अमित शाह मानहानि केस में राहुल गांधी बरी: सुल्तानपुर कोर्ट ने 16 मिनट में सुनाया फैसला; 8 साल पुराने मामले में भाजपा नेता की शिकायत खारिज
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, सुल्तानपुर/लखनऊ।
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत से बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े करीब आठ साल पुराने मानहानि मामले में अदालत ने 26 अक्टूबर को राहुल गांधी को दोषमुक्त कर दिया।
मामले की सुनवाई अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) शुभम वर्मा की अदालत में हुई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी सुबह करीब 11:16 बजे अदालत में पेश हुए और लगभग 11:32 बजे फैसला सुना दिया गया।
इस मामले में भाजपा के तत्कालीन जिला उपाध्यक्ष विजय मिश्रा ने शिकायत दर्ज कराई थी। अदालत में राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा और काशी शुक्ला ने पक्ष रखा, जबकि शिकायतकर्ता की ओर से संतोष कुमार पांडे ने पैरवी की।
क्या था पूरा मामला?
मामला 8 मई 2018 को कर्नाटक के बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी की ओर से दिए गए बयान से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी ने भाजपा की ईमानदारी संबंधी राजनीति पर सवाल उठाते हुए तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का उल्लेख किया था।
इस बयान के बाद अगस्त 2018 में भाजपा नेता विजय मिश्रा ने सुल्तानपुर की अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का परिवाद दाखिल किया। शिकायतकर्ता का आरोप था कि बयान से अमित शाह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसके बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई और राहुल गांधी को अदालत में पेश होना पड़ा।
बचाव पक्ष ने बताईं दोषमुक्ति की तीन वजहें
रिपोर्ट में राहुल गांधी के वकील की ओर से दोषमुक्ति के पीछे तीन प्रमुख आधार बताए गए हैं।
1. पूरे बयान की सीडी को अहम साक्ष्य माना गया
बचाव पक्ष ने अदालत में राहुल गांधी के पूरे बयान की सीडी पेश की थी। वकील के मुताबिक, बयान को उसके संपूर्ण संदर्भ में देखने पर मानहानि के आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिला। राहुल गांधी ने भी अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उनका उद्देश्य किसी की मानहानि करना नहीं था।
2. शिकायतकर्ता को प्रत्यक्ष पीड़ित नहीं माना गया
बचाव पक्ष की दलील के मुताबिक, विजय मिश्रा का राहुल गांधी के बयान से प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। शिकायतकर्ता ने अमित शाह के संबंध में दिए गए बयान पर आपत्ति जताते हुए मामला दर्ज कराया था। अदालत के निष्कर्ष के संबंध में रिपोर्ट में कहा गया है कि शिकायतकर्ता को इस मामले में पीड़ित व्यक्ति के रूप में स्वीकार नहीं किया गया।
3. आरोपों को मानहानि के लिए पर्याप्त नहीं माना गया
तीसरा आधार यह बताया गया कि शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप मानहानि साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे। बचाव पक्ष का कहना था कि बयान के संदर्भ और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए राहुल गांधी के खिलाफ आरोप टिक नहीं पाए।
शिकायतकर्ता को अदालत की फटकार
रिपोर्ट के अनुसार, फैसला सुनाते समय अदालत ने शिकायतकर्ता को भी फटकार लगाई। अदालत ने कथित तौर पर कहा कि झूठी वाहवाही हासिल करने के लिए इस तरह के मुकदमे दायर नहीं किए जाने चाहिए। बिना ठोस आधार के मामले दाखिल करने से अदालत का कीमती समय बर्बाद होता है और शिकायत दर्ज कराने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।
राहुल गांधी को पहले भी मानहानि मामले में हुई थी सजा
राहुल गांधी इससे पहले भी मानहानि के एक चर्चित मामले में दोषी ठहराए गए थे। वर्ष 2019 में कर्नाटक के कोलार में चुनावी रैली के दौरान उन्होंने ‘सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों है’ टिप्पणी की थी। इस बयान को लेकर दर्ज आपराधिक मानहानि मामले में गुजरात की अदालत ने 2023 में उन्हें दो साल की सजा सुनाई थी।
उस समय राहुल गांधी वायनाड से लोकसभा सांसद थे। सजा के बाद उनकी संसद सदस्यता रद्द कर दी गई थी। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा दी, जिसके बाद उनकी लोकसभा सदस्यता बहाल हो गई। सुल्तानपुर का मौजूदा मामला अमित शाह के संबंध में 2018 में दिए गए बयान से जुड़ा था और इसकी कानूनी कार्यवाही अलग थी।
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