इस चार्ज पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार: केंद्र से पूछा; नियम का आधार क्या?, नोटिस जारी कर मांगा जवाब
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
UPI पेमेंट पर प्रस्तावित 0.4% शुल्क लगाने के केंद्र सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
यह शुल्क 15 अक्टूबर से 2 हजार रुपए से अधिक के मर्चेंट पेमेंट पर लागू होने की बात कही गई है। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि इस शुल्क को लागू करने के लिए नियम और निर्णय का आधार क्या है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय बेंच ने वकील अंजन दत्ता की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
याचिकाकर्ता ने उठाए नियम और 2 हजार रुपए की सीमा पर सवाल
याचिकाकर्ता अंजन दत्ता ने याचिका में सवाल उठाया कि 2 हजार रुपए की सीमा ही क्यों तय की गई है? इसके अलावा UPI और RuPay कार्ड के लिए अलग-अलग नियम बनाए जाने के आधार पर भी सवाल उठाया गया है।
याचिका में इस शुल्क को रद्द करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि सरकार ने जनता से पर्याप्त चर्चा किए बिना और स्पष्ट नियम बनाए बिना डिजिटल पेमेंट पर यह शुल्क तय किया है।
याचिका में Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह प्रावधान सरकार को यह तय करने की व्यापक शक्ति देता है कि किस डिजिटल पेमेंट सिस्टम को शुल्क से छूट मिलेगी और किस पर शुल्क लगाया जाएगा।
केंद्र ने कहा- आम लोगों के UPI ट्रांजैक्शन पर असर नहीं
केंद्र सरकार की ओर से पेश एएसजी एन. वेंकटरमण ने कोर्ट को बताया कि आम लोगों के बीच होने वाले UPI ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि देश में होने वाले करीब 96% छोटे-मोटे दुकानदारों से जुड़े भुगतानों पर प्रस्तावित शुल्क का असर नहीं पड़ेगा।
यानी प्रस्तावित शुल्क मुख्य रूप से तय सीमा से अधिक के मर्चेंट पेमेंट से संबंधित है, न कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले सामान्य UPI ट्रांजैक्शन से।
कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल शुल्क लागू करने पर रोक लगाने से इनकार करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि 2 हजार रुपए से अधिक के मर्चेंट UPI पेमेंट पर 0.4% शुल्क लगाने के नियम का कानूनी और नीतिगत आधार क्या है। अब इस मामले में केंद्र सरकार के जवाब के बाद आगे की सुनवाई होगी।
क्या आम UPI यूजर पर पड़ेगा असर?
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, हर UPI पेमेंट पर 0.4% शुल्क नहीं लगाया जाना है। आम व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने वाले P2P ट्रांजैक्शन पर शुल्क नहीं होने की बात केंद्र ने अदालत में कही है।
विवाद मुख्य रूप से 2 हजार रुपए से अधिक के मर्चेंट पेमेंट पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर है। इसीलिए सुप्रीम कोर्ट के सामने अब मुख्य सवाल यह है कि इस शुल्क को लागू करने का कानूनी आधार और प्रक्रिया क्या है।
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