राजधानी में स्वाइन फ्लू से पहली मौत: बुजुर्ग ने गंवाई जान; 12 दिन में सामने आए 45 नए केस
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
राजधानी में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 संक्रमण ने चिंता बढ़ा दी है। इस साल भोपाल में संक्रमण से पहली मौत हुई है। एक निजी अस्पताल में भर्ती 80 वर्षीय राम सिंह की गंभीर सांस संबंधी बीमारी के चलते मौत हो गई। वे पहले से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारियों से पीड़ित थे।
65 मरीजों में संक्रमण की हो चुकी पुष्टि
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, भोपाल में अब तक 65 मरीजों में एच1एन1 संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से 45 मरीज पिछले महज 12 दिनों में सामने आए हैं। यानी कुल मामलों का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा हाल के दिनों में मिला है।
232 गंभीर मरीजों की जांच
शहर में फिलहाल एच1एन1 की जांच की सुविधा एम्स भोपाल में उपलब्ध है। गांधी मेडिकल कॉलेज में नियमित जांच की सुविधा अभी शुरू नहीं हुई है। ऐसे में गंभीर लक्षण वाले मरीजों की जांच प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है।
मरीजों की संख्या बढ़ रही
अब तक 232 गंभीर लक्षण वाले मरीजों की जांच की जा चुकी है। मौसम में बदलाव, नमी और ठंडक के बीच अस्पतालों की ओपीडी में सर्दी-खांसी, बुखार और सांस संबंधी संक्रमण के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है।
एक्सपर्ट बोले- अभी महामारी जैसी स्थिति नहीं
गांधी मेडिकल कॉलेज में आरआईआरडी के अधीक्षक और पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. लोकेंद्र दवे के मुताबिक मौसम में बदलाव के साथ वायरल रेस्पिरेटरी इंफेक्शन बढ़ते हैं। इनमें इंफ्लूएंजा और एच1एन1 भी शामिल हैं।
उनका कहना है कि पिछले करीब तीन महीने से ऐसे लक्षण वाले मरीज लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति असामान्य या महामारी जैसी नहीं है। इंफ्लूएंजा के करीब 95 प्रतिशत मामले बिना अस्पताल में भर्ती हुए ठीक हो जाते हैं।
डॉ. दवे के मुताबिक हर सर्दी-जुकाम या बुखार वाले मरीज को एच1एन1 टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर मरीज के लक्षण, उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति देखकर जांच की आवश्यकता तय करते हैं।
बुजुर्ग और गंभीर बीमारी वाले मरीज ज्यादा जोखिम में
स्वाइन फ्लू का संक्रमण बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए ज्यादा परेशानी पैदा कर सकता है। हृदय रोग, डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों वाले मरीजों में संक्रमण के गंभीर रूप लेने का खतरा अपेक्षाकृत अधिक रहता है।
कुछ मामलों में फ्लू के कारण निमोनिया और ऑक्सीजन की कमी जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। सांस लेने में परेशानी, ऑक्सीजन लेवल कम होना या लक्षणों का तेजी से बढ़ना गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
संक्रमण होने पर खुद को रखें अलग
विशेषज्ञों के मुताबिक सर्दी-खांसी या बुखार जैसे लक्षण होने पर मरीज को दूसरे लोगों से दूरी बनाए रखनी चाहिए। पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेते रहें। मास्क पहनने और हाथों की नियमित सफाई से संक्रमण के प्रसार को कम किया जा सकता है।
बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवाएं लेना उचित नहीं है। खासकर एंटीवायरल दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही किया जाना चाहिए और निर्धारित दवा का पूरा कोर्स करना जरूरी है।
फ्लू वैक्सीन भी उपलब्ध
एच1एन1 समेत इंफ्लूएंजा से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका सुरक्षा प्रभाव करीब 60 से 70 प्रतिशत तक हो सकता है। हाई रिस्क ग्रुप में आने वाले लोग डॉक्टर की सलाह से वैक्सीनेशन करा सकते हैं।
हालांकि वैक्सीन का असर बनने में समय लगता है। एग एलर्जी वाले लोगों को वैक्सीन लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेने की आवश्यकता है।
आंकड़ों ने बढ़ाई सतर्कता, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं
भोपाल में 12 दिनों के भीतर 45 नए एच1एन1 मरीज मिलना और इस साल पहली मौत सामने आना स्वास्थ्य तंत्र के लिए सतर्क रहने का संकेत है। हालांकि विशेषज्ञ फिलहाल इसे महामारी जैसी स्थिति नहीं मान रहे हैं।
ऐसे में लक्षणों को नजरअंदाज न करना, हाई रिस्क मरीजों में विशेष सावधानी और डॉक्टर की सलाह पर उपचार सबसे अहम है।
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