चीनी की कीमतों में जल्द आ सकती है नरमी: इस संगठन ने किया दावा; देश में पर्याप्त स्टॉक, त्योहारों की मांग की चिंता नहीं
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
देश के कई हिस्सों में चीनी की कीमतों में तेजी के बीच इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने राहत की बात कही है। संगठन के मुताबिक, देश में चीनी की कोई बुनियादी कमी नहीं है और आने वाले दिनों में बाजार में सप्लाई बढ़ने के साथ खुदरा कीमतों में नरमी आ सकती है।
पिछले एक महीने में चीनी के दाम 20% से ज्यादा बढ़कर करीब 56 से 60 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। कीमतों पर नियंत्रण और घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है।
त्योहारों की मांग के लिए पर्याप्त चीनी
ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर के मुताबिक, देश में चीनी की सप्लाई को लेकर कोई बुनियादी समस्या नहीं है। हालिया तेजी के पीछे जमाखोरी, सट्टेबाजी और मौसम से जुड़ी वजहों से उत्पादन प्रभावित होने जैसे कारण बताए जा रहे हैं।
उनका कहना है कि आने वाले त्योहारी सीजन की मांग पूरी करने के लिए देश में पर्याप्त चीनी उपलब्ध है। आयात और घरेलू बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आने के बाद कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर के आयात को दी मंजूरी
चीनी की कीमतों में तेजी के बाद केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी।
सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध कराकर कीमतों को नियंत्रित करना है।इंडस्ट्री के मुताबिक, आयातित चीनी की उपलब्धता बढ़ने के बाद बाजार में सप्लाई की स्थिति बेहतर हो सकती है।
2025-26 सीजन में 2.79 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) ने भी घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता को पर्याप्त बताया है।
संगठन ने 2025-26 सीजन के लिए नेट शुगर प्रोडक्शन का अनुमान 2.79 करोड़ टन पर बरकरार रखा है। इस अनुमानित उत्पादन में से करीब 24 लाख टन चीनी इथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट की गई है।
ब्राजील से आयात होगी चीनी, 40-45 दिन लग सकते हैं
NFCSF के मुताबिक, आयातित चीनी की कुछ खेप 15 अक्टूबर से पहले भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकती हैं। संगठन के अध्यक्ष प्रकाश नाईकनवरे के अनुसार, थाईलैंड में भी उपलब्धता प्रभावित होने के कारण फिलहाल ब्राजील से आयात प्रमुख विकल्प है।
ब्राजील से भारत तक चीनी पहुंचने में करीब 40 से 45 दिन लग सकते हैं। हालांकि वास्तविक समय सीमा DGFT की मंजूरी, लेटर ऑफ क्रेडिट की प्रक्रिया और बंदरगाहों पर भीड़ जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
31 अक्टूबर की डेडलाइन में मिल सकती है छूट
सरकार ने रॉ शुगर के आयात के लिए 31 अक्टूबर की समय सीमा तय की है। हालांकि NFCSF के मुताबिक, जो खेप निर्धारित समय से पहले भेजी जा चुकी होंगी, उन्हें बाद में भारत पहुंचने की अनुमति मिलने की संभावना है। इससे समुद्री रास्ते में पहुंच चुकी खेपों पर समय सीमा का दबाव कम हो सकता है।
तटीय राज्यों में पहले पहुंचेगी आयातित चीनी
ब्राजील से आने वाली रॉ शुगर की शुरुआती उपलब्धता देश के तटीय राज्यों में होने की उम्मीद है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में बंदरगाहों के जरिए आयातित चीनी पहले पहुंच सकती है। इसके बाद सड़क और रेल नेटवर्क के जरिए इसे उत्तर भारत के राज्यों तक भेजा जाएगा।
तय कोटे से काफी कम हुआ चीनी का निर्यात
NFCSF के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अनुकूल नहीं होने के कारण भारत ने 20 लाख टन के तय निर्यात कोटे में से करीब 8 लाख टन चीनी का ही निर्यात किया।
संगठन के अनुसार, अगर निर्यात पर कोई अतिरिक्त पाबंदी भी नहीं होती, तब भी कुल निर्यात 10 लाख टन से ज्यादा जाने की संभावना नहीं थी।
30 सितंबर तक चीनी के निर्यात पर रोक
घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 13 मई से 30 सितंबर तक चीनी के निर्यात पर रोक लगा रखी है।
सरकार की आयात नीति और इंडस्ट्री के ताजा अनुमान के मुताबिक आने वाले दिनों में घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ सकती है। इससे त्योहारी सीजन में सप्लाई बेहतर होने और खुदरा कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है।
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