पूर्व कर्मचारियों का अपहरण कर होटल में बनाया बंधक: बेल्ट से पीटने के साथ सिगरेट से दागा; जान से मारने की धमकी दी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
विजयनगर थाना क्षेत्र में फर्जी एडवाइजरी कंपनी से जुड़े अपहरण, बंधक बनाकर मारपीट और प्रताड़ना के मामले में पुलिस ने कंपनी के संचालक समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोप है कि कंपनी छोड़ चुके दो पूर्व कर्मचारियों का अपहरण कर उन्हें होटल में बंधक बनाया गया, जहां बेल्ट, लात-घूंसों से बेरहमी से पीटा गया, जलती सिगरेट से शरीर दागा गया और जान से मारने की धमकी दी गई।
पुलिस ने मामले में कंपनी संचालक मनीष पांडे, अभिषेक कक्कड़, मोहित शर्मा निवासी ऋषिकेश, अरुण निवासी देवास और अभिषेक रघुवंशी निवासी नर्मदापुरम के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी मनीष पांडे इन्फीनिक्स इन्फोटेक नाम से एडवाइजरी कंपनी संचालित करता था। कुछ समय पहले तुकोगंज पुलिस ने इस कंपनी पर छापा मारकर फर्जीवाड़े का खुलासा किया था। कार्रवाई के बाद कंपनी की साख प्रभावित हुई और कई कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दी।
जांच में सामने आया कि मनीष पांडे को संदेह था कि उसके पूर्व कर्मचारी कुंदन मीणा निवासी सीहोर और सौरभ कुमार निवासी धार ने ही पुलिस को कंपनी की जानकारी दी थी। उसका यह भी आरोप था कि दोनों ने कंपनी के ग्राहकों की जानकारी अन्य लोगों तक पहुंचाकर उसे आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
पीड़ित कुंदन मीणा और सौरभ कुमार ने पुलिस को बताया कि वे करीब ढाई वर्ष तक कंपनी में कार्यरत थे। अप्रैल 2026 में पुलिस कार्रवाई के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी, क्योंकि कंपनी आधे वेतन पर काम करने का दबाव बना रही थी।
दोनों ने बताया कि 27 मई की रात वे जंजीरवाला चौराहे पर खाना खाने निकले थे। इसी दौरान मनीष पांडे अपने साथियों के साथ टाटा हैरियर कार से वहां पहुंचा और बातचीत के बहाने दोनों को जबरन कार में बैठाकर विजयनगर स्थित होटल गैलेक्सी पार्क ले गया।
पीड़ितों के अनुसार उन्हें होटल के कमरा नंबर 6 और 7 में बंद कर दिया गया। वहां मनीष पांडे और उसके साथियों ने बेल्ट, लात-घूंसों से जमकर मारपीट की। इतना ही नहीं, जलती हुई सिगरेट से उनके शरीर के कई हिस्सों को दाग दिया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।
आरोपियों ने दोनों के मोबाइल फोन भी छीन लिए और अगले दिन दोपहर तक उन्हें होटल में बंधक बनाकर रखा। इसके बाद उन्हें कंपनी के कार्यालय ले जाया गया, जहां भी धमकाया गया और दबाव बनाया गया।
पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि जब वे अगले दिन तक घर नहीं लौटे और उनके मोबाइल बंद मिले तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू कर दी। इसकी जानकारी आरोपियों को लगने पर उन्होंने शाम करीब छह बजे दोनों को छोड़ दिया, लेकिन किसी को घटना की जानकारी देने पर जान से मारने की धमकी भी दी।
घर पहुंचने के बाद दोनों ने परिजनों को पूरी घटना बताई। इसके बाद 30 जून को वे परिजनों के साथ विजयनगर थाने पहुंचे और मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस सूत्रों के अनुसार घटना के बाद आरोपी करीब डेढ़ महीने तक पीड़ितों पर समझौता करने और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाते रहे। इसके बाद पुलिस ने गोपनीय तरीके से कार्रवाई करते हुए सभी मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
कुंदन मीणा ने पुलिस को यह भी बताया कि कंपनी के अन्य कर्मचारी जितेंद्र झारिया, राहुल कन्नोजे और शिवानी जाटव के साथ भी पहले मारपीट की जा चुकी है, लेकिन डर के कारण उन्होंने पुलिस में शिकायत नहीं की।
पीड़ितों के अनुसार 31 मई को मनीष पांडे ने जितेंद्र झारिया को फोन कर जान से मारने की धमकी भी दी थी। जितेंद्र ने इस बातचीत की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी थी, जिसे बाद में पुलिस को सौंप दिया गया।
विजयनगर थाना पुलिस अब पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है। पुलिस अन्य संभावित पीड़ितों, कंपनी की गतिविधियों तथा फर्जी एडवाइजरी नेटवर्क से जुड़े अन्य तथ्यों की भी जांच में जुटी है।
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