200 बोरी लकड़ी बूरा जब्त होने के 5 दिन बाद भी कार्रवाई शून्य: ‘नेचुरल लिविंग’ पर प्रक्रिया की आड़ में मेहरबानी
KHULASA FIRST
संवाददाता

वन विभाग की भूमिका पर सवाल
चंचल भारतीय 98936-44317, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
वन संपदा की सुरक्षा का ढोंग और नियम-कायदों की दुहाई देने वाले वन विभाग के दोहरे रवैये का फिर खुलासा हुआ है। सागौर कुटी उड़नदस्ता टीम ने बबूल लकड़ी के पाउडर से लदी आयशर गाड़ी पकड़ी लेकिन पांच दिन बाद भी विभाग ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका है।
जिस ‘नेचुरल लिविंग इंडस्ट्रीज’ का आपराधिक रिकॉर्ड दागदार है और जिसके खिलाफ दो मामले न्यायालय में लंबित बताए जा रहे हैं, उस पर तत्काल शिकंजा कसने के बजाय जांच का खेल खेला जा रहा है। यह महज़ प्रशासनिक सुस्ती है या फिर नियम-कायदों का जाल बुनकर माफियाओं की तरफदारी करने की कोई सोची-समझी रणनीति?
बुधवार सुबह उड़नदस्ता प्रभारी राजेंद्र राठौड़ वनपाल एवं धर्म सोलंकी वनरक्षक ने मुखबिर की सूचना पर वाहन एमपी 13 जीबी 5521 से 200 बोरियां जब्त की थीं। गाड़ी को बगदून थाना परिसर के पास खड़ा कर जांच का झुनझुना वन परिक्षेत्र अधिकारी मांडव सचिन सायदे को थमा दिया गया।
सवाल है रंगे हाथ माल पकड़े जाने के चार दिन बाद भी जांच के नाम पर कागज़ ही क्यों दौड़ाए जा रहे हैं? क्या जांच हस्तांतरण का यह लंबा रास्ता केवल समय खींचने और मामले की आंच को ठंडा करने की तरकीब है?
इंदौर सीसीएफ पीएन मिश्रा के संज्ञान में मामला आने और डीएफओ विजयनथम टी आर को दिए गए निर्देशों के बावजूद जमीनी सुस्ती गंभीर संदेह पैदा करती है। उपवन मंडल अधिकारी सुरेश बरोले के अनुसार संस्था की लाइसेंस प्रक्रिया भोपाल में लंबित है और एबीएस राशि का ड्रॉफ्ट जमा हो चुका है।
विभाग का यह तर्क बुरादे की पुष्टि और ‘नॉर्मली ट्रेडेड कमोडिटीज’ की जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई होगी, आदतन आरोपी कंपनी को ढाल प्रदान करने का प्रयास नहीं है? जिस कंपनी का लाइसेंस तत्काल निलंबित होना था, उसे प्रक्रियाओं का हवाला देकर बचाना अप्रत्यक्ष संरक्षण नहीं कहा जाएगा?
थाने के बाहर खड़ी जब्त गाड़ी वन विभाग की कार्यशैली और निष्पक्षता का मजाक उड़ा रही है। जब अपराध का इतिहास सामने है और माल जब्त है, तब भी विभाग के हाथ कांपना सोचने पर मजबूर करता है असली निष्ठा कानून के प्रति है या फिर पर्दे के पीछे सौदेबाजी के?
समय रहते इस प्रकरण में कड़े और पारदर्शी कदम नहीं उठाए गए, तो वन विभाग पर उठ रहे यह सवाल उसकी साख को पूरी तरह धूमिल कर देंगे।
कंपनी के ‘प्रवक्ता’ बने उपवन मंडल अधिकारी सुरेश बरोले... उपवन मंडल अधिकारी सुरेश बरोले की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ठोस वैधानिक कार्रवाई करने के बजाय जिम्मेदार अधिकारी का रुख बेहद संदेहास्पद और पक्षपातपूर्ण बना हुआ है।
‘खुलासा फर्स्ट’ प्रतिनिधि से बातचीत में निष्पक्ष जांच के बजाय कंपनी का बचाव वाला बरोले का बयान जिम्मेदार शासकीय अधिकारी के बजाय आरोपी कंपनी के प्रवक्ता जैसा प्रतीत हुआ। वाहन जब्ती और आगामी कार्रवाई के प्रश्न पर वे जब्ती की वैधानिकता जांचने के स्थान पर कंपनी के पक्ष में सफाई देते रहे।
कंपनी की खुली वकालत कर कहा कंपनी की अनुमति प्रक्रिया भोपाल में प्रचलन में है और एबीएस राशि का मांग पत्र डिमांड ड्रॉफ्ट जमा किया जा चुका है। जब्त सामग्री को सामान्य व्यापार की श्रेणी एनटीसी का बताते हुए मामले को दबाने का प्रयास किया।
विभागीय समीक्षा और वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप की मांग
शासकीय पद पर रहते हुए निजी संस्था की पैरवी विभागीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। अधिकारी द्वारा यह तर्क दिया जाना कि लिखित पुष्टि जांच अधिकारी की रिपोर्ट के बाद होगी, केवल प्रक्रिया की आड़ लेकर लीपापोती का प्रयास है।
देखना यह होगा मुख्य वन संरक्षक पीएन मिश्रा, उपवन मंडल अधिकारी सुरेश बरोले के इस संदेहास्पद वक्तव्य और मामले की लीपापोती का संज्ञान लेते हैं या नहीं। क्या धार वन मंडल द्वारा जब्त वाहन, सामग्री एवं परिवहन दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच हो पाएगी?
वन विभाग का दायित्व नियमों का कड़ाई से पालन और निष्पक्ष जांच करना है, किसी दागी कंपनी की दलाली या वकालत करना नहीं। उपवन मंडल अधिकारी को तर्कों की आड़ लेने के स्थान पर जांच के वास्तविक तथ्य और आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए। ‘खुलासा फर्स्ट’ इस पूरे घटनाक्रम और अफसरों की साठगांठ का खुलासा जारी रखेगा।
कंपनी के बिल और दस्तावेज लिए हैं
मुखबिर की सूचना पर आयशर वाहन की जांच की गई। उसमें करीब 200 बैग बबूल की लकड़ी का चूरा मिला। चालक से वाहन के साथ नेचुरल लिविंग कंपनी से संबंधित बिल एवं अन्य दस्तावेज प्राप्त किए हैं। जांच वन परिक्षेत्र अधिकारी मांडव सचिन सौयदे को सौंपी गई है। - राजेंद्र राठौर, वनपाल एवं प्रभारी, उड़नदस्ता, वन विभाग, धार
प्रकरणों का लिया जाएगा संज्ञान
उक्त प्रकरण के संबंध में उपवन मंडल अधिकारी को नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं साथ ही नेचुरल लिविंग इंडस्ट्रीज से संबंधित पूर्व में दर्ज वन अपराध प्रकरणों की भी जांच कर उन्हें वर्तमान प्रकरण के परिप्रेक्ष्य में संज्ञान में लेने के निर्देशित किया है। उपलब्ध अभिलेखों एवं तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।” - विजय नाथम टीआर, वन मंडल अधिकारी, धार
तय की जाएगी जिम्मेदारी
वन परिक्षेत्र अधिकारी एवं उपवन मंडल अधिकारी को तलब कर प्रकरण की वस्तुस्थिति, कार्रवाई तथा उपलब्ध अभिलेखों की समीक्षा के निर्देश दिए जाएंगे। किसी भी स्तर पर अनियमितता, लापरवाही अथवा वनों को क्षति पहुंचाने वाले व्यक्तियों को संरक्षण की पुष्टि होने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही निर्धारित कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। वन अपराधों एवं वनों के अहित से संबंधित किसी भी लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा। -पीएन मिश्रा, मुख्य वन संरक्षक वन वृत्त इंदौर
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