने बताया कि राज्य सरकार ने 17 फरवरी 2020 को विधानसभा में संशोधन कर ऐसी लंबित योजनाओं को समाप्त करने का प्रावधान किया था। इसके तहत यदि प्राधिकरण द्वारा किए गए खर्च की प्रतिपूर्ति कर दी जाए तो संबंधित योजना स्वतः व्यपगत (लैप्स) मानी जाएगी।
लंबे संघर्ष के बाद आईडीए ने 23 अक्टूबर 2024 को प्रारूप जारी कर प्रभावितों से ₹5.84 करोड़ जमा कराए, लेकिन राशि मिलने के बाद भी योजना को समाप्त करने की अधिसूचना जारी नहीं की गई।
मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद बढ़ी उम्मीद, अब कार्रवाई की मांग
हाल ही में विधायक महेंद्र हार्डिया की मांग पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सार्वजनिक मंच से स्कीम-171 का समाधान कराने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद भोपाल से लेकर इंदौर तक प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रभावितों में नाराजगी बढ़ गई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनके मिश्रा, महेंद्र चतुर्वेदी, राजेश तोमर, मुकेश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में प्लॉटधारक मौजूद रहे। उन्होंने सरकार से मांग की कि वर्षों से लंबित स्कीम-171 को तत्काल समाप्त कर प्रभावित परिवारों को उनके भूखंडों पर अधिकार दिलाया जाए।
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