शहर के चर्चित मामले में इस नेता को मिली क्लीन चिट: अब सौ टके का सवाल; क्या पार्टी में होगी फिर वापसी, यह है पूरा मामला
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के चर्चित कालरा हमले मामले में बीजेपी पार्षद और पूर्व एमआईसी सदस्य जीतू यादव (जाटव) को पुलिस जांच में क्लीन चिट मिल गई है। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने स्पष्ट किया है कि घटना में उनकी किसी प्रकार की संलिप्तता साबित नहीं हुई है। इसके साथ ही अब उनकी बीजेपी में वापसी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
क्या था पूरा मामला?
4 जनवरी 2025 को इंदौर के पार्षद कमलेश कालरा के घर पर हमला हुआ था। घटना के दौरान घर में मौजूद परिवार के सदस्यों और बच्चों के साथ मारपीट एवं अभद्र व्यवहार किए जाने के आरोप लगे थे। मामले में तत्कालीन एमआईसी सदस्य जीतू यादव पर हमला करवाने का आरोप लगाया गया था।
घटना के बाद पुलिस ने वीडियो फुटेज के आधार पर करीब 30 लोगों की पहचान की थी, जिनमें से 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान जीतू यादव का वॉइस सैंपल भी लिया गया और उन्हें संदिग्ध मानकर जांच की गई थी। मामले के राजनीतिक तूल पकड़ने के बाद बीजेपी ने संगठनात्मक कार्रवाई करते हुए जीतू यादव को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
जांच में क्या सामने आया?
पुलिस द्वारा मार्च 2025 में पेश किए गए चालान में 21 आरोपियों की गिरफ्तारी और छह आरोपियों के फरार होने की जानकारी दी गई थी। वहीं जीतू यादव की भूमिका की अलग से जांच जारी रखी गई।
जांच में सामने आया कि घटना के समय जीतू यादव घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। पुलिस के अनुसार वह उस दौरान बाणगंगा क्षेत्र स्थित अवंतिका गैस एजेंसी के एक कार्यक्रम में शामिल थे। घटनास्थल के वीडियो फुटेज में भी उनकी मौजूदगी का कोई प्रमाण नहीं मिला।
इतना ही नहीं, पीड़ित पक्ष की ओर से भी यह स्वीकार किया गया कि घटना के दौरान जीतू यादव मौके पर मौजूद नहीं थे। पुलिस ने उनके कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की भी जांच की, लेकिन मामले से जुड़ा कोई संदिग्ध संपर्क या बातचीत सामने नहीं आई।
जांच में यह भी पाया गया कि मुख्य आरोपी अभिलाष उर्फ अभि यादव ने अपने समर्थकों को एकत्रित कर कालरा के घर पर हमला कराया था। इन सभी तथ्यों के आधार पर पुलिस ने निष्कर्ष निकाला कि जीतू यादव की इस घटना में कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका साबित नहीं होती है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
जानकारी के अनुसार, नगर निगम के एक कर्मचारी द्वारा मकान संबंधी नोटिस देने के दौरान पार्षद कमलेश कालरा का विवाद हुआ था। इसी बातचीत में जीतू यादव का नाम भी सामने आया। बाद में जीतू यादव को लेकर कथित विवादित टिप्पणियों की एक रिकॉर्डिंग वायरल हो गई, जिससे उनके समर्थकों में नाराजगी फैल गई।
आरोप है कि इसी विवाद के बाद अभि यादव और उसके समर्थकों ने कालरा के घर पर हमला किया। चूंकि कमलेश कालरा को विधायक मालिनी गौड़ का करीबी माना जाता है, इसलिए यह मामला जल्द ही राजनीतिक खींचतान का विषय बन गया।
क्या होगी बीजेपी में वापसी?
पुलिस जांच में क्लीन चिट मिलने के बाद अब जीतू यादव की बीजेपी में वापसी को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस मामले के चलते उन्हें न केवल पार्टी से निष्कासित किया गया था, बल्कि एमआईसी सदस्य का पद भी गंवाना पड़ा था।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि हाल ही में सामने आए अन्य मामलों में पार्टी द्वारा अपेक्षाकृत नरम कार्रवाई की गई, जबकि जीतू यादव के खिलाफ कठोर कदम उठाए गए थे।
ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि जांच में निर्दोष पाए जाने के बाद क्या पार्टी उनके निष्कासन पर पुनर्विचार करेगी। हालांकि, बीजेपी की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय या बयान सामने नहीं आया है।
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