पटाखा कारोबार में लापरवाही का बारूद: सुरक्षा इंतजामों की खुल रही पोल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अवैध कारोबार : कार्रवाई के बाद भी नहीं थमती कहानी; राऊ में बारूद के ढेर पर बाजार, दुकानों से पटाखों की बिक्री, निगरानी पर उठे सवाल, रीजनल पार्क से राऊ तक पटाखों का कारोबार चर्चा में, जांच और जवाबदेही की मांग, त्योहार की चमक के बीच सुरक्षा का संकट, अवैध पटाखा बिक्री पर लगाम कब?
दीपावली से पहले अवैध पटाखा कारोबार और सुरक्षा में लापरवाही का मुद्दा गरमाया हुआ है। राजेंद्र नगर व राऊ में अवैध गोदाम सील होने और भारी मात्रा में बारूद मिलने के बाद, अब प्रशासन ने खेरची पटाखा बाजारों के लिए कड़े नियम और पारदर्शी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
दीपावली आते ही बाजारों में रोशनी बढ़ती है, पटाखों की मांग तेज होती है और आतिशबाजी के कारोबार में लाखों-करोड़ों रुपये का लेनदेन होने लगता है। लेकिन इस चमक के पीछे एक ऐसी समस्या भी हर साल सिर उठाती है, जो त्योहार की खुशियों पर खतरा बनकर मंडराती है।
शहर और शहर के समीप राऊ इलाके में बिना अनुमति पटाखों की बिक्री, नियमों के विपरीत भंडारण, रहवासी इलाकों में गोदाम और सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी की शिकायतें सामने आती हैं।
पुलिस और प्रशासन छापे मारते हैं, पटाखे जब्त होते हैं, दुकानें और गोदाम सील किए जाते हैं, आरोपियों पर प्रकरण दर्ज होते हैं। कुछ समय के लिए सख्ती दिखाई देती है, लेकिन अगले त्योहार के आसपास फिर ऐसे मामले सामने आने लगते हैं।
सवाल यह नहीं कि प्रशासन कार्रवाई कर रहा है या नहीं। सवाल यह है कि कार्रवाई के बावजूद अवैध कारोबार की गुंजाइश आखिर बच कैसे जाती है? क्या समस्या केवल कुछ दुकानदारों तक सीमित है, या इसके पीछे भंडारण से लेकर सप्लाई और बिक्री तक फैली ऐसी व्यवस्था है, जिस पर सालभर निगरानी की जरूरत है? इंदौर में दीपावली से पहले सामने आए हालिया मामले इसी बड़े सवाल की ओर ध्यान खींचते हैं।
हर साल वही तस्वीर, त्योहार से पहले बढ़ती सख्ती... पटाखों का कारोबार सीजन आधारित है। दीपावली के आसपास मांग बढ़ने के कारण व्यापारी अधिक माल जुटाते हैं और बिक्री के लिए अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाते हैं।
वैध कारोबार में यह सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन जब भंडारण की अनुमति, निर्धारित क्षमता, बिक्री के स्थान और अग्नि सुरक्षा के नियमों की अनदेखी होती है, तो यही कारोबार जोखिम में बदल जाता है।
सामान्य दुकानों से पटाखे बेचे जाने की शिकायतें, बिना उचित दस्तावेजों के माल जमा करने के मामले और रहवासी इलाकों में गोदाम मिलने की घटनाएं बताती हैं कि निगरानी का दायरा केवल लाइसेंसधारी दुकानों तक सीमित नहीं रह सकता।
जिन स्थानों पर पटाखे रखे जाते हैं, जहां से उनकी आपूर्ति होती है और जहां अंतिम बिक्री होती है, उन सभी कड़ियों की जांच जरूरी है।
हर साल त्योहार से पहले अभियान चलाना आवश्यक है, लेकिन यदि अवैध कारोबार बार-बार सामने आता है, तो अभियान की प्रभावशीलता की समीक्षा भी उतनी ही जरूरी है। केवल कार्रवाई की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं; यह देखना भी जरूरी है कि जिन स्थानों पर अनियमितता मिली, वहां दोबारा ऐसा कारोबार शुरू तो नहीं हुआ।
राजेंद्र नगर में 197 कार्टन पटाखे, रहवासी इलाके में था गोदाम
हालिया कार्रवाई का एक बड़ा उदाहरण राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने आनंद विहार कॉलोनी के गेट नंबर-2 के पास स्थित एक गोदाम पर छापा मारकर विभिन्न कंपनियों के 197 कार्टन पटाखे जब्त किए।
इनकी अनुमानित कीमत करीब 2 लाख 62 हजार रुपए बताई गई। पुलिस के अनुसार, गोदाम संचालक वैध भंडारण और बिक्री संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। संचालक रवि को गिरफ्तार किया गया और उसके खिलाफ विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस यह भी जांच कर रही थी कि वहां से पटाखों की आपूर्ति किन क्षेत्रों में की जा रही थी।
यह मामला कई सवाल खड़े करता है। यदि किसी घनी आबादी वाले इलाके में बड़ी मात्रा में पटाखे रखे जा रहे थे, तो इसकी जानकारी संबंधित विभागों तक पहले क्यों नहीं पहुंची? क्या गोदाम की गतिविधियों पर किसी की नजर नहीं थी, या शिकायत मिलने के बाद ही कार्रवाई संभव हो सकी?
इन सवालों का जवाब जांच से ही मिल सकता है, लेकिन इतना स्पष्ट है कि रहवासी क्षेत्र में पटाखों का अवैध भंडारण संभावित दुर्घटना का खतरा बढ़ा सकता है। मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू सप्लाई नेटवर्क है।
पुलिस के अनुसार, लोडिंग रिक्शाओं के माध्यम से आसपास के क्षेत्रों में पटाखे पहुंचाए जा रहे थे। यदि यह जानकारी जांच में पुष्ट होती है, तो केवल गोदाम संचालक की भूमिका तक सीमित रहने के बजाय यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि माल कहां से आया, किन लोगों तक पहुंचाया गया और बिक्री के अन्य ठिकाने कहां थे।
राऊ में गोदाम सील, अग्नि सुरक्षा की खामियां सामने... राऊ क्षेत्र में भी प्रशासन ने पटाखों के कारोबार से जुड़ी सुरक्षा संबंधी अनियमितताओं पर कार्रवाई की है। भारत फायर वर्क्स नाम से संचालित दुकान और गोदाम के निरीक्षण में अग्नि सुरक्षा प्रबंधन में कमियां तथा निर्धारित क्षमता से अधिक पटाखा सामग्री रखे जाने की बात सामने आने पर परिसर सील कर दिया गया। यह कार्रवाई कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देशन में की गई।
इसी क्षेत्र के पिगडंबर में सुंदरम फायरक्रैकर एजेंसी के गोदाम पर भी प्रशासन की कार्रवाई की खबर सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, वहां अग्नि सुरक्षा के इंतजामों में खामियां थीं और गोदाम तक पहुंचने वाला रास्ता इतना संकरा था कि आपात स्थिति में अग्निशमन वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती थी।
इसके अलावा लाइसेंस की शर्तों और परिसर में पटाखों के भंडारण एवं बिक्री को लेकर भी अनियमितताएं बताई गईं। प्रशासन ने गोदाम सील कर दिया। इन कार्रवाइयों से स्पष्ट होता है कि समस्या केवल अवैध माल रखने तक सीमित नहीं है।
कहीं निर्धारित क्षमता से अधिक भंडारण का मुद्दा है, तो कहीं आग बुझाने के उपकरण और आपातकालीन पहुंच जैसे बुनियादी इंतजामों पर सवाल हैं। यदि दुर्घटना के समय दमकल वाहन ही मौके तक नहीं पहुंच पाए, तो नुकसान रोकना बेहद मुश्किल हो सकता है।
दुकानों से बिक्री की शिकायतें, निगरानी का दायरा कितना बड़ा?..राऊ क्षेत्र में सामान्य दुकानों से पटाखे बेचे जाने के आरोप भी हैं। यह मुद्दा एक व्यापक सवाल उठाता है क्या त्योहार के दौरान पटाखों की बिक्री पर निगरानी केवल निर्धारित बाजारों और अधिकृत दुकानों तक सीमित रह जाती है?
रीजनल पार्क के पटाखा बाजार पर भी सवाल, केवल सुरक्षा ही नहीं व्यवस्था की पारदर्शिता भी जरूरी... इंदौर के रीजनल पार्क स्थित अस्थायी थोक पटाखा बाजार की व्यवस्था को लेकर भी हालिया खबरों में जमीन आवंटन, दुकान निर्माण और लाइसेंस प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।
आवंटन प्रक्रिया पूरी होने से पहले निर्माण और बाजार संचालन शुरू होने के आरोपों का उल्लेख है। लाइसेंस वितरण की पारदर्शिता को लेकर उठी शिकायतों तथा जमीन के उपयोग से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों का भी जिक्र है।
कार्रवाई होती है, फिर भी समस्या क्यों लौट आती है?...इस पूरी तस्वीर का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है। हर साल दीपावली से पहले अभियान चलाना, गोदाम सील करना और अवैध पटाखे जब्त करना जरूरी है, लेकिन इन कार्रवाइयों का स्थायी असर तभी दिखाई देगा, जब उनके बाद की प्रक्रिया भी उतनी ही मजबूत हो।
अब कार्रवाई की संख्या नहीं, परिणाम देखने का समय... राजेंद्र नगर में 197 कार्टून पटाखों की जब्ती, राऊ में दुकान-गोदाम सील होने और पिगडंबर में सुरक्षा संबंधी खामियां सामने आने के मामले बताते हैं कि इस साल भी प्रशासन को कई स्तरों पर हस्तक्षेप करना पड़ रहा है।
इन कार्रवाइयों का सबसे बड़ा परिणाम तब माना जाएगा, जब रहवासी इलाकों में अवैध भंडारण की शिकायतें कम हों, बिना अनुमति बिक्री पर प्रभावी रोक लगे और सुरक्षा मानकों का पालन नियमित व्यवस्था का हिस्सा बने।
सवाल सिर्फ इतना नहीं कि इस बार कितने पटाखे जब्त हुए या कितने गोदाम सील किए गए। असली सवाल यह है कि अगली दीपावली तक ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या बदलेगा।
त्योहार की खुशियां तभी सुरक्षित रहेंगी, जब कार्रवाई का लक्ष्य केवल अवैध माल पकड़ना नहीं, बल्कि उस व्यवस्था को सुधारना होगा जिसमें चोरी-छिपे कारोबार की गुंजाइश बनी रहती है और किसी हादसे के बाद सबक लेने की नौबत आती है।
पहला सवाल... क्या निगरानी पहले से होती है या शिकायत के बाद ही कार्रवाई होती है? यदि अवैध गोदाम का पता मुखबिर की सूचना मिलने पर चलता है, तो यह भी देखना होगा कि नियमित निरीक्षण और स्थानीय सूचना तंत्र को कैसे बेहतर बनाया जाए।
दूसरा सवाल... क्या सप्लाई की पूरी कड़ी की जांच होती है? अवैध भंडारण के मामले में माल कहां से आया, किसने पहुंचाया और किन दुकानों या व्यक्तियों तक भेजा गया, इसका पता लगाना जरूरी है। केवल एक गोदाम सील होने से यह सुनिश्चित नहीं होता कि उससे जुड़ा पूरा नेटवर्क समाप्त हो गया।
तीसरा सवाल... क्या कार्रवाई के बाद दोबारा जांच होती है? जिन दुकानों या गोदामों को सील किया जाता है, वहां नियमों के पालन की स्थिति और किसी अन्य स्थान पर उसी कारोबार के दोबारा शुरू होने की संभावना पर भी नजर रखनी चाहिए।
चौथा सवाल... क्या जिम्मेदारी तय होती है? यदि निरीक्षण में बार-बार गंभीर खामियां मिलती हैं, तो यह देखना जरूरी है कि लाइसेंस जारी करने, नवीनीकरण और सुरक्षा सत्यापन की प्रक्रिया में कहां सुधार की जरूरत है।
इन सवालों का उद्देश्य कार्रवाई को कमतर आंकना नहीं, बल्कि यह समझना है कि कार्रवाई के परिणाम लंबे समय तक कैसे बनाए रखे जा सकते हैं। पटाखों से जुड़ी दुर्घटना का जोखिम केवल दुकान या गोदाम तक सीमित नहीं रहता।
आग फैलने पर आसपास के मकान, वाहन, दुकानें और राहगीर भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। इसलिए सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की ढिलाई का असर व्यापक हो सकता है। पुलिस कमिश्नरेट की ओर से भी पटाखा दुकानों और बाजारों के नियमित निरीक्षण, अग्निशमन उपकरणों, रेत और पानी की व्यवस्था तथा रहवासी क्षेत्रों में अवैध भंडारण रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
बिना आवश्यक अनुमति कारोबार करने, निर्धारित क्षमता से अधिक भंडारण करने या सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों पर साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। इससे वैध व्यापारियों को अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
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