शाही मस्जिद पर बवाल: अब खुद तोड़ रहा मुस्लिम समाज
KHULASA FIRST
संवाददाता

एक्शन से पहले बड़ा टेंशन, महिला टीआई घायल
हटाने पर हुआ था पथराव
आंसू गैस छोड़ी गई
रविवार रात ही हजारों मुसलमानों ने मस्जिद के पास डाला डेरा, शहर काजी भी रहे मौजूद
भारी पुलिसबल की मौजूदगी के बीच हुए धरना-प्रदर्शन के बाद रात में ही बन गई थी मस्जिद के कुछ हिस्से को हटाने पर आम सहमति
मुस्लिम समुदाय में ही बन गए दो गुट, एक मस्जिद हटाने के पक्ष में, तो दूसरा विरोध में सड़क पर उतरा
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
ज्योतिर्लिंग नगरी उज्जैन में सोमवार सुबह शाही मस्जिद के पास भारी बवाल हो गया। पुलिस से झड़प, पथराव व उसके बाद मस्जिद परिसर में जाने की कोशिश के बाद उपद्रव भड़क गया। यह विरोध बुलडोजर एक्शन को लेकर था।
सड़क चौड़ीकरण के तहत शाही मस्जिद के पास 15 मीटर चौड़ी सड़क बनना है। इसके लिए मस्जिद का एक बड़ा हिस्सा हटया जाना था। आज बुलडोजर की कार्रवाई होना थी। नतीजतन भारी बवाल हुआ।
बड़ी संख्या में महिलाएं भी विरोध करने पहुंचीं। उज्जैन में कंठाल चौराहा से गोपाल मंदिर तक 900 मीटर की सड़क पर खड़े हनुमान मंदिर का मामला भी इसी तरह गरमाया था।
शा ही मस्जिद गोपाल मंदिर के ठीक सामने छत्री चौक में स्थापित है। रात को बड़ी संख्या में मुसलमान समुदाय ने यहां शांतिपूर्वक धरना-प्रदर्शन कर मस्जिद के विस्थापन का विरोध किया था। रात में भारी पुलिसबल तैनात था।
बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और पूरा छत्री चौक मुस्लिम समुदाय से भरा हुआ था। रात में ही जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और मस्जिद कमेटी के सदस्यों, सदर के बीच लंबी और कई दौर की बातचीत हुई थी।
इसके बाद इस बात पर सहमति बनी थी कि मस्जिद का जो हिस्सा सड़क विस्तार में आ रहा है, उसे मस्जिद कमेटी और उससे जुड़े लोग ही हटा लेंगे, बुलडोजर की जरूरत नहीं पड़ेगी।
जब यह आम सहमति बन गई तो प्रशासन ने राहत की सांस ली और आज सुबह से यह माना जा रहा था कि शाही मस्जिद का अतिक्रमण में आ रहा हिस्सा मस्जिद कमेटी तोड़ लेगी और इसकी शुरुआत हो भी गई थी, लेकिन तभी समुदाय का दूसरा गट अचानक इस विस्थापन के विरोध में सामने आ गया।
पहले आपस में एक ही समुदाय के दो गुट इस मुद्दे पर आमने-सामने हुए। मौके पर भारी पुलिसबल तैनात था, लेकिन विरोध करने वाला तबका एकाएक उग्र हो गया और तंग गलियों से अचानक पथराव होने लगा।
सुरक्षाबलों पर एकाएक हुए हमले से इलाके में तनाव फैल गया। हालांकि सुरक्षाबलों ने संयम बनाए रखा और उपद्रवी तत्वों को पीछे हटने के लिए लगातार आगाह किया। जब उपद्रवी नही माने तो आंसू गैस के गोले दागे गए।
इसके बाद क्षेत्र में भगदड़ की स्थिति बन गई। विरोध करने वालों ने महिलाओं को भी आगे किया था। हालांकि महिला पुलिसबल ने उन्हें समझाइश देखकर रवाना कर दिया, लेकिन इस दौरान महिला टीआई पुष्पा पांचाल के घायल होने की खबर है। उन्हें हाथ में चोट आई। अचानक हुए पथराव से सुरक्षाबल के कुछ जवान भी घायल हुए।
एक ही समुदाय के दो पक्षों के इस विवाद ने सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई को आम सहमति बनने के बाद भी विवाद की स्थिति निर्मित कर दी है। उज्जैन में सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर सड़क चौड़ीकरण 6 महीने से चल चल रहा है।
इस दौरान दर्जनों छोटे-बड़े मंदिर भी हटाए गए। कुछ इलाकों में मस्जिद वह इबादतगाह भी शांतिपूर्वक तरीके से हटाए, लेकिन सराफा चौक में बने खड़े हनुमानजी मंदिर को लेकर विवाद गहरा गया था। इस मुद्दे पर स्थानीय नागरिकों में भारी रोष व्याप्त हो गया।
बावजूद इसके जिला प्रशासन ने खड़े हनुमान मंदिर का एक बड़ा हिस्सा ढहा दिया था, लेकिन मंदिर परिसर के अंदर स्थित हनुमानजी का मूल विग्रह अपने स्थान से टस से मस नहीं हुआ। इस प्रतिमा को हटाने के 7 दिन में तीन बार बड़े प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली।
इसके बाद नगरवासी खड़े हनुमान मंदिर के पक्ष में सड़क पर आ गए। धरना-प्रदर्शन हुआ। हनुमान चालीसा पढ़ी गई और भजन-कीर्तन के साथ जिला प्रशासन को आगाह किया गया कि मंदिर नहीं हटाए। हालांकि इस मुद्दे पर जिला प्रशासन की तरफ से कोई ठोस जवाब अब तक हनुमान भक्तों तक नहीं पहुंचा, लेकिन एक पखवाड़े से खड़े हनुमानजी अपने स्थान पर बने हुए हैं।
शाही मस्जिद खड़े हनुमान मंदिर से कुछ ही दूर छत्री चौक में उस जगह स्थित है, जहां प्राचीन गोपाल मंदिर है। बरसों पुरानी इस मस्जिद को लेकर विवाद की स्थिति का अंदेशा जिला प्रशासन को भी था।
वहीं मस्जिद कमेटी के लोग भी इसे बचाने के लिए कोर्ट की शरण में गए थे, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली और उनकी अर्जी खारिज कर दी गई। इसके बाद यह तय हो गया था कि शाही मस्जिद भी हटाई जाएगी, लेकिन खड़े हनुमान मंदिर को लेकर जिस तरीके से उज्जैन शहर में हिंदू पक्ष का दबाव बना, उसकी देखा देखी मस्जिद को लेकर भी मुस्लिम समुदाय में कोर्ट से मिली हार के बाद भी टकराव के हालात बने।
जहां आम सहमति से जिला प्रशासन के साथ मिलकर मुस्लिम समुदाय का एक गुट मस्जिद के उसे हिस्से को हटाने पर राजी हो गया, जो अतिक्रमण में आ रहा था, वहीं दूसरा गुट इसके विरोध में था कि 100 साल पुरानी मस्जिद की एक ईंट भी हम नहीं हटने देंगे।
आज इस तनातनी में उज्जैन शहर में तनाव के हालात निर्मित हुए और खबर लिखे जाने तक उपद्रव करने वाले तत्वों पर जिला प्रशासन की कार्रवाई जारी थी।
उज्जैन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का गृह नगर भी है। एक दिन पहले ही उन्होंने अपने पैतृक निवास पर गैंती-फावड़ा चलाकर आमजन को यह संदेश दिया कि सिंहस्थ के लिए सब एक समान हैं।
जिसका भी घर, मकान, दुकान सड़क चौड़ीकरण में बाधक होगा, उसे हटाया जाएगा। मुख्यमंत्री की इस पहल के बाद यह लगने लगा था कि उज्जैन की शाही मस्जिद का मामला भी आम सहमति से निपट जाएगा, लेकिन सुबह हुए बवाल ने मस्जिद के विस्थापन को विवाद में खड़ा कर दिया है। चूंकि उज्जैन मुख्यमंत्री का गृह नगर होने से सब की नजर अब इस ओर लगी हुई है।
किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें
2028 में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होना है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु आएंगे। उनकी व्यवस्थाओं के लिए निर्माण कार्य चल रहे हैं। मास्टर प्लान के हिसाब से मार्गों का चौड़ीकरण चल रहा है।
सभी धर्म, समुदाय, समाज के लोग उसमें अपनी इच्छा से सहयोग कर रहे हैं। जिन लोगों के मकान या धर्मस्थल आ रहे हैं, वे स्वयं हटा रहे हैं। छत्री चौक में आ रही शाही मस्जिद का हिस्सा भी मुस्लिम समाजजन द्वारा स्वत: हटाया जा रहा है।
सभी से अपील करना चाहूंगा कि किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और शांति व्यवस्था बनाए रखने में शासन का सहयोग करें। - रोशन सिंह, कलेक्टर उज्जैन
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