घटिया निर्माण की खुली पोल: उद्घाटन से पहले ही धंसा करोड़ों से बना ब्रिज; गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खबर फर्स्ट, खरगोन।
मध्यप्रदेश में भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे इंदौर-एदलाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खरगोन जिले के बासवां गांव के पास खिरकिया नदी पर बनाया गया नया पुल उद्घाटन और यातायात शुरू होने से पहले ही धंस गया। पुल के धंसने से उसकी स्लैब में बड़ा गड्ढा बन गया, कांक्रीट उखड़ गया और अंदर लगे सरिए बाहर दिखाई देने लगे। ग्रामीणों ने घटना के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किए, जिसके बाद मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया।
दो महीने में ही जवाब दे गया पुल
स्थानीय लोगों के अनुसार, पुल का निर्माण कुछ ही महीने पहले पूरा हुआ था। अभी इस पर यातायात शुरू भी नहीं हुआ था कि स्लैब धंसने की घटना सामने आ गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पुल चालू हो चुका होता और उस दौरान कोई भारी वाहन गुजरता, तो बड़ा हादसा हो सकता था।
घर की छत से भी कमजोर निर्माण?
निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। जानकारों का दावा है कि पुल की स्लैब में मात्र 10 एमएम मोटाई के सरियों का उपयोग किया गया और कांक्रीट की मोटाई करीब 4 इंच रखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी राष्ट्रीय राजमार्ग के पुल के लिए ऐसे मानक बेहद चिंताजनक हैं और सामान्य मकानों की छतें भी कई बार इससे अधिक मजबूत बनाई जाती हैं।
खामी छिपाने की कोशिश का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि पुल धंसने की जानकारी सामने आने के बाद निर्माण एजेंसी के कर्मचारियों ने क्षतिग्रस्त हिस्से को बोरियां बिछाकर और मिट्टी डालकर ढंकने का प्रयास किया। इसके बाद दोनों ओर बैरिकेड लगाकर क्षेत्र को बंद कर दिया गया। हालांकि स्थानीय लोगों ने वीडियो रिकॉर्ड कर पूरे मामले को सार्वजनिक कर दिया।
3900 करोड़ की भारतमाला परियोजना पर सवाल
इंदौर से महाराष्ट्र के एदलाबाद तक प्रस्तावित 203 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण भारतमाला परियोजना के तहत लगभग 3900 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है।
खरगोन के बलवाड़ा से खंडवा के धनगांव तक 39 किलोमीटर हिस्से का ठेका GHV इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया है। कंपनी ने निर्माण कार्य विभिन्न एजेंसियों को पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर सौंप रखा है। नर्मदा नदी पर पुल निर्माण का कार्य मंगलम बिल्डकॉन के पास है, जबकि अन्य सड़क एवं पुल निर्माण कार्य नागपुर की केदारेश्वर कंपनी द्वारा किए जा रहे हैं।
एक ही कंपनी के पास कई बड़े प्रोजेक्ट
केदारेश्वर कंपनी मध्यप्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण ओंकारेश्वर फोरलेन परियोजना पर भी काम कर रही है। यह फोरलेन भविष्य में इसी इंदौर-एदलाबाद हाईवे से जुड़ेगी। ऐसे में निर्माण गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल और भी गंभीर हो जाते हैं।
एनएचएआई की दो यूनिटों के बीच जिम्मेदारी का विवाद
सूत्रों के अनुसार, यह परियोजना पहले एनएचएआई की इंदौर यूनिट के अधीन थी, लेकिन कार्य में देरी के कारण हाल ही में इसे खंडवा यूनिट को सौंप दिया गया। जिस पुल में खामी सामने आई है, उसका निर्माण इंदौर यूनिट के कार्यकाल में हुआ था। अब दोनों इकाइयों के बीच जवाबदेही को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
कंपनी का दावा-गुणवत्ता से समझौता नहीं
GHV इंडिया के प्रोजेक्ट मैनेजर रुद्रा हजांगे ने प्रारंभ में घटना की जानकारी से इनकार किया। बाद में उन्होंने कहा कि एक ओवरलोड वाहन पुलिया पर चढ़ गया था और उसे निकालने के दौरान स्लैब के एक हिस्से को हटाना पड़ा। उन्होंने निर्माण गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी से इनकार किया है।
बड़ा सवाल: ट्रैफिक शुरू होने के बाद क्या होता?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पुल यातायात के लिए खोल दिया गया होता तो किसी भी समय गंभीर दुर्घटना हो सकती थी। खिरकिया नदी पर बने इस पुल के धंसने से निर्माण एजेंसियों, ठेकेदारों और एनएचएआई की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
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