पहले धर्मपत्नी से साझा किया अपना संकल्प फिर आस्था की राह पर निकले दिग्विजय सिंह: खुलासा फर्स्ट से बातचीत में बोलीं अमृता- यह देश और समाज के लिए संकल्प
KHULASA FIRST
संवाददाता

सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता के साए की तरह साथ हैं उनकी पत्नी
नर्मदा परिक्रमा से सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा तक, साथ से मिला मजबूत संबल
पूर्व सीएम की यात्रा को अमृता ने बताया व्यापक उद्देश्य से जुड़ा प्रयास और समाज से जुड़ा संकल्प
शाजापुर से लौटकर हेमंत उपाध्याय, 99930-99008, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कोई यात्रा पैरों से तय होती है, कोई मन के संकल्प से, लेकिन कुछ यात्राएं ऐसी होती हैं, जिनकी शुरुआत रास्तों पर कदम रखने से पहले घर में जीवनसाथी के साथ हुई बातचीत से होती है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ के पीछे भी ऐसा ही एक प्रसंग है।
यात्रा पर निकलने से पहले दिग्विजय सिंह ने अपनी पत्नी अमृता राय से चर्चा की और उनकी राय मांगी। अमृता ने इस पहल को अच्छा मानते हुए सहजता से स्वीकार किया। खुलासा फर्स्ट से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति की निजी यात्रा नहीं, बल्कि देश और समाज से जुड़ा प्रयास है।
अमृता राय ने बताया कि यात्रा की तैयारी के समय मन में कुछ दुविधा और उद्वेलन था। करीब 950 किलोमीटर का लंबा रास्ता, लगातार पैदल चलने की चुनौती और मंजिल तक पहुंचने का संकल्प- इन सबके बीच सवाल था कि यात्रा कैसे पूरी होगी,लेकिन उन्होंने इसे केवल कठिनाइयों के नजरिये से नहीं देखा। उनके लिए इस प्रयास का उद्देश्य महत्वपूर्ण था, इसलिए उन्होंने सहजता से अपनी सहमति दी।
20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन से शुरू हुई यह पदयात्रा ओरछा होते हुए अयोध्या पहुंचेगी। इसे करीब 70 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य है। धार्मिक आस्था, सनातन परंपराओं और मताधिकार की रक्षा इसके घोषित उद्देश्यों में शामिल हैं।
शनिवार शाम यात्रा शाजापुर पहुंची। उज्जैन के करेड़ी माताजी मंदिर में दर्शन के बाद पदयात्रा जादमी, भदौनी और दुपाड़ा जोड़ होते हुए मल्हार गार्डन पहुंची। यहां कबीर भजन गायक प्रह्लाद टिपानिया की भजन संध्या आयोजित हुई।
इसी दौरान अमृता राय से खुलासा फर्स्ट की बातचीत हुई। इस अवसर पर स्टेट प्रेस क्लब ने अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल के नेतृत्व में दिग्विजय सिंह और अमृता राय का सम्मान कर अभिनंदन पत्र भेंट किया।
नर्मदा परिक्रमा निजी संकल्प थी, यह यात्रा सार्वजनिक उद्देश्य से जुड़ी... दिग्विजय सिंह की यात्राओं का जिक्र हो तो उनकी नर्मदा परिक्रमा का उल्लेख स्वाभाविक है। 30 सितंबर 2017 को बरमान घाट से शुरू हुई यह यात्रा 9 अप्रैल 2018 को उसी घाट पर संपन्न हुई थी।
करीब 192 दिनों तक चले इस सफर में अमृता राय भी उनके साथ रहीं। अमृता ने दोनों यात्राओं के बीच का अंतर स्पष्ट किया। उनके अनुसार, नर्मदा परिक्रमा दिग्विजय सिंह की निजी यात्रा और संकल्प की पूर्ति से जुड़ी थी।
उसमें नर्मदा के प्रति आस्था रखने वाले भक्त और श्रद्धालु साथ चलते थे। रास्ते कठिन थे-पक्की सड़क नहीं, तो कहीं मिट्टी, पत्थरों और नदी किनारे से गुजरना पड़ता था। ऐसे मार्गों तक लोगों की पहुंच भी सीमित रहती थी।
इसके विपरीत, मौजूदा यात्रा सार्वजनिक उद्देश्य से जुड़ी है। अमृता के मुताबिक, इसमें लोग अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए आ रहे हैं। यही दोनों यात्राओं के स्वरूप का बुनियादी अंतर है। नर्मदा परिक्रमा निजी संकल्प और आध्यात्मिक अनुभव की यात्रा थी, जबकि सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा में लोगों की भागीदारी और सामूहिक भावनाओं की अभिव्यक्ति प्रमुख है।
साथ का अर्थ केवल कदम मिलाना नहीं... नर्मदा परिक्रमा में अमृता राय ने दिग्विजय सिंह के साथ कठिन रास्ते तय किए थे। मौजूदा यात्रा के संदर्भ में उनकी भूमिका एक अलग रूप में सामने आती है। वे इसके उद्देश्य को समझती हैं और इसके व्यापक सामाजिक संदर्भ को रेखांकित करती हैं।
यात्रा से पहले हुई बातचीत, मन की दुविधा और फिर सहज स्वीकृति इस रिश्ते के उस पक्ष को सामने लाती है, जिसमें साथ केवल कदम से कदम मिलाकर चलने तक सीमित नहीं रहता। किसी बड़े संकल्प के पीछे उसे पूरा करने वाले व्यक्ति की इच्छाशक्ति महत्वपूर्ण होती है, लेकिन उसके निकट खड़े लोगों का विश्वास भी उसे संबल देता है।
दिग्विजय सिंह की यात्रा के संदर्भ में अमृता राय की बातों का मानवीय पक्ष यही है। पहले भी उन्होंने नर्मदा परिक्रमा में साथ दिया और अब इस नए सफर के उद्देश्य को समझते हुए उसे स्वीकार किया।
उज्जैन से अयोध्या तक का रास्ता लंबा है। यात्रा के अनेक पड़ाव होंगे और अलग-अलग स्थानों पर लोग इससे जुड़ेंगे। लेकिन इस सफर की शुरुआत से जुड़ी एक बात इसे मानवीय संदर्भ देती है। रास्ते पर निकलने से पहले जीवनसाथी से मन की बात साझा करना और फिर विश्वास के साथ आगे बढ़ना।
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