पिपलियापाला तालाब दम तोड़ रहा: मर रही मछलियां; भू-माफिया और कुप्रबंधन ने किया बेहाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

लापरवाही की इंतेहा... शहर की प्यास बुझाने वाला तालाब अब
कचरे और खेती के चंगुल में, प्रशासन की चुप्पी से गहराया संकट
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पिपलियापाला तालाब रीजनल पार्क इन दिनों गहरे संकट में है। कभी जल का प्रमुख स्रोत और आकर्षण का केंद्र रहा यह तालाब आज अपनी बदहाली पर है।
तालाब में बड़ी संख्या में मछलियों के मरने का सिलसिला जारी है। इसका सीधा असर जल प्रदूषण के रूप में सामने आ रहा है, जिसे रोकने में प्रशासन पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।
तालाब की दुर्दशा का सबसे बड़ा कारण यहां आने वाले लोगों द्वारा मछलियों को डाला जा रहा अनाज है। भारी मात्रा में अनाज डालने के कारण तालाब के पानी में काई की मोटी परत जम गई है।
इस सड़न से पानी में ऑक्सीजन का स्तर खतरनाक हद तक कम हो गया है, जिसके चलते जलीय जीव मर रहे हैं। इस गंभीर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रबंधन द्वारा न तो कोई सुरक्षा घेरा बनाया गया है और न ही जनता के लिए कोई निर्देश लागू किए गए हैं।
प्रबंधन कागजों तक ही सीमित
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तालाब का प्रबंधन कागजों तक ही सीमित है। रखरखाव के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में तालाब पर बने पुल तक पर जंगली झाड़ियां उग आई हैं, जो पानी की निकासी और शुद्धिकरण में बड़ी बाधा बनी हुई हैं। यह लापरवाही रखरखाव के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।
एक दर्जन से अधिक कॉलोनियों के निवासियों में आक्रोश
तालाब के आसपास बसी एक दर्जन से अधिक कॉलोनियों के निवासियों में इसे लेकर भारी आक्रोश है। स्थानीय निवासियों का स्पष्ट आरोप है कि प्रशासन इस तालाब को बचाने में दिलचस्पी नहीं ले रहा है।
यदि समय रहते तालाब का गहरीकरण नहीं किया गया और अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो यह जल स्रोत पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। अब नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल को इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
शहर की इस महत्वपूर्ण धरोहर को बचाने के लिए निगम प्रशासन को तत्काल अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू करने, अवैध रूप से पानी खींचने वाले माफियाओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने और तालाब के गहरीकरण के लिए कार्ययोजना तैयार करने की जरूरत है।
पिपलियापाला को भ्रष्टाचार और उदासीनता के चंगुल से निकालकर फिर से जीवित करना निगम प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। जनता अब ठोस कार्रवाई और जवाबदेही की उम्मीद कर रही है।
तालाब की जमीन पर खुलेआम खेती
तालाब के आसपास का इलाका अब भू-माफियाओं के कब्जे में है। यहां तालाब की जमीन पर खुलेआम खेती की जा रही है। माफिया तालाब के पानी को सीधे खेतों में खींच रहे हैं, जिससे तालाब का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। एक तरफ जल स्रोत खत्म हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ वाटर लेवल गिरने से भविष्य में पानी का भीषण संकट खड़ा होने की आशंका बढ़ गई है।
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