68 करोड़ की संपत्तियों के दस्तावेज फिर भी फिरोज खान गिरफ्त से बाहर: सात फर्मों का नेटवर्क भी आया सामने; ससुराल के आसपास छिपे होने की चर्चा, भाई जावेद खान का नाम भी सुर्खियों में
KHULASA FIRST
संवाददाता

15 ठिकानों पर लोकायुक्त की दबिश से शुरू हुई जांच में खुलासा
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पुलिस की वर्दी, सरकारी नौकरी और महज प्रधान आरक्षक का पद… लेकिन संपत्तियों का हिसाब करोड़ों में। लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में पदस्थ प्रधान आरक्षक चालक फिरोज खान की संपत्तियों को लेकर लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। इंदौर से देवास और उज्जैन तक फैले कथित संपत्ति नेटवर्क की परतें खुल रही हैं।
कई फर्मों और करीबियों के नाम जांच के दायरे में हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है, आखिर फिरोज खान कब तक गिरफ्त से बाहर रहेगा? जिस पुलिस विभाग में वह पदस्थ रहा उसी विभाग के एक कर्मचारी को पकड़ने में अब तक सफलता क्यों नहीं मिली?
14 अक्टूबर को लोकायुक्त की इंदौर और उज्जैन की संयुक्त टीमों ने फिरोज खान से जुड़े 15 ठिकानों पर सर्च कार्रवाई की थी। शुरुआत में सामने आए आंकड़ों ने जांच एजेंसी को चौंका दिया था।
15 अक्टूबर को खुलासा फर्स्ट ने प्रमुखता से बताया था कि चल-अचल संपत्तियों पर करीब 13.07 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का पता चला है। यह खर्च उसकी ज्ञात आय से 575 प्रतिशत अधिक बताया था। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो संपत्तियों और उनसे जुड़े लोगों की संख्या लगातार बढ़ती गई।
संपत्ति के कागजात मिले, लेकिन जब्ती का सवाल बाकी
पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण अंतर भी समझना जरूरी है। लोकायुक्त की जांच में 51 संपत्तियों के दस्तावेज और उनके बाजार मूल्य का विवरण सामने आया है, लेकिन इसे सभी संपत्तियों की विधिवत जब्ती नहीं माना जा सकता।
बैंक खातों से निकासी रोकने के लिए पत्र भेजे जाने और संपत्तियों की खरीद-बिक्री के स्रोत की जांच की जानकारी उपलब्ध है। ऐसे में अब यह भी देखना होगा कि संदिग्ध संपत्तियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत कब और किस तरह कुर्क या जब्त किया जाएगा।
फिरोज खान के निलंबन और लंबे समय से ड्यूटी से गैरहाजिर रहने को लेकर विभागीय कार्रवाई की जानकारी भी सामने आ चुकी है। वहीं हालिया मीडिया रिपोर्टों में उसके फरार होने और अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने का उल्लेख है। ऐसे में लोकायुक्त और पुलिस विभाग के सामने दोहरी चुनौती है।
एक तरफ करोड़ों की संपत्ति के वास्तविक स्रोत का पता लगाना और दूसरी तरफ आरोपी को जांच व कानूनी प्रक्रिया के सामने पेश कराना। अब सवाल केवल यह नहीं है कि एक प्रधान आरक्षक से जुड़े इतने बड़े संपत्ति नेटवर्क का पैसा कहां से आया। सवाल यह भी है कि कार्रवाई के इतने दिन बाद भी उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हो सकी?
क्या जांच एजेंसी को उसके संभावित ठिकानों की जानकारी है? क्या संपत्तियों से जुड़े सभी लोगों और फर्मों की भूमिका की जांच के साथ आरोपी की तलाश भी उसी गंभीरता से की जा रही है? इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही इस पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।
51 प्रॉपर्टियां, बाजार मूल्य 68.01 करोड़ रुपए
लोकायुक्त की जांच में अब तक 51 अचल संपत्तियों का विवरण सामने आ चुका है। इनकी गाइडलाइन के अनुसार खरीद कीमत करीब 19.94 करोड़ रुपए और अनुमानित बाजार कीमत लगभग 68.01 करोड़ रुपए बताई गई है। ये संपत्तियां केवल फिरोज के नाम पर ही नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों, परिचितों और उनसे जुड़ी फर्मों के नाम पर भी सामने आई हैं।
देवास के राजोदा, लोहाना, इटावा सहित इंदौर और उज्जैन क्षेत्र में जमीन, मकान और भूखंडों के दस्तावेज जांच का हिस्सा बने हैं। मामले में सात फर्मों का नाम सामने आया है। इनमें स्पार्कवेव रियलिटी इंडिया, ब्लैक हॉर्नेट, साहिल ट्रेडिंग कंपनी, रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट, रोशनी सेल्स एंड सर्विसेस, महाराजा रियल एस्टेट और श्याम इंफ्रा शामिल हैं।
इन फर्मों के जरिए हुए लेन-देन, संपत्तियों की खरीद और वास्तविक निवेशक की पहचान की पड़ताल की जा रही है। मगरखेड़ा की करीब 45 बीघा जमीन का सौदा भी जांच का अहम हिस्सा है। इस सौदे में फिरोज खान और युवराज पंवार के गवाह के रूप में मौजूद होने की जानकारी सामने आई है।
नौकरानी से लेकर करीबियों के नाम तक जुड़ी हैं कड़ियां
जांच में रोशनी वर्मा, रानू कुशवाह, नफीस खान और अन्य परिचितों के नाम पर संपत्तियों का ब्योरा सामने आया है। देवास में रानू कुशवाह के नाम कृषि भूमि, नफीस खान के नाम संपत्ति और अन्य लोगों के नाम पर दर्ज जमीनों के दस्तावेज भी जांचे जा रहे हैं।
लोकायुक्त यह पता लगाने में जुटी है कि इन संपत्तियों की खरीद के लिए रकम कहां से आई और कागजों पर जिन लोगों के नाम हैं, उनमें वास्तविक निवेश किसका था। 22 बैंक खातों की जानकारी जुटाई गई थी।
इनमें से 17 खातों के सत्यापन में 10 लाख 6 हजार रुपए से अधिक की शेष राशि सामने आई थी। शेष खातों के रिकॉर्ड, शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश की जानकारी भी मांगी गई। बैंकों को खातों से राशि निकालने पर रोक लगाने के लिए पत्र भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
ससुराल के आसपास छिपा हो सकता है
फिरोज खान के भाई का नाम जावेद खान बताया गया है। प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, जावेद भी पुलिस विभाग में पदस्थ है और आगर मालवा क्षेत्र में एएसआई के रूप में उसकी तैनाती की जानकारी सामने आई थी। एक रिपोर्ट में दोनों को जुड़वां भाई बताया गया है।
सितंबर 2024 में फिरोज और जावेद के खिलाफ नगर निगम की बाउंड्रीवॉल तोड़ने के मामले में भी प्रकरण दर्ज होने का उल्लेख किया गया था। हालांकि, जावेद की लोकायुक्त के आय से अधिक संपत्ति मामले में भूमिका अभी जांच से प्रमाणित नहीं हुई है।
इधर सूत्रों के हवाले से यह चर्चा भी सामने आ रही है कि फिरोज खान अपने ससुराल के आसपास कहीं छिपा हो सकता है। इस सूचना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, यदि यह जानकारी जांच एजेंसी तक पहुंची है तो सवाल उठता है कि संभावित ठिकानों पर दबिश देकर उसकी तलाश तेज क्यों नहीं की जा रही?
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