वोटर लिस्ट की जांच में कौन-सा सॉफ्टवेयर: चुनाव आयोग ने बताया ट्रेड सीक्रेट; सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई कई जानकारियां साझा नहीं की
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
मतदाता सूची में गड़बड़ियां पहचानने के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर को लेकर चुनाव आयोग ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई कई जानकारियां साझा नहीं की हैं।
आयोग ने सॉफ्टवेयर का नाम और वर्जन बताने से इनकार करते हुए इसे ट्रेड सीक्रेट और बौद्धिक संपदा से जुड़ी जानकारी बताया है। वहीं, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि मतदाता सूची की जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग या प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स का इस्तेमाल किया गया था या नहीं।
आयोग ने 16 अक्टूबर को RTI के जवाब में सॉफ्टवेयर और उसकी कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों पर अपना पक्ष रखा। जवाब में आयोग ने कुछ प्रश्नों के लिए RTI कानून की अलग-अलग धाराओं का हवाला दिया, जबकि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की जिम्मेदारी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) की बताई।
RTI में पूछा गया था कि SIR के दौरान मतदाता सूची की जांच के लिए किस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया और उसका कौन-सा वर्जन था। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने RTI कानून की धारा 8(1)(d) का हवाला देते हुए जानकारी साझा करने से इनकार किया। इस धारा में व्यापारिक गोपनीयता, ट्रेड सीक्रेट और बौद्धिक संपदा से संबंधित कुछ सूचनाओं को सार्वजनिक करने से छूट का प्रावधान है, बशर्ते व्यापक सार्वजनिक हित में जानकारी देने की आवश्यकता न हो।
आयोग ने यह भी कहा कि SIR के लिए न तो नया सॉफ्टवेयर बनाया गया और न ही नया सॉफ्टवेयर खरीदा गया। हालांकि, इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर की पहचान और संस्करण की जानकारी नहीं दी गई। RTI में यह जानने की कोशिश भी की गई कि क्या सॉफ्टवेयर अपने आप मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ियां पहचानता है या केवल अधिकारियों को रिकॉर्ड की जांच करने में मदद करता है।
रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने इस सवाल पर स्पष्ट तकनीकी जवाब देने के बजाय RTI कानून की धारा 2(f) का उल्लेख किया। यह धारा सूचना की परिभाषा से संबंधित है और सामान्यतः सार्वजनिक प्राधिकरण के पास उपलब्ध रिकॉर्ड, दस्तावेजों तथा अन्य निर्धारित सूचनाओं पर लागू होती है।
मतदाता सूची की जांच में AI, मशीन लर्निंग या प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स का उपयोग हुआ या नहीं, यह भी RTI के प्रमुख सवालों में शामिल था। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने इस संबंध में स्पष्ट पुष्टि या खंडन नहीं किया। ऐसे में उपलब्ध जवाब के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि SIR में इन तकनीकों का इस्तेमाल किया गया था या नहीं।
यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची में संभावित दोहराव, रिकॉर्ड में विसंगतियों और अन्य त्रुटियों की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाली तकनीक की जानकारी से प्रक्रिया को समझने में मदद मिल सकती है।
मतदाता सूची से नाम अपने आप हटाए जाने की आशंका से जुड़ा सवाल भी RTI में उठाया गया था। इस पर आयोग ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का निर्णय संबंधित क्षेत्र का निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) तथ्यों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर करता है।
हालांकि, सॉफ्टवेयर की ओर से किसी रिकॉर्ड को चिह्नित करने और उसके बाद अधिकारी द्वारा लिए जाने वाले निर्णय के बीच की तकनीकी प्रक्रिया के बारे में अलग से स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
इसलिए आयोग के जवाब से यह तो स्पष्ट होता है कि नाम जोड़ने और हटाने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की है, लेकिन सॉफ्टवेयर की भूमिका और उसकी तकनीकी सीमाओं को लेकर सवाल बने हुए हैं।
RTI में यह भी पूछा गया था कि सॉफ्टवेयर द्वारा चिह्नित किए गए रिकॉर्ड की समीक्षा कौन करता है और अंतिम मंजूरी किस स्तर पर दी जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने RTI कानून की धारा 8(1)(g) का हवाला दिया। यह धारा ऐसी जानकारी को सार्वजनिक करने से छूट से संबंधित है, जिसके खुलासे से किसी व्यक्ति की जान या शारीरिक सुरक्षा को खतरा हो सकता है अथवा कानून लागू करने या सुरक्षा संबंधी उद्देश्यों के लिए गोपनीय रूप से दी गई जानकारी के स्रोत की पहचान उजागर हो सकती है।
आयोग ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13B(1) और 13B(2) का उल्लेख करते हुए बताया कि संबंधित विधानसभा क्षेत्र के ERO की मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की जिम्मेदारी होती है।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण करना है। ऐसी प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली, संभावित त्रुटियों की पहचान और मानवीय समीक्षा की भूमिका को समझना महत्वपूर्ण है।
चुनाव आयोग के जवाब में सॉफ्टवेयर की खरीद और विकास को लेकर जानकारी दी गई, लेकिन उसके नाम, संस्करण और AI के संभावित इस्तेमाल से जुड़े सवालों पर स्पष्टता नहीं मिली। वहीं, नाम जोड़ने और हटाने की जिम्मेदारी ERO की बताई गई।
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