रूपाली जैन पर मेहरबान निगम के भ्रष्ट अधिकारी: एमआईसी के निर्णय, लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में शिकायत के बावजूद कर दिया करोड़ों का भुगतान
KHULASA FIRST
संवाददाता

चेक बाउंस के मामले में कोर्ट से जारी हुआ गिरफ्तारी वारंट, पुलिस लगी हुई है घेराबंदी करने में
जनप्रतिनिधियों के अधिकारों पर भारी पड़े अफसर: एमआईसी की रोक के बाद भी स्मार्ट सिटी के रास्ते संस्था 'प्रवेश' पर लुटाया टैक्स का पैसा
स्माइल-75 प्रोजेक्ट में धांधली: सीएसआर फंड गायब, आपत्तियों के बाद भी पास हुए करोड़ों के बिल
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एक ओर नगर निगम कंगाली का रोना रोकर ठेकेदारों का भुगतान करने में आनाकानी करता है, कर्मचारियों के वेतन के भी लाले पड़ जाते हैं, वहीं दूसरी ओर निगम के जिम्मेदार अधिकारी भ्रष्टाचार करने का कोई मौका नहीं छोड़ते।
स्वच्छता में शहर में इन दिनों निगम के अंतर्गत संचालित भिक्षुक मुक्ति अभियान और पुनर्वास केंद्र स्माइल-75 प्रोजेक्ट भारी प्रशासनिक धांधलियों, मनमानी और वित्तीय अनियमितताओं के चलते गंभीर विवादों में है।
लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू और अन्य मंचों पर संस्था प्रवेश व उसकी संचालिका के खिलाफ गंभीर शिकायतें दर्ज होने के बावजूद निगम के कुछ खास अधिकारियों की मेहरबानी से नियमों को ताक में रखकर करोड़ों रुपए के बिल पास कराए जाने का मामला सामने आया है। यह पूरा घटनाक्रम स्थानीय जनप्रतिनिधियों और महापौर-परिषद (एमआईसी) के अधिकारों को खुली चुनौती दे रहा है।
भिक्षुओं के नाम पर रुपाली जैन को किए जा रहे भुगतान की राशि शहरवासियों द्वारा गाढ़ी कमाई से भरे टैक्स की है, जिसका इस्तेमाल शहर के विकास कार्यों में किया जाना था, लेकिन भिखारियों की आड़ में रुपाली जैन पर लुटाया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक भ्रष्टाचार के इन रुपयों में से अधिकारियों को भी उनका हिस्सा मिल रहा है, जिसके चलते जिम्मेदार अधिकारी भी करोड़ों रुपए उसे देने से नहीं चूक रहे।
इस मामले को एक बार फिर नए सिरे से लोकायुक्त को शिकायत करने की तैयारी है, जिसमें निगमायुक्त से लेकर रुपाली जैन को रुपए देने में शामिल तमाम अधिकारियों की शिकायत की जाएगी।
गौरतलब है कि हाल ही में रुपाली जैन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। अदालत में वारंट जारी करते हुए एरोड्रम पुलिस को निर्देश दिए हैं कि अिभयुक्त रुपाली जैन को 09 अक्टूबर तक गिरफ्तार कर पेश करें। इसमें कोई उपेक्षा नहीं होनी चाहिए।
स्मार्ट सिटी के जरिये टेंडर का खेल
प्राप्त जानकारी के अनुसार भिक्षुक पुनर्वास केंद्र के संचालन को लेकर पूर्व में व्यापक अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद महापौर परिषद की बैठक में इस बात पर गंभीर आपत्ति जताई गई थी और एमआईसी ने स्पष्ट निर्णय लेते हुए रुपाली जैन की परम पूज्य रक्षक आदिनाथ वेलफेयर एंड एजुकेशनल सोसायटी, संस्था प्रवेश का अनुबंध आगे न बढ़ाने तथा पूरी टेंडर प्रक्रिया को दोबारा कराने का प्रस्ताव और अनुशंसा की थी, लेकिन निगम के कुछ बड़े अधिकारियों ने एमआईसी के इस निर्णय को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया।
इतना ही नहीं, निगम स्तर पर टेंडर कराने के बजाय मामले को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत ट्रांसफर करवा लिया और अंततः कार्य उसी विवादित संस्था ‘प्रवेश’ और रुपाली जैन से ही करवाया गया।
एक तरफ जहां एमआईसी सदस्यों और महापौर के निर्णयों को अमान्य कर दिया गया, वहीं दूसरी तरफ महापौर की परिषद के अधिकारों की अवहेलना से महकमे में यह चर्चा आम हो गई है कि क्या निगम में निर्वाचित प्रतिनिधियों से ऊपर कुछ अधिकारी हावी हैं?
24 घंटे पहले पुलिस कर देगी तलाश शुरू... रुपाली जैन ने भिक्षुओं के नाम पर भ्रष्टाचार कर और उन्हीं के नाम पर कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) के तहत करोड़ों रुपए तो जमा कर लिए, लेकिन उसकी नीयत लोगों को रुपए देने की नहीं है और अब यही रुपाली पर भारी पड़ गई है।
अपनी छवि चमकाने के लिए इनडेप्थ मीडिया प्राइवेट लिमिटेड एजेंसी की मदद से उसने सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के माध्यम से कई आर्टिकल छपवाए और अवॉर्ड भी हासिल किए, लेकिन जिस एजेंसी ने उसकी छवि चमकाने का प्रयास किया वह उसी के रुपए खा गई। उसकी यह हरकत अब उसे काफी भारी पड़ गई है और उस पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।
इस मामले में एरोड्रम थाना प्रभारी वेदेंद्र सिंह कुशवाहा का कहना है कि आरोपी रुपाली जैन की गिरफ्तारी का वारंट न्यायालय से प्राप्त हुआ है। 9 तारीख को उसे गिरफ्तार कर अदालत के समक्ष पेश करना है।
पेश करने से 24 घंटे पहले उसकी तलाश शुरू कर दी जाएगी, उसे हिरासत में लेकर न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा। यदि वह नहीं मिलती है तो उसकी तलाश तेज की जाएगी और न्यायालय के आदेश का पालन किया जाएगा।
सीएसआर और जनसहयोग राशि का कोई हिसाब नहीं
प्रोजेक्ट के नाम पर निगम द्वारा संस्था को परदेशीपुरा स्थित सामाजिक न्याय परिसर में कार्यालय संचालन के लिए भूमि और भवन उपलब्ध कराया गया था, जो अब तक संस्था के अवैध कब्जे में बताया जा रहा है।
इसके अलावा प्रोजेक्ट से जुड़ी करीब 1 करोड़ रुपए की संपत्ति और एसेट्स भी पूरी तरह संस्था के पास हैं। गंभीर विसंगति यह कि शासकीय अनुदान के अलावा संस्था द्वारा जनता, दानदाताओं और सीएसआर गतिविधियों के नाम पर भारी मात्रा में धन वसूला जा रहा है, जिसका कोई आधिकारिक लेखा-जोखा निगम के पास उपलब्ध नहीं है। यहां तक कि सीएसआर फंड के जरिये संस्था को अलग से वाहन तक उपलब्ध कराए जाने के मामले भी चर्चा में रहे हैं।
आपत्तियों और नोटशीट के बावजूद बिल पास कराने का दबाव
भिक्षुक पुनर्वास केंद्र के संचालन और बिल भुगतान को लेकर ऑडिट मॉनिटरिंग कमेटी और लेखा शाखा की नोटशीट पर आपत्तियां ली। कई सिटी मिशन मैनेजरों ने नियमों के विरुद्ध होने से बिलों पर हस्ताक्षर से इनकार कर दिया था।
यहां तक कि कांग्रेस नेताओं द्वारा विधानसभा में भी इस संबंध में तारांकित प्रश्न लगाकर जवाब मांगे गए और कई स्तरों पर अनियमितताओं का खुलासा किया गया।
बावजूद इसके जैसे ही योजना प्रभारी के रूप में पदस्थ हुए, पुरानी जांचों और आपत्तियों को दरकिनार कर नोटशीट के माध्यम से पहले छोटे, फिर करोड़ों रुपए के भारी-भरकम बिलों के भुगतान धड़ल्ले से जारी करवा दिए गए।
आरोप है कि एमआईसी प्रभारी मनीष शर्मा ‘मामा’ या महापौर परिषद की औपचारिक सहमति के बिना भी नियमों को ताक में रखकर भुगतान की प्रक्रिया की गई।
आरटीआई में जानकारी गायब
आम नागरिकों द्वारा जब सूचना के अधिकार (आरटीआई) के माध्यम से भिक्षुक पुनर्वास और इससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की आधिकारिक जानकारी मांगी गई, तो अब तक विभाग द्वारा कोई स्पष्ट और संतोषजनक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि इस करोड़ों रुपए के घोटाले, एमआईसी के अधिकारों के हनन और अधिकारियों-संस्था की मिलीभगत की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए, ताकि शासकीय धन के दुरुपयोग और दोषियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
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