AI से तैयार किए फर्जी NEET पेपर: पेपर लीक का झांसा देकर वसूले रुपए; खरीदार बनकर साइबर सेल ने दबोचा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET के नाम पर छात्रों से ठगी करने वाले एक लॉ स्टूडेंट को इंदौर क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है। आरोपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स और ChatGPT की मदद से फर्जी प्रश्न पत्र तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल किए और परीक्षा में सफलता का झांसा देकर छात्रों से पैसे वसूले। मामले का खुलासा तब हुआ जब कोटा साइबर सेल ने खरीदार बनकर आरोपी से संपर्क किया और उसके पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी अक्षय मालवीय इंदौर का रहने वाला है और लॉ की पढ़ाई कर रहा है। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने सोशल मीडिया पर लोकप्रियता और जल्दी पैसे कमाने की चाह में यह पूरा फर्जीवाड़ा शुरू किया था। आरोपी ने बताया कि उसने ChatGPT समेत अन्य AI आधारित एप्लीकेशन की मदद से ऐसे प्रश्न पत्र तैयार किए, जिन्हें देखकर छात्रों को असली NEET पेपर होने का भ्रम हो जाए।
इंस्टाग्राम पर 8 हजार लाइक्स मिलने के बाद बढ़ा हौसला
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने सबसे पहले बिना NEET का नाम लिखे कुछ प्रश्न पत्र सोशल मीडिया पर पोस्ट किए थे, लेकिन उन्हें अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद जब NEET परीक्षा को लेकर चर्चाएं तेज हुईं और दोबारा परीक्षा की अफवाहें फैलने लगीं, तब उसने NEET के नाम से फर्जी प्रश्न पत्र पोस्ट करना शुरू कर दिया।
अक्षय ने पूछताछ में बताया कि उसकी एक पोस्ट पर करीब 8 हजार लाइक्स आए थे और सैकड़ों छात्रों के मैसेज मिलने लगे थे। सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता और फॉलोअर्स की संख्या देखकर उसने इसे कमाई का जरिया बना लिया।
फर्जी लिंक भेजकर छात्रों से वसूले रुपए
क्राइम ब्रांच के अनुसार आरोपी ने इंस्टाग्राम पर फर्जी लिंक और प्रीमियम प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने का दावा करते हुए करीब 30 से 35 छात्रों से पैसे वसूले। छात्रों को विश्वास दिलाया जाता था कि उन्हें परीक्षा से पहले महत्वपूर्ण प्रश्न और पेपर उपलब्ध कराए जाएंगे।
पुलिस का कहना है कि आरोपी छात्रों की परीक्षा संबंधी चिंता और बेहतर अंक लाने की इच्छा का फायदा उठा रहा था। प्रारंभिक जांच में कई छात्रों से ऑनलाइन भुगतान प्राप्त होने की जानकारी भी सामने आई है।
कोटा साइबर सेल ने खरीदार बनकर बिछाया जाल
मामले की शुरुआत तब हुई जब आरोपी की पोस्ट कोटा साइबर सेल की निगाह में आ गई। साइबर सेल की टीम ने खरीदार बनकर उससे संपर्क किया और बातचीत शुरू की। आरोपी का विश्वास जीतने के लिए उसके खाते में कुछ रकम भी ट्रांसफर की गई।
इसी दौरान साइबर सेल की दूसरी टीम आरोपी की लोकेशन, सोशल मीडिया गतिविधियों और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की जानकारी जुटाने में लगी रही। पर्याप्त सबूत मिलने के बाद कोटा पुलिस ने पूरी जानकारी इंदौर क्राइम ब्रांच को सौंप दी, जिसके बाद कार्रवाई की गई।
इंस्टाग्राम ने दो बार भेजी चेतावनी
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी की गतिविधियां संदिग्ध पाए जाने पर इंस्टाग्राम ने उसे दो बार चेतावनी संदेश भेजे थे। प्लेटफॉर्म ने उसे नियमों के उल्लंघन की जानकारी दी थी, लेकिन उसने चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया। बाद में उसका अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया।
घर से उठाकर कंट्रोल रूम लाया गया
क्राइम ब्रांच के टीआई नीरज मेढ़ा के अनुसार एसआईटी ने 20 जून को आरोपी को हिरासत में लिया। पुलिस टीम उसके घर पहुंची और परिजनों को कोटा पुलिस से प्राप्त ईमेल और शिकायत की जानकारी दी। इसके बाद उसे रीगल स्थित कंट्रोल रूम लाकर पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान आरोपी के माता-पिता और अन्य परिजन भी मौजूद रहे। पुलिस ने परिवार को पूरे मामले की जानकारी दी और बताया कि मामले में वरिष्ठ अधिकारी आगे की कार्रवाई करेंगे।
पुलिस कर रही डिजिटल साक्ष्यों की जांच
फिलहाल क्राइम ब्रांच आरोपी के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने कुल कितनी राशि वसूली और क्या इस फर्जीवाड़े में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि छात्रों और अभिभावकों को ऐसे किसी भी दावे पर विश्वास नहीं करना चाहिए, जिसमें परीक्षा का प्रश्न पत्र, लीक पेपर या सफलता की गारंटी देने का दावा किया जाए। साइबर अपराधियों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से इस तरह की ठगी लगातार की जा रही है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।
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